September 16, 2026 11:47 pm

BREAKING NEWS

नीतीश कुमार रेड्डी का बड़ा खुलासा, चोट के दर्द और नेगेटिविटी से निपटने का बताया अनोखा फॉर्मूला नीमच के जावद में कला और अध्यात्म का अनूठा संगम, माइक्रो आर्टिस्ट राजेश सोनी ने चांदी से गढ़े अष्टविनायक। पहले ही दिन चंद घंटों में फुल सब्सक्राइब हुआ ₹1000 करोड़ का इश्यू, ग्रे मार्केट में 23% प्रीमियम से बंपर लिस्टिंग के संकेत जब बिग बी-गोविंदा संग झूमीं ‘बाहुबली’ की शिवगामी: 90 के दशक का वो ब्लॉकबस्टर डांस एंथम जिसने हिला दिया था पूरा बॉलीवुड कन्या संक्रांति 2026: सूर्य देव बदलेंगे अपनी चाल, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग में चमकेगी किस्मत भारत पर 100% टैरिफ की तैयारी? अमेरिका ने उठाया बड़ा कदम

केजरीवाल की AAP का राजस्थान में मिशन 2028 शुरू: बारां में कांग्रेस-बीजेपी को पटखनी देकर बनाई खास रणनीति

राजस्थान की सियासत में इन दिनों एक ऐसा बड़ा भूचाल आया है जिसने पारंपरिक रूप से दो-दलीय राजनीति करने वाली कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों की नींद उड़ा दी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और पंजाब में अपनी मजबूत सरकार चलाने के बाद अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) ने अब मरुधरा यानी राजस्थान की धरती पर अपने पाँव पूरी मजबूती के साथ जमाने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में संपन्न हुए राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव के परिणामों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, जिसमें ‘आप’ ने बारां नगर परिषद चुनाव में एतिहासिक प्रदर्शन करते हुए प्रत्यक्ष बहुमत हासिल कर लिया है। इस बड़ी सफलता के बाद से आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सीधे तौर पर वर्ष 2028 में होने वाले आगामी राजस्थान विधानसभा चुनावों (Rajasthan Assembly Elections 2028) के लिए अपनी अचूक और खास रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के 15 साल पुराने गढ़ को ध्वस्त करके अपनी सियासी जमीन तैयार करने वाली ‘आप’ की इस पैंतरेबाजी से राज्य की राजनीति का पूरा समीकरण ही बदलता हुआ नजर आ रहा है।

राजस्थान के बारां नगर परिषद चुनाव के जो नतीजे सामने आए हैं, उन्होंने राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया है। कुल 60 वार्डों वाले इस शहर में पिछले डेढ़ दशक यानी करीब 15 सालों से कांग्रेस पार्टी का निर्विवाद रूप से दबदबा और एकछत्र राज कायम था। लेकिन इस बार के निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी ने एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में उभरते हुए कुल 60 में से 31 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की और अपने दम पर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। इस मुकाबले में पारंपरिक दिग्गज पार्टी कांग्रेस महज 18 सीटों पर सिमटकर रह गई, जबकि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सिर्फ 9 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। इस चौंकाने वाले चुनावी परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर की जनता अब पारंपरिक दलों के विकल्प से ऊब चुकी है और विकास के नाम पर बदलाव चाहती है, जिसका पूरा फायदा आम आदमी पार्टी को मिला है।

बारां के इस सियासी रण में आम आदमी पार्टी की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत के साथ-साथ पूर्व सभापति कमल राठौड़ की बेहतरीन सांगठनिक रणनीति को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। पार्टी ने स्थानीय मुद्दों, मूलभूत सुविधाओं, और जनहित से जुड़ी समस्याओं को अपने चुनाव प्रचार के केंद्र में रखा, जिसका सीधा जुड़ाव आम जनता के साथ हुआ। चुनाव के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद जैन भाया और बीजेपी के सांसद स्तर के दिग्गजों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, इसके बावजूद वे ‘आप’ के इस सियासी चक्रव्यूह को भेदने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। कमल राठौड़ के नेतृत्व में पार्टी ने न केवल खुद जीत दर्ज की बल्कि अपनी पार्टी के 31 पार्षदों को जिताकर यह दिखा दिया कि यदि मजबूत स्थानीय चेहरे और साफ नीयत के साथ मैदान में उतरा जाए, तो किसी भी बड़े गढ़ को आसानी से ढहाया जा सकता है।

बारां की इस धमाकेदार जीत के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्रदेश की जनता और कार्यकर्ताओं का आभार जताया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राजस्थान की जनता अब बीजेपी और कांग्रेस के आपसी गठजोड़ और खराब शासन व्यवस्था से पूरी तरह त्रस्त आ चुकी है और वह बदलाव चाहती है। इस जीत को महज एक नगर निकाय चुनाव न मानकर इसे वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ‘आप’ के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ने इस सफलता से प्रेरणा लेते हुए अब पूरे राजस्थान के ग्रामीण और शहरी इलाकों में पार्टी के जनाधार को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए एक विशेष सदस्यता अभियान और जन-संपर्क रणनीति का खाका तैयार कर लिया है।

राजस्थान का राजनीतिक इतिहास हमेशा से कांग्रेस और बीजेपी के इर्द-गिर्द दो-दलीय व्यवस्था (Two-Party System) के रूप में घूमता रहा है, जहां हर पांच साल पर सत्ता की अदला-बदली होती आई है। ऐसे में किसी तीसरे राजनीतिक दल द्वारा इतने बड़े पैमाने पर किसी नगर परिषद में अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राज्य के मतदाताओं के मन में एक मजबूत और वैकल्पिक राजनीतिक संस्कृति की चाहत पैदा हो चुकी है। आम आदमी पार्टी अपनी दिल्ली और पंजाब मॉडल की मुफ्त बिजली, बेहतरीन शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ईमानदार राजनीति के मुद्दों को लेकर अब राजस्थान के कोने-कोने तक अपनी पहुँच बनाने की योजना पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में यदि ‘आप’ अपनी इस रणनीति को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू करने में कामयाब रहती है, तो आगामी विधानसभा चुनावों में मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प हो जाएगा, जिससे दोनों प्रमुख दलों की मुश्किलें और अधिक बढ़ना तय माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!