September 16, 2026 4:37 pm

कौन हैं IAS हरजोत कौर बम्हरा? जिन्हें सौंपी गई बिहार लोक सेवा आयोग अध्यक्ष पद की अहम जिम्मेदारी

बिहार प्रशासनिक महकमे और देश भर की सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे युवाओं के बीच इस वक्त एक बहुत ही बड़ा और चौंकाने वाला नाम चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। बिहार सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और गतिशील बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हरजोत कौर बम्हरा (Harjot Kaur Bamhrah) को बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। अपनी बेहद कड़क प्रशासनिक शैली, उत्कृष्ट कार्यक्षमता और लंबे प्रशासनिक अनुभव के लिए पहचानी जाने वाली हरजोत कौर बम्हरा को यह नई कमान मिलने के बाद से राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्य की सबसे प्रतिष्ठित और प्रमुख भर्ती संस्था माने जाने वाले बीपीएससी (BPSC) की बागडोर एक अनुभवी और सख्त छवि वाली महिला अधिकारी के हाथ में आने से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और समयबद्धता को एक नया आयाम मिलेगा, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य और अधिक सुरक्षित हो सकेगा।

हरजोत कौर बम्हरा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1992 बैच की बेहद तेज-तर्रार और वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो मूल रूप से बिहार कैडर से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पूरी की है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एम.फिल (M.Phil) और अंतरराष्ट्रीय कानून में स्नातकोत्तर डिप्लोमा जैसी उच्च डिग्रियां शामिल हैं। अपने तीन दशक से अधिक लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने बिहार सरकार के कई सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभागों में अपनी सेवाएं दी हैं। वे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में अपर मुख्य सचिव, महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक, खान एवं भूतत्व विभाग, तथा समाज कल्याण विभाग जैसे प्रमुख पदों पर सफलतापूर्वक कार्य कर चुकी हैं। अपनी कार्यशैली में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त न करने वाली अधिकारी के रूप में उनकी पहचान प्रशासनिक हलकों में हमेशा से एक कड़क और निष्पक्ष अधिकारी की रही है।

अपने कड़े तेवर और बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली हरजोत कौर बम्हरा कुछ समय पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपने उस चर्चित बयान को लेकर भी राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गई थीं, जिसमें उन्होंने एक छात्रा के सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उस घटना के बाद सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक में उनकी कार्यशैली पर लंबी बहस छिड़ गई थी, जिसके बाद सरकार स्तर पर भी इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था। हालांकि, इन तमाम विवादों और चर्चाओं के बावजूद उनकी प्रशासनिक योग्यता, फाइलों को तेजी से निपटाने की क्षमता और नियमों के प्रति उनकी कठोर प्रतिबद्धता पर कभी कोई आंच नहीं आई। सरकार ने उनकी इन्हीं प्रशासनिक योग्यताओं और भ्रष्टाचार मुक्त छवि को प्राथमिकता देते हुए उन्हें राज्य की सबसे बड़ी संवैधानिक और चयन संस्था BPSC की कमान सौंपने का यह बड़ा और रणनीतिक निर्णय लिया है।

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) पिछले कुछ वर्षों से लगातार परीक्षाओं के पेपर लीक, रिजल्ट में देरी, छात्रों के आंदोलन और विभिन्न तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर सुर्खियों में रहा है, जिससे आयोग की साख को भी धक्का लगा है। ऐसे में हरजोत कौर बम्हरा के सामने सबसे बड़ी और पहली चुनौती यह होगी कि वे आयोग के कामकाज में पूरी तरह से पारदर्शिता लाएं और परीक्षाओं का कैलेंडर बिल्कुल दुरुस्त रखें ताकि छात्रों को परिणामों के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। पिछले कुछ समय से BPSC ने अपनी परीक्षा प्रणाली में कई बड़े और आधुनिक सुधार किए हैं, जिनमें ऑनलाइन आवेदन से लेकर सख्त सुरक्षा मानकों के तहत परीक्षा आयोजित कराना शामिल है। एक अनुभवी और सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में हरजोत कौर बम्हरा के बीपीएससी की कमान संभालने से यह उम्मीद की जा रही है कि वे इन सभी सुधारों को और अधिक मजबूती से लागू करेंगी और परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर पूरी तरह लगाम कसने में सफल रहेंगी।

बिहार और देश भर के उन लाखों मेधावी युवाओं के लिए जो दिन-रात एक करके सिविल सेवा और अन्य प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, BPSC की निष्पक्षता सबसे बड़ा मुद्दा होती है। जब कोई अधिकारी अपनी ईमानदारी और कड़क मिजाज के लिए जाना जाता है, तो छात्रों का भरोसा अपने आप उस संस्था पर बढ़ जाता है। हरजोत कौर बम्हरा की इस पद पर नियुक्ति के बाद छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों के बीच यह सकारात्मक संदेश गया है कि अब मूल्यांकन प्रक्रिया और चयन सूची पूरी तरह से योग्यता के आधार पर तैयार होगी। बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने और शिक्षित युवाओं को उनके हक का मुकाम दिलाने के लिहाज से यह बदलाव आने वाले समय में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिस पर हर किसी की पैनी नजर बनी हुई है।

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