आरा | भोजपुर37 मिनट पहले

भोजपुर के भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर के 7वें दिन बड़ी कार्रवाई हुई है. भरत की मां के आवेदन के आधार पर एसडीपीओ, थानेदार और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
भरत तिवारी की मां ने उसके आत्मसमर्पण के बाद जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश कुमार मालाकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगाया था.
17 जून को भोजपुर पुलिस ने भरत को उस वक्त गोली मार दी थी, जब उसने फेसबुक लाइव पर आकर सरेंडर कर दिया था. इस मामले में यह अब तक की चौथी एफआईआर है. सम्राट सरकार अब तक पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज करने से बचती रही थी.
दैनिक भास्कर ने भरत एनकाउंटर में पुलिस द्वारा दी गई थ्योरी और जिम्मेदार पुलिस कर्मियों को लगातार उजागर किया था। इसका असर ये हुआ कि अब हत्या की एफआईआर दर्ज की गई है.
अब जानिए भरत तिवारी की मां आशा देवी की ओर से दिए गए आवेदन में क्या-क्या लिखा है?
भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में उनकी मां आशा देवी की ओर से 18 जून को भोजपुर एसपी राज को मुठभेड़ में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया गया था.
एसपी राज को दिये गये आवेदन में आशा देवी ने लिखा है कि 17 जून की सुबह 8 बजे जगदीशपुर एसडीपीओ के नेतृत्व में शाहपुर थाना प्रभारी व अन्य पुलिसकर्मियों के साथ एक टीम मेरे घर आयी. टीम ने भरत तिवारी से कहा कि वे उनके साथ जवैनिया गांव के बाढ़ विस्थापित जहां रह रहे हैं, वहां आएं और उन्हें बताएं कि उन लोगों की क्या समस्याएं हैं और उनकी मांगें क्या हैं.
आवेदन में आशा देवी ने यह भी कहा था कि जवैनिया गांव के बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचने पर वह फेसबुक पर लाइव हुए और उनकी मांगों को बताने के बाद अपना हथियार जमीन पर फेंक दिया और खुद को सरेंडर कर दिया.
इसके बाद पुलिस वालों ने मेरे बेटे को घेर लिया. फिर जगदीशपुर एसडीपीओ के आदेश पर पुलिसकर्मियों ने भरत को 5 गोलियां मारकर घायल कर दिया. इसके बाद भरत को उठा ले गये।
घटना के बाद मेरे पति और भरत के पिता काशीनाथ तिवारी को पूरे दिन शाहपुर थाने में बंद रखा गया. शाम को हमें सूचना मिली कि आपके बेटे की मौत हो गयी है.
मुठभेड़ में शामिल जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर थाना प्रभारी और अन्य सहयोगी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि मेरे बेटे को न्याय मिल सके.
भास्कर की रिपोर्ट के बाद सरकार कैसे बैकफुट पर आ गई
17 जून को हुई थी मुठभेड़ पुलिस का दावा है कि भरत ने 10-12 राउंड फायरिंग की थी. जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया. 18 जून को भास्कर डिजिटल ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे और जिम्मेदार गैरजिम्मेदार चेहरों को बेनकाब किया था। 19 जून को भास्कर डिजिटल ने पुलिस की 5 झूठी थ्योरी का खुलासा किया था. भास्कर की दोनों खबरों के बाद 20 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच के आदेश दिये और 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया.
इसके बाद भास्कर डिजिटल ने घटना की प्रत्यक्षदर्शी रिपोर्ट प्रकाशित की. 23 जून की सुबह भास्कर डिजिटल ने पुलिस की पहली एफआईआर की झूठी थ्योरी का भी पर्दाफाश किया. इसमें मां के आवेदन की स्थिति के बारे में भी बताया गया कि पुलिस ने तब तक एफआईआर दर्ज नहीं की थी.
इस रिपोर्ट के बाद 23 जून की दोपहर तक सरकार ने पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर ली.
देखिए मुठभेड़ से जुड़ी तस्वीरें

17 जून को एनकाउंटर से ठीक पहले पुलिस के सामने खड़े भरत तिवारी.

17 जून की सुबह करीब 8:45 बजे भरत तिवारी ने अपना हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था.

