कलकत्ता
पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि ‘बांग्ला’, ‘वेस्ट बंगाल’ या अन्य वैकल्पिक नामों के भ्रम को खत्म कर दिया जाएगा। पश्चिम बंगाल के आधिकारिक नाम को लेकर जारी दशकों पुरानी बहस के बीच राज्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य का नाम जल्द ही आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘पश्चिम बंग’ किया जाएगा ताकि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को हमेशा के लिए संरक्षित रखा जा सके।
समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि ‘बांग्ला’, ‘वेस्ट बंगाल’ या अन्य वैकल्पिक नामों के भ्रम को खत्म कर दिया जाएगा और बहुत जल्द इस संबंध में विधानसभा में एक विधेयक पेश किया जाएगा।
“पश्चिम बंग नाम ही हमारी ऐतिहासिक पहचान”: समिक भट्टाचार्य
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा, “मुझे कितनी बार कहना पड़ेगा भाई? इस राज्य का नाम ‘पश्चिम बंग’ ही होगा। अब आपको ‘पश्चिम बांग्ला’, ‘बांग्ला’ या सिर्फ ‘बंग’ जैसे नाम सुनने को नहीं मिलेंगे। राज्य की ऐतिहासिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में ही हमारी सरकार एक विधेयक लाने जा रही है।”
उन्होंने कहा कि 1947 में विभाजन के समय बंगाल का एक हिस्सा अलग होकर बाद में बांग्लादेश बना। जो हिस्सा भारत के पास रहा, उसकी पहचान ‘पश्चिम बंग’ से ही जुड़ी हुई है, इसलिए नाम में ‘पश्चिम’ शब्द का रहना ऐतिहासिक तौर पर बेहद जरूरी है।
पीएम मोदी के 25 साल की सराहना और राहुल गांधी पर तीखा तंज
नाम बदलने के मुद्दे से इतर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन प्रमुख (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री) के रूप में 25 साल पूरे होने पर उनके संबोधन की जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद और ऋषि अरविंद के विचारों से प्रेरित पीएम मोदी का भाषण केवल पार्टी कार्यकर्ताओं ही नहीं, बल्कि देश भर के नागरिकों और युवाओं को प्रेरित करेगा।
विपक्ष के पीएम मोदी के जनसमर्थन से डरने के सवाल पर समिक भट्टाचार्य ने चुटकी लेते हुए कहा, “जाकर राहुल गांधी से पूछिए कि वे डरे हैं या नहीं! राहुल गांधी कोई छोटे बच्चे नहीं हैं जो भूतों से डर जाएं। मुद्दा यह है कि इस समय विपक्ष के पास कोई वास्तविक मुद्दा ही नहीं बचा है। गैर-मुद्दों को मुद्दा बनाकर राजनीति नहीं की जा सकती। युवा समझ चुके हैं कि अगले 20 सालों तक केंद्र या राज्य में सरकार बदलने की कोई संभावना नहीं है।”
असम में मदरसा बोर्ड के विलय का समर्थन
समिक भट्टाचार्य ने असम सरकार के ‘राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड’ का विलय ‘स्कूल सर्विस कमीशन’ में करने के फैसले का भी पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने इसे नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत एक समावेशी और क्रांतिकारी कदम बताया।
उन्होंने सवाल उठाया कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे विज्ञान और गणित की शिक्षा से वंचित क्यों रहें? देश के सभी बच्चों को एक समान मानक वाली शिक्षा पाने का अधिकार है ताकि वे राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ सकें।
पश्चिम बंगाल के नाम बदलने का लंबा इतिहास
राज्य का नाम बदलने की कोशिशें कोई नई नहीं हैं।
1999 (वाम मोर्चा सरकार) में ज्योति बसु के कार्यकाल में विधानसभा में राज्य का नाम ‘पश्चिम बंग’ करने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन केंद्र से मंजूरी नहीं मिली।
2011 और 2018 (तृणमूल कांग्रेस) में ममता बनर्जी सरकार ने राष्ट्रीय बैठकों में अल्फाबेटिक ऑर्डर में पीछे रहने का तर्क देते हुए राज्य का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव संसद को भेजा था। हालांकि, केंद्र सरकार ने ‘बांग्लादेश’ से नाम की समानता और संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता का हवाला देते हुए इसे मंजूरी नहीं दी थी।
अब बीजेपी की ओर से फिर से ‘पश्चिम बंग’ नाम को वैधानिक रूप से लागू करने के ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।









