

चित्रकूट। चंद्रग्रहण के चलते धर्मनगरी चित्रकूट में धार्मिक परंपराओं का विशेष रूप से पालन किया जा रहा है। ग्रहण से 9 घंटे पूर्व लगने वाले सूतक काल के कारण कामदगिरी प्राचीन मुखारविंद मंदिर में प्रातःकालीन आरती, पूजा एवं भोग संपन्न कराने के बाद भगवान के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए गए।
मंदिर प्रशासन के अनुसार सूतक काल प्रारंभ होते ही मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना स्थगित कर दी जाती है। शाम 7:00 बजे ग्रहण समाप्ति के उपरांत शुद्धिकरण विधि पूरी कर पुनः भगवान के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।
इस संबंध में कथावाचक नवलेश दीक्षित जी महाराज ने बताया कि चंद्रग्रहण का यह विशेष संयोग कई वर्षों बाद पड़ रहा है। यद्यपि चित्रकूट क्षेत्र में ग्रहण का प्रभाव लगभग एक घंटे तक ही रहेगा, फिर भी शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार सूतक का पालन पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से किया जा रहा है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि ग्रहण काल में जप, तप और भगवान का स्मरण करें तथा ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान कर पुण्य लाभ प्राप्त करें।
धर्मनगरी चित्रकूट में चंद्रग्रहण को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था का वातावरण बना हुआ है। मंदिरों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि ग्रहण उपरांत श्रद्धालु सुचारु रूप से दर्शन कर सकें।








