September 16, 2026 2:35 pm

मसल्स बनाने के लिए रोजाना कितनी कैलोरी खानी चाहिए? जानिए कैलोरी सरप्लस का सही गणित

फिटनेस और जिम की दुनिया में हर उस युवा का सपना होता है कि उसका शरीर मजबूत, गठीला और आकर्षक मस्कुलर बॉडी वाला हो, जिसके लिए घंटों पसीना बहाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल भारी-भरकम वजन उठाना और जिम में घंटों पसीना बहाना ही मसल्स बनाने के लिए काफी नहीं होता, बल्कि आपकी असली सफलता आपकी किचन और आपकी डाइट पर निर्भर करती है? फिटनेस एक्सपर्ट्स और न्यूट्रिशनिस्ट्स का यह मानना है कि यदि आप शरीर का मांस बढ़ाने और मजबूत मांसपेशियां विकसित करने यानी मसल हाइपरट्रोफी (Muscle Hypertrophy) हासिल करना चाहते हैं, तो आपको अपने शरीर की ऊर्जा की खपत और भोजन से मिलने वाली ऊर्जा के बीच के संतुलन को समझना होगा। इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ‘कै कैलोरी सरप्लस’ (Calorie Surplus) की अवधारणा, जिसके बिना शरीर का आकार बढ़ाना और नई मांसपेशियों का निर्माण करना लगभग असंभव माना जाता है। बहुत से लोग कम खाकर या बिना सही हिसाब के डाइटिंग करके मसल्स बनाने की कोशिश करते हैं और असफल हो जाते हैं, इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आपको रोजाना वास्तव में कितनी कैलोरी का सेवन करना चाहिए।

कैलोरी सरप्लस का सीधा और सरल अर्थ यह होता है कि आप पूरे दिन में जितनी कैलोरी शारीरिक गतिविधियों और मेटाबॉलिज्म के जरिए खर्च करते हैं, उससे अधिक मात्रा में कैलोरी भोजन के माध्यम से अपने शरीर के अंदर ग्रहण करना। जब आप जिम में भारी वजन उठाकर वर्कआउट करते हैं, तो आपकी मांसपेशियों के तंतुओं (Muscle Fibers) में छोटे-छोटे खिंचाव और सूक्ष्म क्षति (Micro-tears) होती है, जिन्हें ठीक करने और मजबूत बनाकर आकार में बड़ा करने के लिए शरीर को अतिरिक्त ईंधन की आवश्यकता होती है। यदि आप अपने शरीर को उसकी जरूरत से कम कैलोरी देंगे, तो शरीर फैट या मसल्स को तोड़कर ऊर्जा बनाएगा जिससे वजन घटने लगेगा, और इसके विपरीत जब आप सरप्लस डाइट यानी जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेंगे, तो शरीर को उन टूटी हुई मांसपेशियों को रिकवर करने और नए टिशूज बनाने के लिए पर्याप्त कच्चा माल मिल जाएगा। यही वजह है कि बॉडीबिल्डिंग के ‘बल्क फेज’ (Bulking Phase) में कैलोरी सरप्लस को सबसे बड़ा और अचूक नियम माना जाता है।

अपने मसल्स बिल्डिंग सफर की शुरुआत करने से पहले यह कैलकुलेट करना सबसे पहला कदम है कि आपके शरीर को रोजाना सामान्य रूप से कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे बेसल मेटाबोलिक रेट यानी BMR कहा जाता है। बीएमआर निकालने के लिए आपकी उम्र, लिंग, वजन और लंबाई के आधार पर वैज्ञानिक फॉर्मूलों का उपयोग किया जाता है, जो यह बताता है कि यदि आप पूरे दिन बिस्तर पर भी लेटे रहें तो भी आपके शरीर के अंगों को जिंदा रहने के लिए कितनी कैलोरी चाहिए। इसके बाद आपकी दैनिक शारीरिक गतिविधियों (जैसे चलना, ऑफिस का काम, घर के काम आदि) और जिम के वर्कआउट के स्तर को ध्यान में रखते हुए टोटल डेली एनर्जी एक्सपेंडिचर (TDEE) निकाला जाता है। मान लीजिए कि आपके शरीर का कुल टीटीई (TDEE) यानी कुल खर्च होने वाली ऊर्जा 2500 कैलोरी है, तो इसका मतलब यह हुआ कि वजन और मसल्स बढ़ाने के लिए आपको इस आंकड़े से ऊपर खाना शुरू करना होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अपने TDEE के मुकाबले कितनी कैलोरी सरप्लस में रखनी चाहिए ताकि शरीर में केवल साफ-सुथरी मांसपेशियां (Lean Muscle Mass) बढ़ें और अनावश्यक चर्बी (Body Fat) न जमा हो। फिटनेस विज्ञान यह सलाह देता है कि आपको अपनी मेंटेनेंस कैलोरी से लगभग 300 से 500 कैलोरी प्रतिदिन अधिक खानी चाहिए, जो कि एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी मेंटेनेंस कैलोरी 2500 है, तो आपको रोजाना लगभग 2800 से 3000 कैलोरी का सेवन करना चाहिए, जिससे धीरे-धीरे और गुणवत्तापूर्ण तरीके से आपके शरीर का वजन और मसल्स का साइज बढ़ने लगेगा। बहुत ज्यादा मात्रा में एक साथ अधिक कैलोरी खाने (जिसे ‘डर्टी बल्किंग’ कहा जाता है) से मांसपेशियों की जगह शरीर में सिर्फ पेट और चेहरे पर चर्बी बढ़ने लगती है, जिससे आपकी फिटनेस की मेहनत खराब हो सकती है, इसलिए हमेशा ‘लीन बल्किंग’ (Lean Bulking) के नियम का पालन करना चाहिए।

सिर्फ ज्यादा कैलोरी खा लेना ही मसल्स बनाने की गारंटी नहीं है, बल्कि इस बात पर भी पूरा ध्यान देना जरूरी है कि वे कैलोरी किस प्रकार के पोषक तत्वों (Macronutrients) से आ रही हैं। मांसपेशियों के निर्माण की प्रक्रिया में प्रोटीन सबसे मुख्य और अनिवार्य घटक है, इसलिए आपको अपने शरीर के वजन के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में लीन प्रोटीन (जैसे चिकन, अंडे, पनीर, सोयाबीन, दालें और व्हे प्रोटीन) का सेवन करना चाहिए ताकि नई मांसपेशियां तेजी से बन सकें। इसके अलावा वर्कआउट के दौरान भारी वजन उठाने के लिए भरपूर ऊर्जा प्रदान करने का काम कार्बोहाइड्रेट (Complex Carbs) करते हैं, जिन्हें अपनी डाइट में चावल, ओट्स, शकरकंद और रोटी के रूप में शामिल करना चाहिए। साथ ही हार्मोनल संतुलन और शरीर के सुचारू संचालन के लिए गुड फैट्स (जैसे बादाम, अखरोट, देसी घी और जैतून का तेल) को भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। सही कैलोरी सरप्लस और अनुशासित वर्कआउट रूटीन के जरिए आप कुछ ही महीनों में अपनी बॉडी में एक बेहतरीन और मस्कुलर बदलाव देख सकते हैं।

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