March 11, 2026 6:54 pm

भारतीय न्याय संहिता 2023 समाविष्ट राष्ट्र निर्माण संकल्प की सकारात्मक अवधारणा विषय पर विचार गोष्ठी

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में भारतीय न्याय संहिता 2023 विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में विधान परिषद के सभापति कुमार मानवेंद्र सिंह  अतिथि के रूप में एवं मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज शामिल हुए। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर शिशिर कुमार पांडे जी  ने कुलाधिपति जी का माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया इस दौरान करीब 50 विधायक भी मौजूद रहे।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की अवधारणा रामायण काल से होनी चाहिए। उन्होंने रामायण और महाभारत काल के युद्धों का उदाहरण देते हुए बताया कि महाभारत में बड़ा संहार हुआ, जबकि रामायण काल के युद्ध में कोई व्यक्ति नहीं मारा गया।


जगद्गुरु ने कहा कि भारतीय संविधान में अब तक 129 संशोधन हो चुके हैं। फिर भी न्याय व्यवस्था में और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय का मतलब सिर्फ दंड देना नहीं है, यह अपराधों को रोकने और न्यायप्रिय समाज बनाने की संहिता भी है।

संगोष्ठी में संतों और विद्वानों ने न्याय की परिभाषा पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जहां प्रसाद है, वहां अवसाद नहीं होता। जहां संवाद है, वहां विषाद नहीं होता। जहां समीक्षा है, वहां परीक्षण नहीं होता। जहां मानवता का मंगल है, वहां प्रतिशोध नहीं होता।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने बताया कि वे इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा करेंगे। साथ ही न्याय प्रणाली में सुधार की मांग भी रखेंगे।

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