September 13, 2026 3:46 am

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चीनी राष्ट्रपति : BRICS 2026 शिखर सम्मेलन में आज शाम 5:45 बजे पीएम मोदी से होगी अहम द्विपक्षीय बैठक

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक राजनीति के गलियारों से इस समय की सबसे बड़ी और बेहद रोमांचक खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहे प्रतिष्ठित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन यानी BRICS 2026 में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग विशेष विमान से भारत की धरती पर पहुंच चुके हैं। हवाई अड्डे पर उनका भव्य और गरिमामयी स्वागत किया गया, जिसके बाद वे सीधे अपने निर्धारित कार्यक्रमों के लिए रवाना हो गए। आज शाम ठीक 5:45 बजे दुनिया के दो सबसे बड़े और प्रभावशाली नेताओं यानी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक उच्चस्तरीय आमने-सामने की बैठक होने वाली है। इस बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय मुलाकात को लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है क्योंकि हालिया भू-राजनीतिक परिदृश्य में एशिया की इन दो महाशक्तियों का एक मंच पर आना वैश्विक शांति, व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से बेहद निर्णायक माना जा रहा है।

भारत इस साल ब्रिक्स (BRICS 2026) के ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है, जिसमें उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल साउथ के तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष शिरकत कर रहे हैं। इस वैश्विक महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, आपसी व्यापार को स्थानीय मुद्राओं में बढ़ावा देना और पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रभुत्व के सामने एक संतुलित वित्तीय ढांचा तैयार करना है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत आना इस सम्मेलन के महत्व को और अधिक बढ़ा देता है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, जिन्हें सामान्य करने और सीमा पर स्थायी शांति बहाल करने की दिशा में कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी विदेश नीति के चलते आज भारत वैश्विक मंचों पर एक ऐसे केंद्र के रूप में उभर चुका है जहां दुनिया भर के विरोधी देश भी बैठकर संवाद करने के लिए तैयार होते हैं। इस शिखर सम्मेलन के जरिए भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह वैश्विक दक्षिण की आवाज को पूरी मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखने की क्षमता रखता है।

आज शाम 5:45 बजे शुरू होने वाली इस महा-बैठक में मुख्य रूप से तीन ऐसे संवेदनशील और बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा होने की प्रबल संभावना है, जो दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा तय करेंगे। सबसे पहला और सबसे अहम मुद्दा वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर शांति और स्थिरता कायम रखने के साथ-साथ सैनिकों की पूरी तरह से डी-एस्कलेशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है, ताकि सीमावर्ती इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल हो सके। दूसरा प्रमुख मुद्दा द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन को दूर करना, आर्थिक प्रतिबंधों के दौर में सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना और दोनों देशों के बीच बिजनेस निवेश के नए रास्तों को तलाशना है। तीसरा और अंतिम महत्वपूर्ण बिंदु वैश्विक मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र, जी-20 और ब्रिक्स के भीतर जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और बहुपक्षीय सुधारों पर आपसी सहमति बनाना है। इन तीनों मुद्दों पर होने वाली यह चर्चा न केवल दोनों देशों के बीच विश्वास की बहाली में मदद करेगी, बल्कि दक्षिण एशिया और पूरी दुनिया में एक सकारात्मक संदेश भी प्रसारित करेगी।

आज की यह द्विपक्षीय बैठक केवल भारत और चीन तक ही सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि अमेरिका, यूरोप और रूस समेत पूरी दुनिया की इस पर पैनी नजर टिकी हुई है। जब दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश आपसी संवाद के जरिए अपने मतभेदों को सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो इसका सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों, ऊर्जा आपूर्ति और कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिलता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस बैठक में सीमा विवाद और व्यापारिक साझेदारी को लेकर कोई ठोस सकारात्मक प्रगति होती है, तो यह एशिया महाद्वीप में आर्थिक विकास और रणनीतिक स्थिरता के एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकती है। भारत हमेशा से इस बात पर जोर देता रहा है कि संप्रभुता का सम्मान और आपसी सहयोग ही किसी भी स्थायी रिश्ते की मजबूत नींव होते हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी स्पष्ट रुख के साथ चीनी राष्ट्रपति के सामने देश के हितों को पूरी दृढ़ता से रखेंगे।

ब्रिक्स 2026 के इस ऐतिहासिक मंच से निकलने वाले नतीजे आने वाले दशकों की वैश्विक व्यवस्था की रूपरेखा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली यह हाई-प्रोफाइल बैठक इस बात का प्रतीक है कि कूटनीति में संवाद के दरवाजे कभी बंद नहीं होने चाहिए, चाहे मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों। देश के करोड़ों नागरिकों और पूरी दुनिया की सांसें आज शाम 5:45 बजे होने वाली इस बैठक के परिणामों पर टिकी हुई हैं, जो यह तय करेगी कि एशिया की ये दोनों बड़ी ताकतें अपने द्विपक्षीय संबंधों को किस नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार हैं। भारत की कूटनीतिक परिपक्वता और रणनीतिक सूझबूझ एक बार फिर यह साबित कर रही है कि देश हर चुनौती का सामना करते हुए वैश्विक शांति और अपने राष्ट्रीय हितों के बीच बेहतरीन संतुलन बनाना अच्छी तरह जानता है।

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