श्रीमद्भागवत कथा, 10 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा हरियाली अमावस्या से रक्षाबंधन तक चलता है झूला उत्सव, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

चित्रकूट भगवान श्रीराम की तपोस्थली धर्मनगरी चित्रकूट में सावन माह का पावन पर्व झूला महोत्सव पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों में राधा-कृष्ण के सुंदर झूले सजे हैं, भजन-कीर्तन और कथा प्रवचनों से संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है।

इसी क्रम में श्री रघुवर किशोर राम जानकी मंदिर में लगातार दसवें वर्ष झूला महोत्सव के अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथावाचक अनु शास्त्री ने बताया कि यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है, जो अब एक आध्यात्मिक परंपरा का रूप ले चुकी है। झूला महोत्सव हरियाली अमावस्या से रक्षाबंधन तक चलता है और प्रतिदिन मंदिर परिसर में विशेष पूजन, आरती और भजन संध्या का आयोजन होता है।

अनु शास्त्री ने बताया कि आज कथा का तीसरा दिन है और श्रद्धालुओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, वामन अवतार और भक्त प्रहलाद की कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

श्रद्धालुओं में दिखा विशेष उत्साह

मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर भगवान को झूला झुलाने पहुंच रही हैं। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए जलपान और बैठने की व्यवस्था भी की गई है।

धार्मिक पर्यटन को मिल रही बढ़ावा

श्रावण माह के इस अवसर पर चित्रकूट धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया है। आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई, सुरक्षा और परिवहन के विशेष इंतजाम किए हैं।

झूला महोत्सव के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर चित्रकूट की आध्यात्मिक छवि को और मजबूत किया है। आयोजक अनु शास्त्री और मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं को आने का आमंत्रण दिया गया है।

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