
कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च में पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट आज लगातार दूसरे दिन सुनवाई करेगा. मामले में 2 याचिकाएं पहले ही दायर की जा चुकी थीं. सोमवार को इसमें राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा की याचिका भी जुड़ गयी है.
सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ विरोध प्रदर्शन के चलते पुलिस ज्यादती या लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस मोहना की बेंच ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों पर हमला भी चिंता का विषय है और इस पर सरकार से जवाब मांगा जा सकता है.
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ ज्यादती की। ये याचिकाएं 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च से जुड़ी हैं.
20 जुलाई को संसद मार्च की 2 तस्वीरें

पुलिस-रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और पथराव भी हुआ.

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी घायल हो गए. 100 से अधिक लोग घायल हुए।
संसद मार्च के दौरान हुआ था लाठीचार्ज, 100 से ज्यादा घायल
कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। यह विरोध प्रदर्शन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक चला, जिसमें प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई झड़पें हुईं।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और संसद की ओर मार्च किया. ये लोग जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ और विजय चौक होते हुए संसद के पास पहुंचे।
इन लोगों ने संसद में घुसने की कोशिश की. इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. देर शाम पथराव की तस्वीरें भी सामने आईं. इसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए.
हालांकि, पुलिस ने शाम 5 बजे तक जंतर-मंतर को खाली करा लिया। लेकिन, रात करीब 11 बजे सीजेपी समर्थक जंतर-मंतर पहुंच गए और फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी याचिकाएं पहले 3 बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं
1. पहली बार – 24 मई को मांग थी – सीजेपी संस्थापकों की गतिविधियों की जांच सीबीआई करे
याचिकाकर्ता के वकील एनके गोस्वामी ने दावा किया कि सीजेपी न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल पंचोली की बेंच ने कहा, 'इसे इतना भावनात्मक रूप से न लें।'
इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही के दौरान दिए गए मौखिक अदालती बयानों के व्यावसायीकरण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। इस पर सीजेआई ने जवाब दिया था- “अभी ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति नहीं है। देखते हैं क्या होता है।”
2. दूसरी बार – 22 जुलाई को मांग थी – कॉकरोच पार्टी के समर्थकों पर हुए लाठीचार्ज की जांच
एक वकील ने सीजेआई की अगुवाई वाली 3 जजों की बेंच के समक्ष जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र अहम मुद्दे उठा रहे हैं. लेकिन उनके ख़िलाफ़ पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं. अगर संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द होनी चाहिए.'
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था, 'हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है.' जब वकील ने छात्रों की पिटाई के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो सीजेआई ने कहा, 'हमारा और अपना समय बर्बाद न करें.'
3. तीसरी बार- 24 जुलाई को मांग थी- पुलिस कंट्रोल जरूरी है, कोर्ट हमारे बीच आ रहा है
इस बार मामला वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने उठाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस हिंसा से संबंधित 2 याचिकाएं दायर की गई हैं. इनमें कई राज्य पक्षकार के रूप में शामिल हैं. उनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे.
गोपाल ने कहा, “पुलिस बच्चों के खिलाफ बहुत अधिक कार्रवाई कर रही है। यह लगातार जारी है। कुछ नियंत्रण जरूरी है। अदालत हमारे और पुलिस के बीच खड़ी है।” इन दलीलों के बाद सीजेआई ने कहा, ''इसे लिस्टिंग के लिए आने दीजिए, हम इस पर सुनवाई करेंगे.''
इससे पहले एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा था- मैंने सीजेपी विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज से जुड़ी किसी भी याचिका पर सुनवाई से इनकार नहीं किया. सच तो यह है कि कोई रिट याचिका दायर ही नहीं की गयी. मीडिया ने भी झूठी खबरें चलायीं.
36 दिनों तक चला सीजेपी का विरोध, प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ
15 मई को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बेरोजगारों को लेकर कॉकरोच टिप्पणी की. इसके खिलाफ 16 मई को सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी का गठन किया गया. 6 जून को इसे बनाने वाले अभिजीत दीपके भारत आए. NEET पेपर लीक मामले को लेकर 20 जून से प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए थे.
36 दिनों तक चला यह आंदोलन 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हो गया. एक बयान में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें बहुत दुखी किया है और यह मुद्दा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है.
इसके अलावा छात्रों के साथ भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी सरकार के आश्वासन के बाद अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी. सोमवार को उन्हें मेदांता अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाएगी.









