

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट में 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना व योग विभाग के द्वारा विशेष योग प्रशिक्षण के साथ सप्तदिवसीय योग कार्यशाला का समापन हुआ। कार्यशाला के दौरान योगाचार्य जितेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक आचार्य, योग विभाग द्वारा प्रतिभागियों को सूक्ष्म व्यायाम, विविध योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास कराया गया। विशेष रूप से ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ के सन्देश पर बल देते हुए कहा किब“यदि हम अपने जीवन में यम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) और नियम (शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान) को अपनाते हैं तथा नियमित रूप से आसन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करते हैं, तो हम एक सुखी, समृद्ध एवं स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। नाड़ी शोधन प्राणायाम और दीर्घ श्वसन के नियमित अभ्यास से शरीर की प्रत्येक कोशिका तक ऑक्सीजन पहुंचती है और अधिक मात्रा में विषैली गैसें (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड) बाहर निकलती हैं। इससे व्यक्ति की ऑक्सीजन लेवल स्थायी रूप से संतुलित बनी रहती है। उन्होंने योगाभ्यास करते समय आवश्यक सावधानियों पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय ने योग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा “विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह चरित्र, स्वास्थ्य और आत्मिक उन्नयन का केंद्र होना चाहिए और योग इन तीनों के लिए सबसे प्रभावशाली माध्यम है। आइए, हम सब मिलकर योग को अपने जीवन की आधारशिला बनाएं और मानवता को स्वस्थ, सुखी और समरस बनाने में योगदान दें। कुलसचिव श्री मधुरेन्द्र कुमार पर्वत ने योग को जीवन का अनिवार्य अंग बताते हुए नियमित अभ्यास की प्रेरणा दी। राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आनन्द कुमार ने बताया कि योग दिवस मनाने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुत किया गया था। केवल 90 दिनों के भीतर 193 देशों में से 177 देशों ने इसे सहमति दी और 11 दिसम्बर 2014 को इसे आधिकारिक मान्यता मिल गई। इसके बाद से हर वर्ष 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर योग विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित सप्तदिवसीय योग शिविर की उपलब्धियों का मूल्यांकन किया गया और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इस समारोह में डॉ. संजय नायक, डॉ. शांत कुमार चतुर्वेदी, डॉ. रीना पांडेय, डॉ. भविष्या माथुर, डॉ. रमा सोनी, डा. महेन्द्र उपाध्याय, डॉ. गुलाब, डॉ. अमित, डॉ. रजनीश सिंह, डॉ. गोपाल मिश्र, डॉ. हरिकांत, डॉ. सुशील, विश्वविद्यालय के पी.आर.ओ. श्री सुधीर कुमार, सहित बड़ी संख्या में शिक्षकगण, कर्मचारीगण और विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में योग की महत्ता को पुनः जागरूक करते हुए, “स्वस्थ व्यक्ति – स्वस्थ समाज – स्वस्थ राष्ट्र” की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया गया।








