मनेंद्रगढ़ वन मंडल में नियमों की अनदेखी और कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मनेंद्रगढ़ वन मंडल में वन्य क्षेत्र की सुरक्षा और संरचनात्मक विकास के नाम पर जो कार्य किए जा रहे हैं, उनकी पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। केल्हारी वन परिक्षेत्र में हुए कार्यों में जहां मजदूरों को काम देने की बजाय जेसीबी मशीनों से काम कराया गया,
वहीं रोजगार सृजन की मूल भावना की अवहेलना साफ देखी जा सकती है।
कागजों में योजनाएँ संचालित हुईं, पर जमीनी हकीकत में न तो मजदूर लगे, न ही ग्रामवासियों को लाभ मिल पाया। यह स्थिति केवल एक परियोजना की नहीं है, वन मंडल में पहले भी इसी प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार शून्य रही है।
कुंवारपुर वन परिक्षेत्र में बिना स्वीकृति के जंगल से गिट्टी और पत्थर निकालकर निर्माण कार्य में उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। इससे स्पष्ट रूप से शासकीय राजस्व को नुकसान पहुंचा है, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस जवाबदेही तय नहीं की गई।
वहीं बिहारपुर, मनेंद्रगढ़ और बहरासी वन परिक्षेत्रों में वृक्षारोपण, निर्माण तथा जंगलों की सफाई जैसे कार्यों में अपारदर्शिता की शिकायतें सामने आई हैं। फील्ड निरीक्षण और दस्तावेजों में भारी अंतर की बातें भी सामने आ रही हैं। हैरत की बात यह है कि इन सब मामलों पर ना तो किसी अधिकारी ने स्पष्टीकरण दिया है और ना ही अब तक कोई जांच की पहल की गई है।
मनेंद्रगढ़ वन मंडल के वर्तमान डीएफओ द्वारा मीडिया से दूरी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। पत्रकारों को कार्यालय से लौटा दिया जा रहा है और किसी भी प्रकार की जानकारी देने से मना किया जा रहा है।
यह रवैया पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों के प्रतिकूल है और जनता की जानकारी के अधिकार पर प्रश्नचिह्न लगाता है। विभागीय अधिकारियों के इस व्यवहार से यह आशंका और गहराई है कि कहीं न कहीं कुछ छिपाने की कोशिश हो रही है।
इसी वन मंडल क्षेत्र में स्थित गोंडवाना जीवाश्म पार्क, जो वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थल है, वहाँ भी निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की खबरें चर्चा में हैं। करोड़ों वर्षों पुराने समुद्री जीवों के प्रमाण संजोए इस स्थल में की जा रही गतिविधियों की जांच आज तक शुरू नहीं हो सकी है। वन विभाग के इस अमूल्य धरोहर पर हो रहे कार्यों में भी पारदर्शिता का अभाव साफ देखा जा सकता है।
इन तमाम मामलों में सबसे गंभीर चिंता यह है कि शिकायतों, खबरों और जनहित के मुद्दों पर भी कार्रवाई नहीं हो रही। जनता की निगाहें अब वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं कि आखिर कब जिम्मेदार अफसरों पर प्रशासनिक कार्रवाई होगी और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जवाबदेही तय की जाएगी।
वन मंडल में कार्य प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित की भावना के बिना ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे, जिससे न केवल जनता का विश्वास कम होता है, बल्कि शासकीय संसाधनों और धरोहरों की रक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।








