September 16, 2026 10:16 pm

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अरब सागर में टकराया पाकिस्तानी वॉरशिप: भारतीय युद्धपोत से भिड़कर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ PNS हुनैन, भारत का कड़ा कूटनीतिक प्रहार

सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारे में 15 सितंबर 2026 की शाम एक बेहद खतरनाक और उकसावे वाली सैन्य घटना सामने आई है। नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के एक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत को पाकिस्तानी नौसेना के बिल्कुल नए गाइडेड-मिसाइल कॉर्वेट पीएनएस हुनैन (PNS Hunain F-273) ने सीधे टक्कर मार दी। यह अप्रत्याशित समुद्री भिड़ंत उस समय हुई जब भारतीय नौसेना का वॉरशिप अपने निर्धारित समुद्री क्षेत्र में शांतिपूर्ण गश्त और चौकसी पर था। प्रत्यक्षदर्शी सैन्य सूत्रों और प्रारंभिक परिचालन रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसेना का युद्धपोत अचानक अत्यधिक तेज रफ्तार में गैर-पेशेवर, आक्रामक और असुरक्षित युद्धाभ्यास करते हुए भारतीय युद्धपोत के बेहद करीब आ गया और नियंत्रण खोकर उससे जा टकराया। समुद्र में जहाजों के आवागमन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों और बुनियादी समुद्री शिष्टाचार की धज्जियां उड़ाने वाली इस घटना ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच एक बार फिर भारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव उत्पन्न कर दिया है।

इस जबरदस्त टक्कर में जहां भारतीय युद्धपोत को कोई बड़ा ढांचागत नुकसान नहीं पहुंचा, वहीं दूसरी तरफ भारतीय युद्धपोत से टकराने के बाद पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस हुनैन का अगला हिस्सा और बाह्य ढांचा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के तुरंत बाद पीएनएस हुनैन अपनी गश्त बीच में ही छोड़कर अपनी जान बचाते हुए मरम्मत के लिए कराची बंदरगाह की ओर लौटने को मजबूर हो गया। संकट की इस नाजुक घड़ी में भारतीय युद्धपोत के कमांडिंग अफसर और चालक दल ने असाधारण सामरिक परिपक्वता, अद्वितीय धैर्य और उच्च कोटि के संयम का परिचय दिया, जिसके चलते समुद्र में मिसाइल या तोप दागने जैसी किसी भी बड़ी सैन्य जवाबी कार्रवाई को टाला जा सका। भारत सरकार ने इस दुस्साहसिक और लापरवाह घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी (चार्ज द अफेयर्स) को विदेश मंत्रालय के साउथ ब्लॉक में तलब किया और इस्लामाबाद के इस उकसावे वाले कदम पर बेहद सख्त विरोध पत्र सौंपा।

अरब सागर में भारतीय नौसेना की तकनीकी मजबूती से टकराकर क्षतिग्रस्त होने वाला पीएनएस हुनैन कोई सामान्य गश्ती पोत नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तानी नौसेना का सबसे नया और बहुप्रचारित युद्धपोत है। पीएनएस हुनैन (पेनेंट नंबर एफ-273) पाकिस्तानी नौसेना के यारमूक क्लास बैच-2 ऑफशोर पेट्रोल कॉर्वेट का प्रमुख युद्धपोत है। इसका निर्माण यूरोपीय देश रोमानिया के गालाती में स्थित विख्यात डच रक्षा कंपनी ‘डेमन शिपयार्ड्स’ द्वारा किया गया था। इस आधुनिक युद्धपोत को पाकिस्तानी नौसेना में बहुत हाल ही में, यानी जुलाई 2024 में एक भव्य सैन्य समारोह के दौरान औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। डच डिजाइन पर आधारित यारमूक क्लास के इन पोतों को समुद्र में सतह से सतह पर मार करने, तटीय सुरक्षा सुनिश्चित करने, पनडुब्बी रोधी निगरानी रखने और मिसाइल रक्षा प्रणाली प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। इस्लामाबाद ने अरब सागर में भारतीय नौसेना के पारंपरिक दबदबे को चुनौती देने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट के बावजूद भारी लागत से इस युद्धपोत को अपने बेड़े का हिस्सा बनाया था।

पीएनएस हुनैन के तकनीकी विनिर्देशों की बात करें तो इसकी कुल लंबाई लगभग 95.8 मीटर से 98 मीटर के बीच है, जबकि इसकी चौड़ाई 14.4 से 14.6 मीटर तक है। लगभग 2600 टन विस्थापन क्षमता वाला यह कॉर्वेट चार शक्तिशाली कैटरपिलर डीजल इंजनों द्वारा संचालित होता है, जो इसे समुद्र में 41 से 44 किलोमीटर प्रति घंटे (लगभग 22 से 24 समुद्री मील) की अधिकतम गति प्रदान करते हैं। यह जहाज 22 किलोमीटर प्रति घंटे की किफायती आर्थिक गति पर बिना रुके लगभग 11,000 किलोमीटर (6,000 समुद्री मील) तक लगातार यात्रा करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, यह युद्धपोत बिना किसी बंदरगाह पर रुके लगातार 40 दिनों तक समुद्र के गहरे पानी में तैनात रहने के लिए पूरी तरह सक्षम है। इसके पिछले हिस्से में एक बड़ा फ्लाइट डेक और हैंगर मौजूद है, जिस पर समुद्री निगरानी हेलीकॉप्टर और मानव रहित हवाई वाहन (UAV) तैनात किए जा सकते हैं। त्वरित समुद्री हमलों और बोर्डिंग ऑपरेशनों के लिए इस पर दो रिजिड हल इन्फ्लेटेबल बोट्स (RHIB) भी ले जाने की व्यवस्था की गई है।

