सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई | पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप; संसद मार्च

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अत्याचार किया. ये याचिकाएं 20 जुलाई के संसद मार्च से संबंधित हैं, जिसका आयोजन कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था.

27 जुलाई की कॉज लिस्ट के मुताबिक ये याचिकाएं सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच के सामने रखी जाएंगी. सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ 24 जुलाई को इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमत हुई थी.

वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ से कहा था, ''पुलिस छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग कर रही है.'' अब सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा और तय करेगा कि आगे क्या कदम उठाया जाए.

20 जुलाई के संसद मार्च की 2 तस्वीरें

पुलिस-रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और पथराव भी हुआ.

पुलिस-रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और पथराव भी हुआ.

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी घायल हो गए. 100 से अधिक लोग घायल हुए।

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी घायल हो गए. 100 से अधिक लोग घायल हुए।

संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज, 100 से ज्यादा घायल

कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला. सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई.

कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और संसद की ओर मार्च किया. ये लोग जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ, विजय चौक होते हुए संसद के पास पहुंचे।

इन लोगों ने संसद में घुसने की कोशिश की. जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. देर शाम पथराव की तस्वीरें भी सामने आईं. इसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए.

हालांकि, पुलिस ने शाम 5 बजे तक जंतर-मंतर को खाली करा लिया। लेकिन, रात करीब 11 बजे सीजेपी समर्थक जंतर-मंतर पहुंचे और प्रदर्शन फिर से शुरू कर दिया.

36 दिनों तक चला सीजेपी का विरोध, प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ

3 मई को NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का गुस्सा एक आंदोलन में बदल गया. 16 मई को सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी का गठन हुआ. 20 जून से प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए.

36 दिनों तक चला यह आंदोलन 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हो गया. प्रधान ने एक बयान में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा- पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें काफी दुखी किया है और यह मुद्दा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है.

इसके अलावा छात्रों के साथ अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी सरकार के आश्वासन के बाद अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी. सोमवार को उन्हें मेदांता अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाएगी.

पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में 2 याचिकाएं भी दायर की गईं

  • इससे पहले, 22 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर केंद्र और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था।
  • उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को सीसीटीवी कैमरा फुटेज और किसी भी वीडियोग्राफी सहित पुलिस कार्रवाई से संबंधित सभी आवश्यक रिकॉर्ड संरक्षित करने का निर्देश दिया था।

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