September 14, 2026 12:13 pm

दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज कब है, 6 से 11 नवंबर तक 5 दिनों के दीपोत्सव का संपूर्ण पंचांग और शुभ मुहूर्त

सनातन परंपरा में कार्तिक मास को आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और प्रकाश उत्सव का सबसे पावन कालखंड माना जाता है। शरद ऋतु की शुरुआत के साथ ही समूचे भारतवर्ष में पांच दिवसीय महापर्व दीपोत्सव की तैयारियां अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो जाती हैं। अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और अधर्म पर धर्म की शाश्वत विजय का यह पर्व केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और प्रकृति के पोषक भगवान श्रीकृष्ण की आराधना का अनुपम संगम है। वैदिक पंचांग की सूक्ष्म गणनाओं के आधार पर वर्ष 2026 में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से लेकर शुक्ल पक्ष की द्वितीया तक पड़ने वाले इस पावन दीपोत्सव के पांचों दिनों की सटीक तिथियां, चौघड़िया योग और पूजन के सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत है।

दीपोत्सव का दिव्य शुभारंभ कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस यानी धनत्रयोदशी के पर्व से होता है। इस दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि, धन के अधिपति कुबेर देव और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 06 नवंबर 2026 को प्रातः 10 बजकर 30 मिनट पर होगा, जिसका समापन 07 नवंबर को प्रातः 10 बजकर 47 मिनट पर होगा। उदयातिथि और प्रदोष व्यापिनी तिथि के समन्वय के आधार पर धनतेरस का महापर्व शुक्रवार, 06 नवंबर 2026 को ही श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा।

धनतेरस पर सोना, चांदी, नए बर्तन, पीतल, धनिया, झाड़ू और बहीखातों की खरीदारी अत्यंत शुभ और अक्षय समृद्धि देने वाली मानी जाती है। 06 नवंबर को धनतेरस पूजन का सबसे पावन और मंगलकारी शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 19 मिनट से रात 08 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इस 1 घंटा 58 मिनट की अवधि के दौरान स्थिर लग्न में भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार पूजा करना और यमराज के निमित्त घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपदान (यम दीपम) करना परिवार को अकाल मृत्यु और व्याधियों से मुक्ति दिलाता है।

पंचमहोत्सव के दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस, छोटी दिवाली और काली चौदस के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक असुर का वध करके 16 हजार कन्याओं को उसके बंदीगृह से मुक्त कराया था। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 07 नवंबर 2026 को प्रातः 07 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 08 नवंबर को प्रातः 11 बजकर 27 मिनट तक प्रभावी रहेगी। ऐसे में नरक चतुर्दशी का पर्व शनिवार, 07 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।

इस दिन सूर्योदय से पूर्व उबटन और तिल के तेल से अभ्यंग स्नान कर यम तर्पण करने से सौंदर्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, तंत्र साधना और नकारात्मक ऊर्जा के नाश के लिए काली चौदस का विशेष पूजन निशीथ काल में किया जाता है। पंचांग के अनुसार, काली चौदस का तांत्रिक और सात्विक पूजा मुहूर्त 08 नवंबर की मध्यरात्रि 11 बजकर 49 मिनट से देर रात 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इस 52 मिनट की अवधि में मां काली, भगवान भैरव और पवनपुत्र हनुमान की साधना करने से जीवन के सभी ज्ञात-अज्ञात संकटों का निवारण होता है।

दीपोत्सव का मुख्य दिन कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जब घर-घर में दीयों की रोशनी के बीच माता महालक्ष्मी और भगवान श्री गणेश का आह्वान किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि की शुरुआत रविवार, 08 नवंबर 2026 को प्रातः 11 बजकर 27 मिनट पर होगी, जबकि अमावस्या तिथि का समापन सोमवार, 09 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। चूंकि दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन सदैव प्रदोष काल और निशीथ काल में अमावस्या तिथि की मौजूदगी में किया जाता है, इसलिए दीपावली का महापर्व 08 नवंबर 2026 को ही पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।

दीपावली की शाम को लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रदोष काल शाम 05 बजकर 31 मिनट से रात 08 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इसी प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न वृषभ का शुभ संयोग शाम 05 बजकर 54 मिनट से रात 07 बजकर 50 मिनट तक बनेगा। इस 1 घंटा 56 मिनट की अवधि को गृहस्थों और व्यापारियों के लिए श्रीयंत्र, बहीखाता, कनकधारा स्रोत पाठ और लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। स्थिर लग्न में की गई लक्ष्मी पूजा से धन और वैभव घर में चिरकाल तक स्थायी रहता है।

दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का लोकपर्व मनाया जाता है। द्वापर युग में देवराज इंद्र के अहंकार को चूर करने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका उंगली पर गिरिराज गोवर्धन को उठाया था। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 09 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगी और यह 10 नवंबर को दोपहर 02 बजकर 00 मिनट तक रहेगी। सनातन धर्म में उदयातिथि और गोवर्धन पूजा की परंपरा के तहत यह पर्व सोमवार, 09 नवंबर 2026 को उल्लासपूर्वक मनाया जाएगा।

गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 40 मिनट से 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस 2 घंटे 10 मिनट की मंगलमय वेला में श्रद्धालु अपने घर के आंगन में गाय के शुद्ध गोबर से गोवर्धन पर्वत, ग्वाल-बाल और गोवंश की आकृतियां बनाकर उनकी पुष्प, फल, धूप, दीप और गंध से पूजा करते हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग और विविध प्रकार के अन्नों से तैयार ‘अन्नकूट’ का नैवेद्य अर्पित किया जाता है, जो पर्यावरण, गोवंश और प्रकृति के प्रति मनुष्य के कृतज्ञता भाव को दर्शाता है।

पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन भाई-बहन के असीम स्नेह और विश्वास के प्रतीक भाई दूज (यम द्वितीया) के साथ होता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के निमंत्रण पर उनके घर भोजन करने पहुंचे थे और यमुना जी ने उनका तिलक कर दीर्घायु का वरदान मांगा था। पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से प्रारंभ होगी और बुधवार, 11 नवंबर 2026 को दोपहर 03 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, द्वितीया तिथि में अपराह्न काल का संयोग 11 नवंबर को प्राप्त हो रहा है, इसलिए भाई दूज का पर्व बुधवार, 11 नवंबर 2026 को श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाएगा।

भाई दूज पर बहनों द्वारा भाइयों के मस्तक पर मंगल तिलक लगाने और उनकी आरती उतारने का सबसे पावन अपराह्न समय दोपहर 01 बजकर 10 मिनट से 03 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस 2 घंटे 10 मिनट की शुभ अवधि में बहनें अपने भाइयों को तिलक कर मिष्ठान खिलाएं और उनकी लंबी उम्र, सफलता और सुख-समृद्धि की कामना करें, जबकि भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार भेंट करें। इस प्रकार धनतेरस से शुरू हुआ यह 5 दिवसीय प्रकाश पर्व भाई दूज के साथ संपन्न होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!