March 12, 2026 6:16 pm

चित्रकूट में मासूम बच्चों की नृशंस हत्या के मामले में न्यायालय ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, हत्यारोपी को सुनाई गई फांसी की सजा

चित्रकूट महिला और चार बच्चों की गला रेतकर हत्या करने वाले पति को कोर्ट ने सुनाई फांसी, पत्नी को आजीवन काराकास 8 साल बाद आया ऐतिहासिक फैसला

चित्रकूट राजपुर थाना क्षेत्र के अमान गांव में 25 अप्रैल 2017 को सामने आए दिल दहला देने वाले हत्याकांड में चित्रकूट की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला जज प्रथम अनुराग कुरील की कोर्ट ने गुरुवार को आरोपी अवधेश कुमार यादव फंसी की सजा और उसकी पत्नी कुसुम देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

इस सनसनीखेज हत्याकांड में बिहार मूल की महिला लालमुनि और उसके साथ रह रहे संगीता, गीता, गौरी, किशन नाम के मासूम बच्चों की गला रेतकर हत्या की गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।

क्या था पूरा मामला

गुजरात के भुज में प्राइवेट नौकरी करने वाला आरोपी अवधेश कुमार यादव वहीं रहने वाली बिहार निवासी लालमुनि के संपर्क में आया। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और अवधेश उसे अपने पैतृक गांव चित्रकूट के राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव ले आया।

कुछ दिन साथ रहने के बाद जब लालमुनि उसके लिए बोझ बनने लगी, तो अवधेश ने अपनी पत्नी कुसुम देवी के साथ मिलकर लालमुनि और उसके चार बच्चों की नृशंस हत्या कर दी। सभी के गले धारदार हथियार से रेते गए थे और शवों को गांव के ही एक बाग में बोरियों में भरकर फेंक दिया गया था।

घटनास्थल से मिला सुराग

जब पुलिस ने घटनास्थल की जांच की तो एक झूले से अवधेश का पैन कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर लिखा कागज बरामद हुआ। इसके बाद शक की सुई सीधी अवधेश की ओर घूम गई। पुलिस ने तत्काल अवधेश के घर दबिश दी, लेकिन पति-पत्नी फरार हो चुके थे।

घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने एक विशेष टीम गठित कर गुजरात रवाना किया था। कड़ी मेहनत के बाद पुलिस ने सुरागों को जोड़ा और हत्या की गुत्थी सुलझाई।

कोर्ट में मजबूत पैरवी, मिली फांसी

पुलिस की तफ्तीश और साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन ने कोर्ट में मजबूत पैरवी की। सभी गवाहियों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए अदालत ने इस जघन्य अपराध को दुर्लभतम से दुर्लभ मानते हुए आरोपी पति-पत्नी को सजा सुनाई।

8 साल तक भटकते रहे परिजन, अब मिली न्याय की उम्मीद

मृतकों के परिजन पिछले 8 वर्षों से न्याय की आस में दर-दर भटक रहे थे। आज कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने राहत की सांस ली है। परिजनों ने न्यायपालिका का आभार जताते हुए कहा कि इस फैसले ने न्याय में उनकी आस्था को और मजबूत किया है।

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