मनेंद्रगढ़ (एमसीबी)। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एक ओर जहां प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ और जनहितकारी बनाने में लगातार प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर मनेंद्रगढ़ के इकलौते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जमीनी हकीकत सरकार के दावों की पोल खोल रही है। यहां चरमराई व्यवस्था आमजन के लिए परेशानी का सबब बन गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इस अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते उन्हें मायूस लौटना पड़ता है। इलाज के अभाव में आर्थिक रूप से कमजोर मरीज भी मजबूरीवश निजी अस्पतालों का सहारा लेने पर विवश हो रहे हैं, जिससे उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति फिजियोथेरेपी विभाग की है। लंबे समय से फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ की नियुक्ति तो कर दी गई है, लेकिन उनके पास कार्य के लिए आवश्यक उपकरण तक मौजूद नहीं हैं। इससे न्यूरो और नस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मजबूरन निजी संस्थानों में महंगे इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।
जब इस पूरे मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर एस. एस सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो कई बार कॉल करने के बावजूद भी उनका फोन रिसीव नहीं किया गया, जिससे स्थिति की गंभीरता और जिम्मेदारों की संवेदनहीनता स्पष्ट नजर आती है। अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।








