September 13, 2026 3:22 am

BREAKING NEWS

यूपी में जमीन बंटवारा, खतौनी और EWS सर्टिफिकेट पाना हुआ बेहद आसान: योगी सरकार ने लॉन्च किए 3 नए डिजिटल पोर्टल 14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का महासंयोग: दोनों व्रत रखने का नियम, शुभ मुहूर्त और पारण का सही समय ऑनलाइन खाना मंगाना हुआ और महंगा: अब Cash on Delivery पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज, फूड डिलीवरी कंपनियों ने बढ़ाई फीस; जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर बीसीसीआई ने निकाली ‘हेड- स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसिन’ की नई पोस्ट, बिना पूर्व क्रिकेटर बने भी कर सकते हैं आवेदन Haiwaan Box Office Day 1: अक्षय-सैफ की ‘हैवान’ की सुस्त शुरुआत, पहले दिन कमाए सिर्फ ₹3 करोड़, 18 साल बाद भी नहीं चला ‘खिलाड़ी-अनाड़ी’ का जादू देश से जातिवाद खत्म हो जाएगा तो हम आरक्षण छोड़ देंगे’: रिजर्वेशन के विरोध पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का बड़ा पलटवार

मौसम बदलते ही छिन न जाए चेहरे का निखार: इन 5 आसान स्किनकेयर बदलावों से ड्रायनेस, ब्रेकआउट्स और सुस्ती को कहें अलविदा

ऋतु परिवर्तन का सीधा असर मानव त्वचा के सबसे संवेदनशील हिस्से पर पड़ता है। जब तेज गर्मी और उमस के बाद मौसम में हल्की ठंडक या शुष्की आने लगती है, तो हवा में मौजूद नमी का स्तर अचानक गिर जाता है। लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, जयपुर और पटना जैसे उत्तर भारतीय शहरों में मौसमी बदलाव के दौरान तापमान में भारी उतार-चढ़ाव देखा जाता है। दिन में हल्की धूप और सुबह-शाम ठंडी हवाएं त्वचा के प्राकृतिक सुरक्षात्मक कवच (स्किन बैरियर) को कमजोर कर देती हैं। इसके परिणामस्वरूप ट्रांस-एपिडर्मल वॉटर लॉस (त्वचा से प्राकृतिक नमी का वाष्पीकरण) तेजी से बढ़ने लगता है। कई लोगों को अचानक चेहरे पर खिंचाव, रूखापन, पपड़ी जमना (फ्लेकी स्किन), लालिमा और यहां तक कि अचानक एक्ने ब्रेकआउट्स का सामना करना पड़ता है। त्वचा रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि जिस तरह हम मौसम के हिसाब से अपनी पोशाक बदलते हैं, उसी तरह स्किनकेयर प्रोडक्ट्स और रूटीन को भी समय रहते अपडेट करना बेहद जरूरी है।

गर्मियों या बरसात के दिनों में हम अक्सर सैलिसिलिक एसिड या फोमिंग फेसवॉश का उपयोग करते हैं ताकि अतिरिक्त तेल को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन जैसे ही मौसम में शुष्की बढ़ती है, ऐसे स्ट्रॉन्ग क्लींजर त्वचा के जरूरी ऑयल्स को भी छीन लेते हैं। बदलते मौसम की शुरुआत होते ही फोमिंग फेसवॉश की जगह जेंटल, क्रीमी या हाइड्रेटिंग लोशन बेस्ड क्लींजर अपनाएं। ग्लिसरीन, सेरामाइड्स और एलोवेरा युक्त फेसवॉश चेहरे की सतह पर मौजूद धूल-मिट्टी को साफ करते हैं, बिना किसी जलन या खिंचाव के। दिन में दो बार से ज्यादा चेहरा धोने से बचें और चेहरा धोते समय बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, क्योंकि गर्म पानी त्वचा के नैचुरल मॉइस्चर को सोख लेता है।