पाकिस्तानी नौसेना ने पीएनएस हुनैन को केवल एक गश्ती पोत नहीं बल्कि एक आक्रामक मिसाइल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने का दावा किया था। इस युद्धपोत पर तुर्किए की प्रमुख रक्षा कंपनी असेलमान द्वारा निर्मित अत्याधुनिक वेपन स्टेशन लगाए गए हैं। इसके मुख्य डेक पर 30 मिलीमीटर का असेलमान स्मैश (SMASH) रिमोट-कंट्रोल्ड वेपन स्टेशन स्थापित है, जो रात के अंधेरे में भी लक्ष्यों को ट्रैक करने में सक्षम है। इसके साथ ही नजदीकी सुरक्षा के लिए दो 12.7 मिलीमीटर असेलमान स्टैम्प (STAMP) रिमोट वेपन स्टेशन लगाए गए हैं। सतह पर मौजूद दुश्मन के युद्धपोतों और जमीन पर स्थित ठिकानों को भारी तबाही के साथ निशाना बनाने के लिए इस जहाज पर पाकिस्तान द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ‘हरबह’ (Harbah) सब-सोनिक क्रूज मिसाइल के दो ट्विन-सेल या क्वॉड-सेल (कुल चार से आठ मिसाइलें) लॉन्चर लगाए जाने का प्रावधान है। हरबह मिसाइल समुद्र से सतह पर और समुद्र से जमीन पर अचूक प्रहार करने में सक्षम मानी जाती है।

हवाई हमलों और इनकमिंग एंटी-शिप मिसाइलों से जहाज को बचाने के लिए इस पर 20 मिलीमीटर की फालैंक्स ब्लॉक 1बी क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) अथवा तुर्किए निर्मित समकक्ष रैपिड-फायर एयर डिफेंस सिस्टम लगाया गया है। जहाज की इलेक्ट्रॉनिक आंखों और कानों के रूप में इस पर एमआर-36ए (MR-36A) सरफेस और एयर सर्च रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सूट और इनकमिंग गाइडेड मिसाइलों को भटकाने वाले अत्याधुनिक डेकोय डिस्पेंसिंग लॉन्चर लगाए गए हैं। पाकिस्तानी नौसेना का इरादा इस कॉर्वेट को बहुउद्देश्यीय समुद्री सुरक्षा अभियानों, खुले समुद्र में आक्रामक पैट्रोलिंग और सीमित एयर डिफेंस अभियानों में आगे रखने का था। हालांकि, अरब सागर में हुई इस हालिया गैर-जिम्मेदाराना हरकत ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और हथियारों से लैस होने के बावजूद, चालक दल में पेशेवर समुद्री प्रशिक्षण और नेविगेशन अनुशासन की भारी कमी युद्धपोत के लिए ही आत्मघाती साबित हो सकती है।

अरब सागर में पाकिस्तानी युद्धपोत द्वारा भारतीय नौसेना के जहाज को जानबूझकर खतरे में डालने की इस घटना ने दोनों देशों के बीच तीन दशक पुराने द्विपक्षीय समझौतों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान की यह उकसावे भरी कार्रवाई 6 अप्रैल 1991 को हस्ताक्षरित ‘सैन्य अभ्यासों, सैन्य युद्धाभ्यासों और सैनिकों की गतिविधियों पर भारत-पाकिस्तान समझौते’ (Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troop Movements) का सीधा और घोर उल्लंघन है। इस ऐतिहासिक संधि की धारा 10 (Article 10) स्पष्ट रूप से यह निर्देश देती है कि दोनों देशों की नौसेनाओं, थल सेनाओं और वायु सेनाओं को एक-दूसरे के निकट आक्रामक युद्धाभ्यास, अप्रत्याशित नजदीकी आवागमन या ऐसी किसी भी सैन्य गतिविधि से पूरी तरह बचना होगा जिससे समुद्र या वायुक्षेत्र में गलतफहमी, गलत आकलन (Miscalculation) या अनपेक्षित सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हो।

पाकिस्तानी युद्धपोत का अत्यधिक तीव्र गति में भारतीय निगरानी पोत के बेहद करीब आना और उससे टकरा जाना इस समझौते के मूल सिद्धांतों पर सीधा कुठाराघात है। नई दिल्ली में तलब किए गए पाकिस्तानी राजनयिक को विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस प्रकार की बचकानी और आक्रामक हरकतें किसी भी समय बड़े सामरिक संकट में बदल सकती हैं। भारत ने पाकिस्तान से इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय कोर्ट ऑफ इंक्वायरी कराने, दोषी नौसैनिक अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नौसेना की सतर्कता और पेशेवर संयम ने एक विनाशकारी संघर्ष को टाल दिया, लेकिन पाकिस्तानी नौसेना के आधुनिक पोत को पहुंची गंभीर क्षति ने इस्लामाबाद के सैन्य रणनीतिकारों के होश उड़ा दिए हैं।

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