
देश की आर्थिक राजधानी दिल्ली से सटे साइबर सिटी गुरुग्राम (Gurugram) के हाई-प्रोफाइल और अत्याधुनिक द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) से इस वक्त की एक बेहद दिल दहला देने वाली और खौफनाक दुर्घटना सामने आ रही है। सड़क निर्माण और रखरखाव के कार्यों में लगे आम गरीब मजदूरों की सुरक्षा पर एक बार फिर से बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान लग गया है। द्वारका एक्सप्रेसवे के व्यस्त और चमचमाते ट्रैक पर उस वक्त कोहराम मच गया जब एक बेलगाम और तेज रफ्तार कार ने सड़क के बीच बने डिवाइडर पर शांति से अपना काम कर रहे चार मासूम और बेकसूर मजदूरों को अपनी चपेट में लेते हुए बुरी तरह कुचल दिया। इस वीभत्स हादसे की तीव्रता इतनी जबरदस्त थी कि मौके पर मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। कार की टक्कर इतनी जोरदार थी कि दो मजदूरों ने तो अपनी जान मौके पर ही दम तोड़ते हुए गंवा दी, जबकि अन्य दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तुरंत खून से लथपथ हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दर्दनाक घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय श्रमिकों के साथ-साथ आम नागरिकों में भी भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, यह भयानक हादसा उस वक्त हुआ जब ये सभी चारों मजदूर द्वारका एक्सप्रेसवे के एक हिस्से पर डिवाइडर की साफ-सफाई, हरियाली या मरम्मत का काम कर रहे थे। रात या शाम के वक्त जब वाहनों की गति हाइवे पर बहुत तेज होती है, अक्सर नियमों को ताक पर रखकर गाड़ियां सरपट दौड़ती हैं। ठीक उसी समय तेज रफ्तार से आ रही एक अनियंत्रित कार ने डिवाइडर के पास काम कर रहे इन मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं दिया और पलक झपकते ही उन्हें कुचलते हुए आगे निकल गई। कार की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि टक्कर लगने के बाद मजदूर हवा में उछलकर दूर जा गिरे। घटनास्थल का मंजर बेहद दर्दनाक था, जहां चारों तरफ खून के धब्बे और मजदूरों के काम करने वाले औजार बिखरे पड़े थे। जिन दो मजदूरों की मौके पर मौत हुई, उनकी पहचान के बाद उनके परिवारों में कोहराम मच गया है, क्योंकि वे अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे जो पेट पालने के लिए इस एक्सप्रेसवे पर मजदूरी का काम कर रहे थे। इस तरह की लापरवाह ड्राइविंग और तेज रफ्तार का कहर अक्सर निर्दोष लोगों की जान ले लेता है, और इस घटना ने एक बार फिर से इस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है।
द्वारका एक्सप्रेसवे पर हुए इस भीषण हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस थाना की टीम और ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बिना देर किए घायलों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है, वहीं जान गंवाने वाले दोनों मजदूरों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात कार चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मोटर व्हीकल एक्ट की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। हादसे के बाद से कार चालक अपनी गाड़ी समेत मौके से फरार होने में कामयाब हो गया था, जिसकी तलाश के लिए पुलिस अब एक्सप्रेसवे और आसपास के टोल प्लाजा पर लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगालने में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ड्राइवर की पहचान जल्द ही कर ली जाएगी और उसे कानून के कटघरे में खड़ा करके कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इस घटना के बाद से पुलिस प्रशासन पर भी यह दबाव बढ़ गया है कि वे एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाएं ताकि इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
इस पूरे हादसे ने सड़क निर्माण और रखरखाव का ठेका लेने वाली कंपनियों, एजेंसियों और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। हाइवे या एक्सप्रेसवे जैसे अत्यंत व्यस्त और तेज रफ्तार वाले मार्गों पर जब भी मरम्मत या निर्माण कार्य किया जाता है, तो नियमों के तहत वहां पर्याप्त सुरक्षा बैरिकेड्स, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड (Warning Signs) और सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए ताकि दूर से आ रहे वाहन चालकों को यह पता चल सके कि आगे काम चल रहा है। लेकिन शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि कई जगहों पर ठेकेदार बिना किसी उचित सुरक्षा इंतजाम या पर्याप्त रोशनी के ही मजदूरों को अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने के लिए छोड़ देते हैं। सुरक्षा मानकों की इस तरह की अनदेखी सीधे तौर पर गरीब मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ है। स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लापरवाह ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ भी हत्या के समान धाराओं में मामला दर्ज किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य मजदूर को इस तरह अपनी जान न گवानी पड़े।
गुरुग्राम के द्वारका एक्सप्रेसवे पर हुआ यह दर्दनाक हादसा इस बात का प्रतीक है कि हमारे देश में यातायात के नियमों का पालन न करना और लापरवाही से गाड़ी चलाना कितना खतरनाक साबित हो सकता है। दो परिवारों के उजड़ जाने का यह गम कभी भरा नहीं जा सकता, और यह घटना हम सभी के अंतरात्मा को झकझोर कर रख देती है। सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर एक वाहन चालक का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह गति सीमा (Speed Limit) का पालन करें और सड़क पर काम कर रहे मजदूरों या अन्य लोगों की जान की कद्र करें। क्या इस हादसे के बाद प्रशासन कोई सख्त ट्रैफिक नियम लागू करेगा और क्या इन गरीब मजदूरों के आश्रितों को उचित मुआवजा मिल पाएगा? इन तमाम सवालों के जवाब आने वाले समय में पुलिस और सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करते हैं, लेकिन फिलहाल इस दुर्घटना ने पूरे गुरुग्राम को गमगीन और स्तब्ध कर दिया है।