ट्रांजिशनल वेदर यानी बदलते मौसम में मॉइस्चराइजर का चयन सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है। यदि आप अब तक वाटर-बेस्ड या ऑयल-फ्री लाइटवेट जेल का उपयोग कर रहे थे, तो अब समय आ गया है कि आप थोड़े अधिक पोषण देने वाले इमल्शन या सेरामाइड-युक्त मॉइस्चराइजर पर स्विच करें। हयालूरोनिक एसिड सीरम को हल्की नम त्वचा पर लगाएं और उसके तुरंत बाद एक थिक बैरियर-रिपेयर क्रीम से लॉक कर दें। सेरामाइड्स, फैटी एसिड्स और शिया बटर त्वचा की कोशिकाओं के बीच के सीमेंट को मजबूत करते हैं, जिससे बाहरी ठंडी और शुष्क हवाएं त्वचा की अंदरूनी नमी को चुरा नहीं पातीं और चेहरा दिनभर कोमल बना रहता है।

मौसम सुहावना होते ही लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि अब तेज धूप नहीं है, इसलिए सनस्क्रीन की कोई आवश्यकता नहीं है। यह सोच त्वचा की सेहत के लिए सबसे अधिक नुकसानदेह साबित होती है। वास्तव में, जब धूप की तपिश कम महसूस होती है, तब भी सूर्य की पराबैंगनी किरणें (यूवीए और यूवीबी) बादलों और हल्की धूप के बीच से 80 प्रतिशत तक जमीन तक पहुंचती हैं। यूवीए किरणें त्वचा में गहराई तक घुसकर कोलेजन को तोड़ती हैं, जिससे समय से पहले झुर्रियां, पिगमेंटेशन और काले धब्बे बनते हैं। इसलिए रोजाना सुबह बाहर निकलने से 20 मिनट पहले कम से कम एसपीएफ 30 या 50 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन जरूर लगाएं। बदलते मौसम में आप मॉइस्चराइजिंग गुणों वाला हाइड्रेटिंग सनस्क्रीन चुन सकते हैं जो सन प्रोटेक्शन के साथ-साथ त्वचा को पोषण भी दे।

मौसम बदलने पर मृत कोशिकाओं (डेड स्किन सेल्स) की परत तेजी से जमने लगती है, जिससे चेहरा बेजान और डल दिखने लगता है। इस समय हार्ड अखरोट या खुबानी वाले स्क्रब का इस्तेमाल करने से त्वचा छिल सकती है और रैशेज हो सकते हैं। इसके बजाय हफ्ते में केवल एक बार माइल्ड लैक्टिक एसिड या केमिकल एक्सफोलिएंट का इस्तेमाल करें। घरेलू स्तर पर आप एक चम्मच शहद में आधा चम्मच कच्चा दूध और चुटकी भर ओट्स पाउडर मिलाकर एक सौम्य पैक बना सकते हैं। ओट्स और दूध त्वचा की मृत कोशिकाओं को नरमी से हटाते हैं, जबकि शहद एक प्राकृतिक ह्यूमेक्टेंट के रूप में त्वचा के भीतर नमी को गहराई से सील कर देता है।

बाहरी स्किनकेयर प्रोडक्ट्स तब तक पूरा परिणाम नहीं दे सकते जब तक कि आपका शरीर अंदर से पोषित और हाइड्रेटेड न हो। बदलते मौसम में प्यास का अहसास कम होता है, जिसके चलते लोग पानी पीना कम कर देते हैं। इस आदत से बचें और दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास गुनगुना या सामान्य पानी जरूर पिएं। अपने दैनिक आहार में मौसमी फल जैसे सेब, संतरा, अनार के साथ-साथ ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर बादाम, अखरोट और चिया सीड्स शामिल करें। ये हेल्दी फैट्स त्वचा की आंतरिक कोशिकाओं को लचीला और चमकदार बनाए रखते हैं। इसके अलावा, रात में कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें, क्योंकि इसी दौरान त्वचा अपनी प्राकृतिक मरम्मत और कायाकल्प की प्रक्रिया को पूरा करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!