
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने आदेश का पालन न करने पर सख्त रुख अपनाते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) मनीष रस्तोगी, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेंद्रन और किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के निदेशक अजय गुप्ता के खिलाफ 25,000 रुपये का जमानती वारंट जारी किया।
कोर्ट ने अधिकारियों को 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पिछले आदेश की अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई बुधवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने की. कोर्ट ने संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को वारंट का निष्पादन करने का निर्देश दिया है.
रिटायर अधिकारी ने दी थी चुनौती
मामला कृषि विभाग, जबलपुर के पूर्व उपसंचालक देवदत्त विश्वकर्मा से जुड़ा है, जो 30 जून 2023 को सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद विभाग ने उनसे लगभग 2.10 लाख रुपये की वसूली की थी।
याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्हें वर्ष 2006 में समयबद्ध वेतनमान का लाभ दिया गया था, लेकिन वर्ष 2021 में सरकार ने यह कहते हुए आदेश रद्द कर दिया कि समयबद्ध वेतनमान स्वीकृत करने का अधिकार निदेशक स्तर के बजाय सचिव स्तर पर था. इसके बाद मूल रकम और ब्याज जोड़कर करीब 2.10 लाख रुपये की रकम वसूल की गई।
HC ने रकम लौटाने का आदेश दिया
वसूली को चुनौती देते हुए देवदत्त विश्वकर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने 8 मई 2024 को अपना फैसला सुनाते हुए वसूली गई रकम 6 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया था. याचिकाकर्ता का आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद आज तक रकम वापस नहीं की गई, जिसके चलते अवमानना याचिका दायर की गई है.
अन्य अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी
सुनवाई के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी एसके निगम और संभागीय पेंशन अधिकारी नमिता भी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और राज्य सरकार के वकील को दोनों अधिकारियों को तुरंत कोर्ट में तलब करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने उनकी अनुपस्थिति और लापरवाही पर स्पष्टीकरण भी मांगा है.
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले से जुड़े सभी संबंधित अधिकारी 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आदेश के अनुपालन की स्थिति की जानकारी दें.






