भोपाल
इस शरद पूर्णिमा पर राजधानी भोपाल की धरा एक ऐसे अलौकिक और ऐतिहासिक महाअनुष्ठान की साक्षी बनने जा रही है, जिसकी दिव्यता की कल्पना मात्र से मन भक्तिभाव से भर उठता है। जब शरद पूर्णिमा के पूर्ण चंद्रमा की सोलह कलाओं से युक्त अमृतमयी किरणें भोपाल की धरती का स्पर्श करेंगी, ठीक उसी पावन घड़ी में हजारों श्रद्धालु हाथों में पूजन थाल लिए ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री, धन-धान्य और ऐश्वर्य की देवी मां राजराजेश्वरी की महाअर्चना प्रारंभ करेंगे।
संत शिरोमणि रविशंकर महाराज (श्री रावतपुरा सरकार) के दिव्य सानिध्य में आगामी 26 अक्टूबर को सायं 7 बजे से स्थानीय लाल परेड ग्राउंड पर ‘विराट मां राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन महाअनुष्ठान’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। रविवार को स्वयं महाराज श्री ने लाल परेड ग्राउंड पहुंचकर आयोजन स्थल का अत्यंत सूक्ष्मता से निरीक्षण किया और सेवा समिति व भक्त मंडल को इस आध्यात्मिक महायज्ञ की भव्यता के अनुरूप आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इस अवसर पर संत रविशंकर महाराज ने ‘नवदुनिया’ से विशेष चर्चा में इस गूढ़ साधना के रहस्यों को साझा किया।
मां राजराजेश्वरी की श्रीविद्या साधना अत्यंत गुप्त, गूढ़ व विशुद्ध रूप से वैज्ञानिक है : पंडित रविशंकर महाराज
1. वैदिक वास्तु और कोणों के सटीक विज्ञान पर आधारित है महाअनुष्ठान
‘नवदुनिया’ से विशेष संवाद में महाराज श्री ने स्पष्ट किया कि मां राजराजेश्वरी (श्रीविद्या) की आराधना का विधान अत्यंत गुप्त व विशुद्ध रूप से वैज्ञानिक है। इसमें दिशा, कोण और वास्तु शास्त्र का अचूक महत्व है। भगवान सदाशिव द्वारा प्रदत्त इस सर्वोच्च ब्रह्माविद्या में सामान्यतः एकांतिक साधना का विधान है, किंतु राष्ट्र की उन्नति और विश्व कल्याण के पावन संकल्प के साथ भोपाल में इसे इतना विराट और सार्वजनिक स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।
2. कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करेगा श्रीललितासहस्रनाम का सस्वर पाठ
अनुष्ठान स्थल पर प्रत्येक इकाई को वास्तु शास्त्र के मानकों के अनुरूप स्थापित किया जा रहा है। महाराज श्री ने बताया कि ब्रह्मांड पुराण में वर्णित ‘श्रीललितासहस्रनाम’ में मां के 1,000 रहस्यमयी नामों का दिव्य संकलन है। इसका सामूहिक सस्वर अर्चन साधक के मूलाधार चक्र में आंतरिक ऊर्जा व कुंडलिनी को जाग्रत कर इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति के सर्वोच्च शिखर को स्थापित करता है। शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर मां भगवती स्वयं चंद्रमा के केंद्र में विराजमान होती हैं।
3. प्रदेशवासियों के घर-घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए चुना भोपाल
महाराज श्री बताते हैं कि दक्षिण भारत में देवियों की सर्वोच्च सत्ता मां राजराजेश्वरी की आराधना अत्यंत व्यापक स्तर पर की जाती है। यही आध्यात्मिक कारण है कि वहां घर-घर में सुख, वैभव और स्थायी समृद्धि का वास है। उत्तर और मध्य भारत में इस दिव्य परंपरा के सूत्रपात का विचार भोपाल और संपूर्ण मध्यप्रदेश के नागरिकों की सुख-शांति व संपन्नता के संकल्प से ही उपजा है। मां राजराजेश्वरी में ही समस्त देवियों की शक्तियां समाहित हैं; उनकी कृपा से संपूर्ण प्रदेश का कल्याण सुनिश्चित होगा।
4. केवल श्रद्धाभाव लेकर आएं, कोई शुल्क या पंजीयन नहीं
इस दिव्य महाअनुष्ठान का हिस्सा बनने के लिए किसी भी प्रकार के शुल्क, दक्षिणा या पूर्व पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) की आवश्यकता नहीं है। महाराज श्री ने कहा कि यह भव्य तैयारियां केवल इसलिए की जा रही हैं ताकि मां के किसी भी भक्त को लेशमात्र भी असुविधा न हो। आवश्यकता है तो बस हृदय में अटूट श्रद्धा और भक्तिभाव लेकर सपरिवार मां के चरणों में उपस्थित होने की।
5. पूजन सामग्री ट्रस्ट देगा, बस भारतीय परिधान में पधारें
महाराज श्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने साथ कोई भी पूजन सामग्री न लाएं। संपूर्ण सामग्री पूजन स्थल पर ही ट्रस्ट द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। सायं 7 बजे से यह दिव्य अनुष्ठान प्रारंभ होकर लगभग ढाई घंटे तक चलेगा। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे भारतीय पारंपरिक परिधान (धोती-कुर्ता, साड़ी आदि) धारण कर सायं 5:30 बजे तक लाल परेड ग्राउंड में अपना स्थान ग्रहण कर लें।
1100 वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 50 हजार भक्त करेंगे एक करोड़ अर्चन
सदी के इस सबसे विराट आध्यात्मिक समागम में काशी, वृंदावन, हरिद्वार तथा ट्रस्ट के 1100 प्रकांड वैदिक आचार्यों के सस्वर मंत्रोच्चार के बीच 50 हजार से अधिक श्रद्धालु एक साथ, एक ही लय में लगभग डेढ़ से ढाई घंटे की अवधि में मां भगवती का एक करोड़ अर्चन पूर्ण करेंगे।
इस अनुष्ठान की पवित्रता और दिव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूजन की विशेष सामग्री देश के विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों से मंगाई जा रही है, जबकि दुर्लभ रुद्राक्ष और पवित्र शालिग्राम विग्रह विशेष रूप से नेपाल से मंगाए गए हैं। श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट द्वारा आयोजित यह महाअनुष्ठान पूर्णतः निशुल्क है, जिसमें प्रत्येक सनातनी सपरिवार शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित कर सकता है।