18 जून को, भरत तिवारी के शव को ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों ने सड़क पर रखकर यातायात अवरुद्ध कर दिया और मुठभेड़ पर सवाल उठाए।

भरत तिवारी की मां आशा देवी के साथ भोजपुरी गायक खेसारी लाल यादव.
अब जानिए, भरत तिवारी एनकाउंटर में कब दर्ज हुईं 3 FIR, FIR में क्या लिखा था?
पहली एफआईआर (17 जून)
पहली प्राथमिकी में भारत भूषण तिवारी के साथ उनके पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया था. यह मामला तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश मालाकार के बयान पर दर्ज किया गया था, जबकि इसकी जांच की जिम्मेदारी एएसआई बबीता देवी को सौंपी गई थी.
प्राथमिकी के अनुसार कांड संख्या 759/26 के तहत 16 जून की सुबह करीब 4:40 बजे भरत तिवारी को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम बिलौती गांव स्थित उनके घर पहुंची.
पुलिस का दावा है कि सुबह करीब 5:10 बजे जब दरवाजा खोला गया तो भरत तिवारी पुलिस को देखकर आक्रामक हो गये और उन पर पिस्तौल तान दी. इसके बाद पुलिस ने दरवाजा बंद कर दिया. आरोप है कि भरत घर की छत पर चढ़ गया और वहां से पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने सुरक्षित पोजीशन लेकर अपना बचाव किया.
एफआईआर में यह भी कहा गया है कि पूछताछ के दौरान भरत के पिता और भाई ने उसके पास हथियार होने की जानकारी पुलिस से छिपाई. इसके बाद पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी मजबूत की और आगे की रणनीति के लिए थाने लौट आई।

16 जून को जब पुलिस भारत भूषण तिवारी को समझाने पहुंची तो उसने पुलिस कर्मियों पर पिस्तौल तान दी।
दूसरी एफआईआर (17 जून)
भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में दूसरी प्राथमिकी 17 जून को दोपहर 12:20 बजे तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश मालाकार के बयान के आधार पर दर्ज की गई थी. प्राथमिकी में भारत भूषण तिवारी को अभियुक्त बनाते हुए कहा गया है कि मुठभेड़ में घायल होने के बाद पीएमसीएच में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी. जांच इंस्पेक्टर संतोष कुमार को सौंपी गई है।
प्राथमिकी के अनुसार, पुलिस और एसटीएफ की टीमें अनुवर्ती छापेमारी के लिए बिलोटी गांव गई थीं, जब तिवारी को कथित तौर पर हथियार लहराते हुए और खेतों की ओर भागते देखा गया था। छेर नदी के पास, कच्ची सड़क पर, पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहा। हालाँकि, उन्होंने कथित तौर पर एक सरकारी वाहन के बोनट पर गोलीबारी की।
पुलिस ने आगे बताया कि इसके बाद SHO राजेश मालाकार ने जवाबी कार्रवाई में एक राउंड फायरिंग की. तिवारी ने शुरू में आत्मसमर्पण करने का नाटक किया लेकिन कथित तौर पर फिर से गोलीबारी शुरू कर दी, पुलिस टीम पर दो राउंड फायरिंग की।
प्राथमिकी में कहा गया है कि आत्मरक्षा में, एसटीएफ कर्मी अक्षय कुमार ने अपनी सर्विस पिस्तौल से कमर के नीचे चार राउंड गोलियां चलाईं, जिससे तिवारी के पैर घायल हो गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मौका मुआयना के दौरान एफएसएल की टीम ने एक लोडेड 7.65 बोर की पिस्तौल, दो जिंदा कारतूस और दो खाली खोखा बरामद किया. पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ के दौरान तिवारी ने 10-12 राउंड फायरिंग की, जबकि पुलिस टीम ने कुल पांच राउंड फायरिंग की.
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में तीसरी एफआईआर 18 जून को सुबह 8:40 बजे सब-इंस्पेक्टर सच्चिदानंद यादव के बयान पर दर्ज की गई थी. मामला तिवारी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जहां शव को राष्ट्रीय राजमार्ग पर रखा गया था और सड़क को अवरुद्ध कर दिया गया था।
तीसरी एफआईआर (18 जून)
एफआईआर में सरोज त्रिपाठी, मुखिया बलिराम यादव, राकेश यादव और अंजनी तिवारी समेत 13 नामजद आरोपियों के साथ ही 50 से 60 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया है. जांच एएसआई बबीता देवी को सौंपी गई है और एसआई मोहम्मद अलीमुद्दीन खान के आदेश पर कार्रवाई की गई.
प्राथमिकी के अनुसार 17 जून की रात पीएमसीएच में इलाज के दौरान भरत तिवारी की मौत हो गयी. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. अगली सुबह, 18 जून को, परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने शव को एनएच-922 पर बिलोटी मोड़ पर एक तंबू के नीचे रख दिया और यातायात की दोनों लेन को अवरुद्ध कर दिया।
पुलिस ने कहा कि जब सब-इंस्पेक्टर सच्चिदानंद यादव भीड़ को शांत करने के लिए बल के साथ मौके पर पहुंचे, तो भीड़ ने कथित तौर पर धक्का-मुक्की, दुर्व्यवहार और पथराव किया, जिससे पुलिस को पीछे हटना पड़ा।
प्राथमिकी में कहा गया है कि राजमार्ग लगभग पांच घंटे तक अवरुद्ध रहा और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप और समझाने के बाद ही यातायात बहाल किया गया। पुलिस ने यह भी दावा किया कि पूरी घटना की वीडियोग्राफी की गई.









