

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के जीवन पर्यंत कुलाधिपति जगदगुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी ने इस अवसर पर कहा कि मेरे द्वारा स्थापित यह विश्वविद्यालय शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र होगा।
इसके लिए समस्त शिक्षकों कर्मचारियों एवं विश्वविद्यालय परिवार को पूर्ण मनोयोग से परिश्रम करना होगा जिससे विश्वविद्यालय का वातावरण शिक्षक एवं शोध के क्षेत्र में प्रभावी बन सके।
उन्होंने आह्वान किया कि इस विश्वविद्यालय की संकल्पना में मेरा आशीर्वाद निहित है अतः मेरी यह दृढ़ इच्छा है कि विश्वविद्यालय निरंतर नवीन ऊंचाइयों को छूता रहे। इस अवसर पर उन्होंने समस्त विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके मंगलमय भविष्य की कामना की और कहा कि विश्वविद्यालय परिवार के प्रत्येक सदस्य का हित उनके संरक्षण में संरक्षित रहेगा।
कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती वंदना से हुआ तत्पश्चात कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया अपने स्वागत उद्बोधन में उन्होंने के अपनी गुरु निष्ठा को व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय को निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर करने हेतु संकल्प व्यक्त किया और कहां कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय में शिक्षक एवं अधिगम के कार्यों में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी और विश्वविद्यालय भविष्य में नए कीर्तिमान को स्थापित करेगा।
इस अवसर पर संगीत विभाग के अध्यक्ष डॉ ज्योति विश्वकर्मा ने सोहर बधाई गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ गोपाल कुमार मिश्र ने किया ।
कार्यक्रम में कुलाधिपति के निजी सचिव रमापति मिश्र, विश्वविद्यालय के कुल सचिव मधुरेंद्र कुमार पर्वत, अधिष्ठाता डा महेंद्र कुमार उपाध्याय, डॉ विनोद कुमार मिश्र , डॉ अमित अग्निहोत्री, डॉ निहार रंजन मिश्र, डॉ गुलाबधर सहित विश्वविद्यालय परिवार के समस्त सदस्य उपस्थित रहे।








