BREAKING NEWS

पर्सनल लोन की EMI से जल्द पाएं छुटकारा: अपनाएं ये 5 स्मार्ट तरीके और बचाएं ₹45,000 तक का ब्याज, जानिए पूरा गणित भोपाल में 1 लाख LPG उपभोक्ताओं पर गैस संकट, KYC नहीं कराने पर कनेक्शन ब्लॉक; बुकिंग भी ठप विशेष लेख : सेवा संकल्प अभियान 2026 : जनसेवा से जनकल्याण तक-सुशासन के संकल्प से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर जनता की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण करें अधिकारी : खाद्य मंत्री राजपूत रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में भारत की बड़ी भूमिका: कीव ने नई दिल्ली के सीजफायर प्लान को बताया सबसे व्यापक, ब्लैक सी और एनर्जी ट्रूस पर सहमति के संकेत डिजिटल पेमेंट का नया कीर्तिमान: 6 महीने में 145 अरब UPI लेनदेन, वैल्यू ₹177 लाख करोड़ के पार; पहली छमाही में 27% का जबर्दस्त उछाल

रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में भारत की बड़ी भूमिका: कीव ने नई दिल्ली के सीजफायर प्लान को बताया सबसे व्यापक, ब्लैक सी और एनर्जी ट्रूस पर सहमति के संकेत

लगभग तीन साल से जारी रूस और यूक्रेन के बीच के भीषण संघर्ष को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में भारत की वैश्विक मध्यस्थता को ऐतिहासिक सफलता मिलती दिखाई दे रही है। यूक्रेन की राजधानी कीव से आए एक ताजा और बड़े कूटनीतिक बयान में यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा (Andrii Sybiha) ने पुष्टि की है कि युद्धविराम और शांति बहाली के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचाराधीन चार प्रमुख प्रस्तावों में से भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक (Most Comprehensive) और व्यावहारिक है। सिबिहा ने स्पष्ट किया कि पहली बार भारत ने दोनों देशों के बीच औपचारिक युद्धविराम और तनाव घटाने के लिए सक्रिय मध्यस्थता की ठोस इच्छा जताई है, जिसे कीव बेहद गंभीरता से ले रहा है।

यूक्रेन के अनुसार, वर्तमान में युद्धविराम को लेकर दुनिया के चार देशों के प्रस्ताव राजनयिक मेज पर मौजूद हैं:

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका (US): ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) पर हमलों को रोकने का प्रस्ताव।

  2. तुर्की और मिस्र: काला सागर (Black Sea) में सुरक्षित अनाज निर्यात और समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा पर केंद्रित सीमित प्रस्ताव।

  3. भारत (नई दिल्ली): संपूर्ण और समग्र सीजफायर ढांचा, जिसमें केवल सैन्य ऑपरेशंस रोकना ही नहीं, बल्कि ऊर्जा ग्रिड, बंदरगाहों की सुरक्षा, ब्लैक सी में सुरक्षित जहाजरानी और वैश्विक खाद्य सुरक्षा की बहाली को एक साथ जोड़ा गया है।

यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कहा कि अलग-अलग हिस्सों में टुकड़ों में युद्धविराम करने के बजाय भारत का यह एकीकृत पैकेज सबसे संतुलित है। कीव ने साफ किया है कि वह एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्लैक सी नेविगेशन पर एक साथ संघर्ष विराम के लिए पूरी तरह तैयार है।

भारत की इस पहल के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधी और निरंतर बातचीत रही है।

  • पीएम मोदी ने पहले मॉस्को का दौरा कर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बात की थी और दुनिया को संदेश दिया था कि “यह युग युद्ध का नहीं है।”

  • इसके बाद उन्होंने यूक्रेन के ऐतिहासिक दौरे पर राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ बैठकर शांति की संभावनाओं को तलाशा था।

  • विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के कीव दौरे और लगातार वैश्विक साझेदारों के साथ संपर्क ने इस कूटनीतिक मसौदे को व्यावहारिक रूप दिया है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी हालिया साक्षात्कारों में पीएम मोदी के शांति प्रयासों, उनकी गहरी रुचि और निष्पक्ष भूमिका की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की है। भारत दुनिया का वह चुनिंदा देश है जिस पर मॉस्को और कीव दोनों का रणनीतिक भरोसा कायम है।

भारत के शांति प्रस्ताव को व्यापक इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह युद्ध के केवल फ्रंटलाइन मोर्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े वैश्विक संकटों का समाधान करता है:

  • ऊर्जा ढांचे पर हमलों पर रोक: सर्दियों के शुरू होने से पहले यूक्रेन के पावर प्लांट्स और ट्रांसमिशन ग्रिड्स पर रूसी मिसाइल हमलों को तत्काल बंद करना।

  • काला सागर में सुरक्षित शिपिंग: यूक्रेन के बंदरगाहों से अनाज और उर्वरक लेकर निकलने वाले मालवाहक जहाजों को सुरक्षित गलियारा (Safe Maritime Corridor) देना, ताकि विकासशील देशों (विशेषकर ग्लोबल साउथ) को खाद्यान्न संकट का सामना न करना पड़े।

  • सामरिक डी-एस्केलेशन: दोनों पक्षों द्वारा नागरिक बस्तियों पर लंबी दूरी की मिसाइलों व ड्रोन्स के इस्तेमाल पर आपसी सहमति से रोक लगाना।

यूक्रेन द्वारा भारत के प्रस्ताव पर सकारात्मक सहमति और तत्परता जताने के बाद अब पूरी प्रक्रिया का दारोमदार रूस की औपचारिक प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन ब्लैक सी और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आगे बढ़ने को तैयार है, बशर्ते रूस भी तनाव कम करने की दिशा में वास्तविक कदम उठाए। राजनयिक हलकों का मानना है कि यदि भारत के इस रोडमैप को रूस की हरी झंडी मिल जाती है, तो यह जेलेंस्की और पुतिन के बीच प्रत्यक्ष वार्ता की जमीन तैयार कर सकता है और दुनिया को पिछले कई दशकों के सबसे विध्वंसक युद्ध से मुक्ति मिल सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!