
भारतीय पुलिस सेवा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की दृढ़ इच्छाशक्ति, धैर्य और अदम्य साहस की कई ऐसी दास्तानें हैं जो किसी फिल्मी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं लगतीं। ऐसा ही एक सनसनीखेज और रोमांचक मामला राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) के ऑपरेशनल इतिहास में जुड़ गया है, जहां राज्य के पुलिसकर्मियों ने जिस जांबाजी का परिचय दिया उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। पिछले पूरे 17 सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा पच्चीस हजार रुपए का इनामी कुख्यात ड्रग तस्कर हाजी (Drug Smuggler Haji) आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। इस शातिर अपराधी को दबोचने के लिए राजस्थान पुलिस की एक विशेष टीम ने जो तरीका अपनाया, वह अपने आप में एक मिसाल बन गया है। पुलिस ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में स्थानीय तस्करों के खौफ और भूगोल के बीच खुद को छिपाने के लिए भेड़ों को चराने वाले गड़रिए (Shepherd) का रूप धारण किया और महीनों तक गांव-गांव भटककर इस शातिर का सुराग लगाया। इस साहसिक ऑपरेशन के बाद से देश भर की पुलिस व्यवस्था में राजस्थान पुलिस के इस जज्बे की जमकर सराहना हो रही है।
यह पूरा मामला लगभग 17 साल पहले का है जब राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध ड्रग्स के कारोबार का जाल तेजी से फैल रहा था। राजस्थान पुलिस ने उस दौरान एक बड़े तस्कर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ बरामद किया था, जिसके मुख्य सरगनाओं में हाजी का नाम सबसे ऊपर आया था। पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही मुख्य आरोपी हाजी कानून की गिरफ्त से बचने के लिए रातों-रात फरार हो गया और जम्मू-कश्मीर के दुर्गम पहाड़ी इलाकों व संवेदनशील गांवों में जाकर छिप गया। इतने लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रहने के कारण उस पर पच्चीस हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था, लेकिन उसकी सटीक लोकेशन और पहचान छिपाने की शातिर आदतों के कारण स्थानीय पुलिस एजेंसियां भी बार-बार गच्चा खा रही थीं। हाजी ने वहां के स्थानीय कबीलों और तस्करों के बीच अपनी गहरी पैठ बना ली थी, जिसके चलते किसी भी बाहरी व्यक्ति या पुलिस बल का उस इलाके में प्रवेश करना सीधे तौर पर अपनी जान जोखिम में डालने जैसा था।
जब पारंपरिक तरीकों और मुखबिरों के जरिए भी हाजी का कोई सुराग हाथ नहीं लगा, तो राजस्थान पुलिस के उच्च अधिकारियों ने एक बेहद खतरनाक और गोपनीय योजना बनाई। इस मिशन को अंजाम देने के लिए पुलिस की एक विशेष टीम को सादे कपड़ों और स्थानीय वेशभूषा में जम्मू-कश्मीर के उस विशिष्ट पहाड़ी जिले के लिए रवाना किया गया जहाँ हाजी के छिपे होने की सुगबुगाहट थी। स्थानीय भाषा, रहन-सहन और भूगोल से पूरी तरह अनजान होने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने वहां के माहौल में घुलने-मिलने के लिए गड़रियों (Shepherds) का हुलिया अपनाया। कंधों पर कंबल डाले, हाथों में लाठी लिए और भेड़-बकरियों के झुंड के साथ इन पुलिसकर्मियों ने हफ्तों तक दुर्गम पहाड़ों, बर्फीले रास्तों और सुनसान गांवों की खाक छानी। इस दौरान उन्होंने किसी को भी अपनी असली पहचान का अहसास नहीं होने दिया और एक आम स्थानीय गड़रिए की तरह घूमते हुए हाजी के गुप्त ठिकाने, उसके दैनिक क्रियाकलापों और उसके सहयोगियों की पुख्ता जानकारी इकट्ठा करनी शुरू कर दी।
महीनों की कड़ी मशक्कत और भेस बदलकर की गई इस खुफिया रेकी के बाद आखिरकार वह दिन आ ही गया जब राजस्थान पुलिस को अपने इस लंबे मिशन में सफलता मिलने की उम्मीद जगी। जिस समय हाजी पूरी तरह बेफिक्र होकर अपने सुरक्षित समझे जाने वाले ठिकाने पर मौजूद था, तभी गड़रिए के वेश में घूम रहे पुलिसकर्मियों ने स्थानीय सुरक्षाबलों की मदद से अचानक उसके पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। खुद को चारों तरफ से घिरता देख आरोपी हाजी ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिसकर्मियों ने उसे पलक झपकते ही दबोच लिया और उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। इतने सालों तक कानून से लुकाछिपी का खेल खेलने वाला वह शातिर तस्कर जब पुलिस की गिरफ्त में आया, तो उसके चेहरे पर कानून का खौफ साफ तौर पर देखा जा सकता था। इस गिरफ्तारी के साथ ही राजस्थान पुलिस ने यह साबित कर दिया कि अपराधी चाहे दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाए, कानून के लंबे हाथ उस तक पहुंच ही जाते हैं।
इस सनसनीखेज ऑपरेशन की सफलता के बाद राजस्थान पुलिस मुख्यालय में भी खुशी की लहर दौड़ गई है और इस पूरी टीम को सम्मानित करने की घोषणा की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उन तमाम अपराधियों और ड्रग माफियाओं के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो यह सोचते हैं कि वे समय बीतने के बाद कानून की गिरफ्त से हमेशा के लिए बच निकलेंगे। ड्रग्स के काले कारोबार से युवाओं की जिंदगी को बर्बाद करने वाले तत्वों के खिलाफ राजस्थान सरकार और पुलिस प्रशासन का यह अभियान आगे भी इसी तरह पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। गड़रिए बनकर जम्मू-कश्मीर की वादियों में चलाए गए इस ऐतिहासिक ऑपरेशन ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि जब खाकीधारी अपने कर्तव्य पथ पर अपनी जान की बाजी लगाकर उतरते हैं, तो बड़े से बड़ा माफिया भी घुटने टेकने पर मजबूर हो जाता है।








