October 2, 2026 6:53 pm

राजस्थान कांग्रेस में भारी घमासान: दूदू में सचिन पायलट और स्थानीय गुट के समर्थक आमने-सामने

राजस्थान की राजनीति और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही अंतरकलह एक बार फिर से सड़क पर आ गई है। जयपुर से सटे नवनिर्मित जिले दूदू (Dudu) से एक बेहद चौंकाने वाली और पार्टी की किरकिरी कराने वाली खबर सामने आई है, जहाँ कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में ही पार्टी कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस घटना की चर्चा इसलिए भी बहुत ज्यादा हो रही है क्योंकि यह पूरा हंगामा उस वक्त हुआ जब मंच पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Jully) जैसे बड़े कद्दावर नेता खुद मौजूद थे। पार्टी के अंदर चल रही इस सिरफुटव्वल और गुटबाजी के कारण एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कांग्रेस पार्टी आगामी चुनावों से पहले अपनी आंतरिक फूट को संभाल पाने में कामयाब हो पाएगी या नहीं। आज के इस विस्तृत, राजनीतिक और विश्लेषणात्मक आलेख में हम आपको दूदू में हुई इस झड़प के सभी अंदरूनी कारणों, मंच पर मौजूद नेताओं की प्रतिक्रिया और इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभावों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

दूदू में स्वागत समारोह के दौरान कैसे भड़का विवाद और क्यों आमने-सामने आए कार्यकर्ता?

घटना की शुरुआत तब हुई जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली किसी संगठनात्मक कार्यक्रम या दौरे के सिलसिले में दूदू पहुंचे थे। स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी के इन शीर्ष नेताओं के भव्य स्वागत की तैयारियां की गई थीं, लेकिन स्वागत का यह मंच देखते ही देखते शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बन गया। स्थानीय स्तर पर पार्टी के दो अलग-अलग धड़ों—एक तरफ सचिन पायलट (Sachin Pilot) समर्थक और दूसरी तरफ स्थानीय नागर गुट के समर्थक—के बीच वर्चस्व को लेकर लंबे समय से सुलग रही नाराजगी अचानक सतह पर आ गई। जैसे ही नेताओं के स्वागत के दौरान नारेबाजी और शक्ति प्रदर्शन शुरू हुआ, दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एक-दूजे के आमने-सामने आ गए और मामूली कहासुनी देखते ही देखते हाथापाई तथा लाठी-डंडों तक जा पहुंची। इस अचानक हुई हिंसक झड़प से वहां अफरा-तफरी मच गई और स्वागत कार्यक्रम का पूरा माहौल पल भर में तनावपूर्ण हो गया।

मंच पर मौजूद दिग्गज नेताओं डोटासरा और जूली के सामने हुआ जमकर हंगामा

सबसे हैरानी की बात यह रही कि जिस वक्त यह पूरा खूनी संघर्ष और हंगामा चल रहा था, मंच पर प्रदेश के दोनों सबसे बड़े सियासी चेहरे—पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पूरी तरह से लाचार नजर आए। नेताओं के सामने कार्यकर्ताओं द्वारा इस तरह की अनुशासनहीनता और मारपीट ने पार्टी के केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व की कार्यशैली पर कई बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंच से लगातार समझाइश देने और शांत रहने की अपील करने के बावजूद कार्यकर्ताओं पर नेताओं की बात का कोई असर नहीं हुआ और वे काफी देर तक आपस में भिड़ते रहे। इस घटना के बाद से ही विरोधी दल यानी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कांग्रेस पर हमला करने का एक और मुफीद मौका मिल गया है, और वे लगातार यह तंज कस रहे हैं कि जिस पार्टी के कार्यकर्ता और नेता आपस में ही लड़ रहे हों, वह जनता की आवाज क्या उठाएगी।

टिकट वितरण और स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई बन रही है कांग्रेस के लिए बड़ा सिरदर्द

राजस्थान कांग्रेस में भीतरखाने चल रही यह गुटबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन समय-समय पर यह इस प्रकार के खुले संघर्ष के रूप में बाहर आ जाती है जो पार्टी की एकजुटता के दावों की पोल खोल देती है। दूदू क्षेत्र में हालिया स्थानीय निकाय चुनावों और सांगठनिक पदों पर टिकट वितरण को लेकर पिछले कुछ दिनों से विभिन्न गुटों के बीच भारी रस्साकशी चल रही थी। हर गुट यह चाहता है कि संगठन और सत्ता के समीकरणों पर उसका ही आधिपत्य बना रहे, जिसके चलते जमीन स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच वैमनस्य लगातार बढ़ता जा रहा है। सचिन पायलट समर्थकों और अन्य स्थानीय क्षत्रपों के बीच की यह तनातनी यदि समय रहते उच्च नेतृत्व द्वारा सख्ती से नहीं सुलझाई गई, तो इसका खामियाजा आने वाले चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

पार्टी अनुशासन पर उठते सवाल और आगामी चुनावों पर पड़ने वाला इसका असर

राजस्थान में कांग्रेस पार्टी पहले ही सत्ता में वापसी के लिए नए सिरे से रणनीति बनाने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है, ऐसे समय में इस प्रकार की आंतरिक कलह पार्टी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि जब तक पार्टी आलाकमान इस तरह की अनुशासनहीनता दिखाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करता, तब तक निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल टूकता रहेगा। अनुशासन का यह अभाव और गुटबाजी की यह संस्कृति पार्टी के उस जनाधार को भी कमजोर करती है जिसे जोड़ने के लिए राहुल गांधी और अन्य शीर्ष नेता लगातार यात्राएं और रैलियां कर रहे हैं। दूदू की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बाहर का विपक्ष नहीं, बल्कि उसके अपने घर के भीतर चल रही आपसी फूट है जिसे संभालना अब प्रदेश नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

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