September 27, 2026 4:32 pm

ट्रंप की घुड़कियों के बीच भारत में उतरे F-35 जेट्स, एक हफ्ते में अमेरिका के साथ हुए ये 10 बड़े समझौते

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा गलियारों में इस वक्त भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक बहुत बड़ी हलचल मची हुई है। अमेरिकी राजनीतिक गलियारों से आने वाले बयानों और व्यापारिक वार्ताओं के दौरान दी जाने वाली तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच, भारतीय आसमान में अमेरिकी अत्याधुनिक तकनीक के प्रतीक माने जाने वाले F-35 फाइटर जेट्स की गूंज सुनाई देने लगी है। एक तरफ जहां राजनीतिक मंचों पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दबाव और तनातनी का माहौल देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ रक्षा और रणनीतिक मोर्चे पर दोनों देशों ने पिछले महज एक हफ्ते के भीतर ऐसे 10 ऐतिहासिक समझौते किए हैं जो पूरी दुनिया को हैरान कर रहे हैं। इन खट्टे-मीठे और बेहद जटिल रिश्तों के बीच भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक हितों के मामले में वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर पूरी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रहा है।

पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका की तरफ से लगातार ऐसे बयान सामने आ रहे हैं जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक नीतियों और शुल्कों को लेकर असंतोष को दर्शाते हैं। अमेरिकी राजनीतिक नेतृत्व द्वारा अक्सर भारत की स्वतंत्र आयात नीतियों और रूस के साथ पारंपरिक रक्षा संबंधों को लेकर तीखी टिप्पणियां की जाती रही हैं, जिन्हें रणनीतिकार कूटनीतिक घुड़कियों के रूप में देख रहे हैं। इसके बावजूद, वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच के कूटनीतिक संबंध केवल बयानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे एक गहरा और अटूट रणनीतिक सहयोग काम कर रहा है। अमेरिका अच्छी तरह जानता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को रोकने और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए भारत उसका सबसे भरोसेमंद और अनिवार्य साझीदार है, यही वजह है कि राजनीतिक बयानबाजी के इतर रक्षा सौदे अपनी पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं।

इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक F-35 लाइटनिंग II स्टीच फाइटर जेट्स का पहुंचना रहा है। हालांकि इन विमानों की भारत यात्रा का उद्देश्य मुख्य रूप से संयुक्त सैन्य प्रदर्शन और रणनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनना है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक के साझाकरण में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है। पांचवीं पीढ़ी के इन रडार-चकमा देने वाले लड़ाकू विमानों की उपस्थिति चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के रणनीतिक हलकों में भी गहरी चिंता पैदा कर रही है। भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनिशिएटिव (DTTI) के तहत इस प्रकार के उच्च स्तरीय सैन्य आदान-प्रदान यह स्पष्ट करते हैं कि दोनों देश आने वाले समय में रक्षा मोर्चे पर एक-दूसरे के कितने करीब आने वाले हैं।

रक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर पिछले सात दिनों का यह हफ्ता भारत-अमेरिका संबंधों के इतिहास में सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण हफ्तों में से एक रहा है। इस दौरान दोनों देशों के बीच कुल 10 बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं या उनकी रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया है। इन समझौतों में सबसे प्रमुख भारत में GE-F414 जेट इंजन के सह-उत्पादन (co-production) के लिए अंतिम तकनीकी मंजूरियां, अंतरिक्ष सहयोग के तहत क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (iCET) पर उन्नत बैठकें, मेरीटाइम डोमेन अवेयरनेस के लिए खुफिया जानकारी साझा करने के नए प्रोटोकॉल, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नौसैनिक साजो-सामान के आदान-प्रदान से जुड़े लॉजिस्टिक्स पैक्ट शामिल हैं। इसके अलावा सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सैन्य इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और आतंकवाद विरोधी अभियानों में जॉइंट इंटेलिजेंस शेयरिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी मुहर लगाई गई है।

भारत और अमेरिका के बीच के इन संबंधों को दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक ‘खट्टे-मीठे’ यानी ‘कड़वाहट और मिठास के अनूठे मिश्रण’ के रूप में परिभाषित कर रहे हैं। व्यापारिक टैरिफ और राजनीतिक बयानों के स्तर पर जहां दोनों देशों के बीच हितों का टकराव साफ झलकता है, वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा आधुनिकीकरण और क्षेत्रीय स्थिरता के मोर्चे पर दोनों का साथ आना एक अनिवार्य जरूरत बन चुका है। भारत ने हमेशा अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को सर्वोपरि रखा है और अमेरिकी दबाव के आगे झुके बिना अपने राष्ट्रीय हितों के अनुकूल फैसले लिए हैं। यही कारण है कि एक तरफ जहां अमेरिका की राजनीतिक चेतावनियों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय धरती पर दुनिया के सबसे आधुनिक सैन्य विमान उतर रहे हैं और एक हफ्ते में दस बड़े रक्षा समझौते आकार ले रहे हैं। आने वाले समय में यह साझेदारी वैश्विक राजनीति के दिशा-निर्देश तय करने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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