September 13, 2026 8:05 pm

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जयपुर में वोटिंग के बीच घिरीं डिप्टी CM दीया कुमारी, बूथ के बाहर लगे ‘UGC रोलबैक’ के नारे

जयपुर में चल रहे मतदान के दौरान उस समय राजनीतिक सरगर्मी अचानक काफी तेज हो गई जब राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी एक मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुंचीं और वहां मौजूद युवाओं ने उनके खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। लोकतंत्र के इस पावन पर्व पर जब हर कोई अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए कतारों में खड़ा था, तब विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र के एक पोलिंग बूथ के बाहर अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हाथ में तख्तियां और जुबान पर कड़े तेवर लिए खड़े प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि चुनाव के इस माहौल में भी कुछ बुनियादी मुद्दे ऐसे हैं जिन्हें युवा नजरअंदाज करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। जैसे ही डिप्टी सीएम दीया कुमारी का काफिला उस मतदान केंद्र के नजदीक पहुंचा, वहां का पूरा माहौल एकदम से बदल गया और सुरक्षाकर्मियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें साफ देखी जाने लगीं।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब दीया कुमारी अपना वोट डालने के लिए पोलिंग बूथ के अंदर जा रही थीं, ठीक उसी दौरान कुछ छात्र और युवा नेता बूथ के मुख्य द्वार के पास इकट्ठा हो गए और उन्होंने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। इन प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यूजीसी के नियमों को पूरी तरह से वापस लेने की थी, जिसे वे छात्रों के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ मान रहे हैं। मतदान के ठीक दिन इस प्रकार का विरोध प्रदर्शन होना प्रशासनिक अमले के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित हुआ क्योंकि एक तरफ जहां शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी थी, वहीं दूसरी तरफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे युवाओं को संभालना भी सुरक्षा बलों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव के समय इस तरह के मुद्दों का उठना सरकार और जनप्रतिनिधियों के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि जनता केवल विकास के वादों पर ही नहीं बल्कि जमीनी और नीतिगत फैसलों पर भी पैनी नजर बनाए रखती है।

दीया कुमारी के बूथ पर पहुंचने से पहले ही वहां छात्रों की हलचल शुरू हो चुकी थी लेकिन नारेबाजी तेज होते ही पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए तत्परता दिखाई। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत घेराबंदी करते हुए यह सुनिश्चित किया कि मतदान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा न आए और न ही वीआईपी मूवमेंट और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई सीधा टकराव हो सके। इस तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद डिप्टी सीएम ने अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी को निभाते हुए बूथ के अंदर प्रवेश किया और अपना वोट डाला, हालांकि बाहर गूंज रहे ‘यूजीसी रोलबैक’ के नारों की गूंज काफी देर तक इलाके में बनी रही। पुलिस अधिकारियों ने मौके की नजाकत को भांपते हुए तुरंत अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया ताकि मतदान केंद्र के आसपास किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके और आम मतदाता बिना किसी डर या संकोच के अपने वोट का प्रयोग कर सकें।

यूजीसी के नियमों को लेकर युवाओं के मन में पनप रहा यह आक्रोश कोई एक दिन का परिणाम नहीं है बल्कि पिछले कुछ समय से लगातार सुलग रहा था जो चुनाव के दिन सार्वजनिक रूप से बाहर आ गया। छात्रों का साफ कहना है कि जब तक सरकार इन विवादित नियमों को पूरी तरह से वापस नहीं लेती, तब तक उनका यह विरोध इसी प्रकार लोकतांत्रिक माध्यमों से अलग-अलग मंचों पर जारी रहेगा। राजस्थान की राजधानी जयपुर के इस प्रमुख मतदान केंद्र पर हुई इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का एक नया दौर शुरू कर दिया है क्योंकि वोटिंग के दौरान इस तरह के नीतिगत विरोध कम ही देखने को मिलते हैं। विपक्षी दलों ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है और इसे युवाओं की नाराजगी का एक बड़ा प्रमाण बताया जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान और अधिक बढ़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।

एक तरफ जहां निर्वाचन आयोग द्वारा अधिक से अधिक मतदान करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन यह साबित करते हैं कि आम जनता और युवा वर्ग अपने अधिकारों के प्रति कितने अधिक सजग हो चुके हैं। दीया कुमारी जैसी कद्दावर नेता के सामने इस तरह नारेबाजी होना यह दर्शाता है कि चुनावी समर में केवल राजनीतिक दल ही नहीं बल्कि आम छात्र भी अपनी बात को मुखरता से रखना अच्छी तरह जानते हैं। मतदान के इस महापर्व में इस घटना ने एक अलग ही रंग भर दिया है जहां एक तरफ लोग लोकतंत्र के इस उत्सव में आहुति दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ युवा अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपनी मांगों की गूंज हुक्मरानों तक पहुंचाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। यह घटना अब पूरे जयपुर शहर में चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी है और हर कोई यही कयास लगा रहा है कि चुनाव परिणामों पर इसका क्या और कितना गहरा असर पड़ने वाला है।

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