

जीवन मे योग की भूमिका महत्वपूर्ण – जेल अधीक्षक शशांक पाण्डेय
~जन शिक्षण संस्थान द्वारा जिला कारागार रगौली में आयोजित किया गया योग दिवस
~कारागार परिसर में किया गया पंचवटी के बृक्षों का रोपण
चित्रकूट 11 वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला कारागार रगौली परिसर में कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित व दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित जन शिक्षण संस्थान चित्रकूट द्वारा जनभागीदारी के अन्तर्गत महिला पुरुष बन्दियों को योग कराया गया।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक शशांक पाण्डेय, संतोष कुमार वर्मा जेलर, डॉ विकास सिंह, डॉ मनोज राजपूत जेल चिकित्सक, डिप्टी जेलर प्रमोद कन्नौजिया, अखिलेश कुमार पाण्डेय, बृजकिशोरी के साथ साथ अनिल कुमार सिंह निदेशक जन शिक्षण संस्थान उपस्थित रहे।
विश्व योग दिवस पर अपने उद्बोधन में जेल अधीक्षक शशांक पाण्डेय ने कहा कि उत्तम स्वास्थ्य जीवन का सबसे बड़ा धन है, योग के माध्यम से व्यक्ति को समाज से जोड़ने की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। योग द्वारा शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। जीवन में चार सोपान होते हैं चारों सोपानो को व्यवस्थित रखने के लिए 14 इंद्रियां होती हैं जिसमें पांच कर्मेंद्रियां पांच ज्ञानेंद्रियां एव 4 सूक्ष्म इंद्रियां होती हैं जो अंतः करण की दशा को प्रगट करती हैं जिसमें मन बुद्धि अहंकार और चित् जीवन को आरोग्य रखने के लिए जिस प्रकार आयुर्वेद जीवनदायिनी है उसी प्रकार इन चारों सूक्ष्म सोपानो को स्वस्थ रखने के लिए हमारे जीवन में योग की भूमिका महत्वपूर्ण है।
संतोष कुमार वर्मा जेलर ने कहा कि योग केवल 1 दिन ना हो बल्कि इसे जीवन का आधार बनाएं एवं अपने जीवन में योग को नियमित चलने वाले क्रिया विधि के रूप में अपनाकर इसे अपने जीवन में उतारे और सदैव स्वस्थ रहें।
जन शिक्षण संस्थान के निदेशक अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जन भागीदारी से एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग के अंतर्गत पतञ्जलि योग पीठ के बन्धु जानकी शरण निषाद एवं बहनें श्रीमती पद्मा सिंह व कुमारी अनन्या सिंह के सहयोग से जिला कारागार में महिला एवं पुरुष बन्दियों को निरोगी रहने के दृष्टिकोण से 7 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया गया। जिसमे प्रशिक्षकों द्वारा प्राणायाम , मुद्राभ्यास , संधियोग , योगासन एवम सूर्यनमस्कार की सभी क्रियाएं व आसन सिखाये गए क्योंकि योग शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक उन्नति तथा सकारात्मक ऊर्जा व शांति के लिए अति आवश्यक है। हम सभी इसे अपने जीवन में समाहित करें ऐसी सभी से अपेक्षा है।
कार्यक्रम के पश्चात एक पेड़ माँ के नाम अंतर्गत पंचवटी के बृक्षों का रोपण कारागार परिषर में किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन डिप्टी जेलर प्रमोद कन्नौजिया ने किया।








