
गुलाबी नगरी जयपुर के पारंपरिक और ऐतिहासिक बाजारों की साख और व्यापारिक व्यस्तता के बीच एक बार फिर से एक ऐसा दर्दनाक हादसा सामने आया है जिसने शहर के कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। शहर के सबसे पुराने और भीड़भाड़ वाले व्यापारिक केंद्रों में शुमार प्रसिद्ध ‘पुरोहित जी का कटला’ (Purohit Ji Ka Katla) में बीती रात अचानक भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और कई कपड़ा दुकानों को अपनी आगोश में ले लिया। आग की लपटें और आसमान छूता काले धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था, जिससे स्थानीय निवासियों और दुकानदारों में भारी अफरा-तफरी मच गई। जब तक दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू करतीं, तब तक आग कई दुकानों में रखे लाखों रुपये के महंगे कपड़ों, रेडीमेड गारमेंट्स और कैश को जलाकर खाक कर चुकी थी। जयपुर के इस प्रमुख कपड़ा मार्केट में इस तरह अचानक आग लगने की घटना ने न केवल व्यापारियों को आर्थिक रूप से तोड़कर रख दिया है, बल्कि शहर के पारंपरिक बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
इस पूरी दुर्घटना का सबसे डरावना और चिंताजनक पहलू यह है कि पुरोहित जी के कटले में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले छह वर्षों के भीतर यहां घटित होने वाला यह तीसरा सबसे बड़ा भीषण हादसा है। स्थानीय दुकानदारों और व्यापार महासंघ के सदस्यों का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम को बार-बार आगाह करने के बावजूद ऐतिहासिक बाजारों की फायर सेफ्टी को लेकर कभी भी ठोस कदम नहीं उठाए गए। संकरी गलियां, दुकानों के ऊपर से गुजर रहे बेतरतीब और जर्जर बिजली के तारों का जाल, और अग्निशमन यंत्रों की भारी कमी इस बाजार को हर साल किसी बड़े खतरे के मुहाने पर ला खड़ा करती है। छह साल पहले भी यहां दो बार ऐसी ही भयंकर आग लग चुकी है जिसमें करोड़ों का नुकसान हुआ था, और अब तीसरी बार ऐसा होने से व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका आरोप है कि हर बार हादसे के बाद सिर्फ आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते, जिसके कारण मेहनतकश व्यापारियों को बार-बार बर्बादी का सामना करना पड़ता है।
घटना की सूचना मिलते ही जयपुर फायर ब्रिगेड के तमाम आला अधिकारी और दमकल की एक दर्जन से अधिक गाड़ियां तुरंत मौके पर रवाना हो गईं। आग इतनी भीषण थी कि उस पर पूरी तरह काबू पाने के लिए दमकल कर्मियों को कई घंटों तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। संकरी गलियां होने के कारण दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिससे आग ने और अधिक फैलने का मौका पा लिया। शुरुआती जांच-पड़ताल और फॉरेंसिक संकेतों के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि आग लगने का मुख्य कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) हो सकता है, क्योंकि बाजार की पुरानी वायरिंग और ओवरलोडिंग लंबे समय से नासूर बनी हुई थी। गनीमत यह रही कि यह हादसा रात के समय या दुकान बंद होने के बाद हुआ, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली, वरना दिन के व्यस्त समय में हजारों लोगों की भीड़ होने पर एक बहुत बड़ा नरसंहार भी हो सकता था। पुलिस और प्रशासन ने अब इस मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस लापरवाही के असली जिम्मेदार कौन हैं।
इस भयानक अग्निकांड में कई छोटे और मध्यम वर्गीय दुकानदारों की सालभर की कमाई और शादियों के सीजन के लिए मंगाया गया महंगा कपड़ा पलक झपकते ही राख के ढेर में बदल गया। कई व्यापारियों ने रोते हुए बताया कि उनके पास बीमा कवर भी नहीं था और अब उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। इस घटना के बाद से पूरे जयपुर व्यापार मंडल में शोक और आक्रोश का माहौल है। व्यापारियों ने मांग की है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन तुरंत इस नुकसान का आकलन करके प्रभावित दुकानदारों को उचित मुआवजा दे और इस पूरे बाजार की विद्युत व्यवस्था तथा फायर सेफ्टी का एक स्पेशल ऑडिट कराए। जब तक ऐतिहासिक बाजारों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक इस तरह के हादसों को रोक पाना मुमकिन नहीं होगा।
अंततः, जयपुर के पुरोहित जी के कटले में लगी यह भीषण आग हमें यह चेतावनी देती है कि यदि हमने समय रहते सबक नहीं सीखा, तो लापरवाही की यह कीमत किसी बड़े मानवीय नुकसान के रूप में चुकानी पड़ सकती है। प्रशासन, बिजली विभाग और स्थानीय व्यापारियों को मिलकर एक साझा रणनीति बनानी होगी ताकि पुरानी इमारतों और बाजारों की वायरिंग व सुरक्षा मानकों को आधुनिक बनाया जा सके। पीड़ित व्यापारियों के आंसुओं को पोंछने और उन्हें दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए सरकार को आगे आना होगा, तभी इन ऐतिहासिक बाजारों की रौनक और कारोबार सुरक्षित रह सकेगा।









