
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित राज्यस्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के मेहनतकश श्रमवीरों को ऐतिहासिक सौगातें दीं। राज्य के चहुंमुखी विकास में मजदूरों और कामगारों के पसीने को मुख्य आधार बताते हुए मुख्यमंत्री ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए एक सिंगल क्लिक से 1 लाख 43 हजार से अधिक पंजीकृत श्रमिकों के बैंक खातों में 51 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि सीधे अंतरित की। श्रम विभाग के विभिन्न मंडलों की 26 प्रमुख योजनाओं के तहत यह वित्तीय संबल श्रमिकों के खातों में सीधे पहुंचा, जिससे पूरे आयोजन स्थल पर मौजूद हजारों श्रमिकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के खेतों से लेकर शहरों के गगनचुंबी निर्माणों तक राज्य की तरक्की की हर ईंट में श्रमिकों का योगदान शामिल है और यही श्रमशक्ति आने वाले समय में विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को धरातल पर उतारेगी।
महासम्मेलन के मुख्य मंच से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के श्रमिकों की दैनिक दिनचर्या, आवागमन की समस्याओं और स्वरोजगार के विस्तार को केंद्र में रखते हुए तीन अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। पहली घोषणा के तहत शहरों में सुबह-सुबह काम की तलाश में चौराहों और लेबर चौकों पर जुटने वाले श्रमिकों के लिए सर्वसुविधायुक्त ‘आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में श्रमिकों के सम्मानजनक बैठने, स्वच्छ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और दैनिक मूलभूत सुविधाओं का पुख्ता प्रबंध होगा। दूसरी घोषणा में काम के सिलसिले में रोज लंबी दूरी तय करने वाले पंजीकृत कामगारों के लिए ‘ई-बाइक सहायता योजना’ शुरू करने का फैसला लिया गया, जिससे उनकी यात्रा सुगम और किफायती बन सके। तीसरी सबसे बड़ी घोषणा के अंतर्गत असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को पैडल रिक्शा छोड़कर ई-रिक्शा अपनाने के लिए दी जाने वाली सरकारी सहायता राशि को 50 हजार रुपये से सीधे दोगुना करके 1 लाख रुपये कर दिया गया। इस निर्णय से पारंपरिक रिक्शा चालकों को प्रदूषणमुक्त आधुनिक साधन अपनाने और अपनी दैनिक आय बढ़ाने में सीधी मदद मिलेगी।
श्रम विभाग के दायरे और उपलब्धियों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के तीन प्रमुख श्रम मंडलों के जरिए वर्तमान में 67 विभिन्न प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। यह योजनाएं श्रमिक के बच्चे के जन्म, पोषण, स्कूली शिक्षा, उच्च अध्ययन, कौशल विकास, बेटियों के विवाह से लेकर वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा तक हर पड़ाव पर एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं। सरकार के पिछले ढाई वर्षों के ट्रैक रिकॉर्ड को रेखांकित करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे श्रमिकों और उनके आश्रितों तक पारदर्शी ढंग से पहुंचाई जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश भर के असंगठित और निर्माण क्षेत्र के सभी पात्र कामगारों से अपील की कि वे श्रम विभाग के पोर्टल पर अपना अनिवार्य पंजीयन कराएं ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।
‘श्रमेव जयते’ के मूल मंत्र को साकार करने की दिशा में सरकार ने श्रमिक परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आर्थिक तंगी किसी भी होनहार बच्चे की प्रतिभा के आड़े नहीं आने दी जाएगी। ‘अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना’ के तहत श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को देश के प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में पूरी तरह निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना की भारी सफलता को देखते हुए सीटों की संख्या को 100 से बढ़ाकर सीधे 200 कर दिया गया है, जिसका पूरा वित्तीय भार राज्य सरकार वहन कर रही है। कार्यक्रम के दौरान एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक क्षण तब सामने आया जब मुख्यमंत्री ने श्रमिक परिवार की होनहार बेटी मनिंदर कौर को लैपटॉप और 1 लाख 75 हजार रुपये का चेक सौंपा। मनिंदर ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद जेईई परीक्षा पास कर प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) सूरत में इंजीनियरिंग सीट हासिल की है। मुख्यमंत्री ने मंच से ऐलान किया कि मनिंदर की इंजीनियरिंग की पूरी पढ़ाई का खर्च अब छत्तीसगढ़ का श्रम विभाग उठाएगा।
महिला सशक्तीकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता को नया आयाम देते हुए सम्मेलन में ‘दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना’ के तहत 100 महिला श्रमिकों को नए ई-रिक्शा की चाबियां सौंपी गईं और मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर उन्हें रवाना किया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और श्रम एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने स्वयं लाभार्थी महिला यशोदा विश्वकर्मा के ई-रिक्शा में बैठकर सवारी की और महिला चालकों की हौसलाअफजाई की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब घर की महिला आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनती है, तो पूरे परिवार का सामाजिक स्तर सुधरता है। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने भी पुष्टि की कि दीदी ई-रिक्शा योजना के तहत सहायता अनुदान को एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये तक का संबल दिया जा रहा है ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर उद्यमी बनकर समाज में सिर उठाकर जीवन जी सकें।
कार्यक्रम की औपचारिकता से परे हटकर मुख्यमंत्री साय ने राज्य के दूरदराज के इलाकों से आई श्रमिक बहनों के साथ जमीन पर बैठकर दोपहर का भोजन किया। इस आत्मीय संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने एक अभिभावक की तरह उनसे पूछा कि क्या सरकारी योजनाओं का पैसा बिना किसी बिचौलिए या अड़चन के उनके बैंक खातों में पहुंच रहा है। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और राशन मिलने की स्थिति की भी जमीनी जानकारी ली। मुख्यमंत्री को अपने बीच एक सामान्य सदस्य की तरह भोजन करते और सुख-दुख बांटते देख उपस्थित श्रमिक बहनों ने भावुक होकर शासन के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि योजनाओं की वास्तविक सार्थकता तभी है जब अंतिम पंक्ति के श्रमिक तक सहायता बिना किसी प्रशासनिक देरी के पहुंचे।
प्रशासनिक पारदर्शिता और कागजी झंझटों को समाप्त करने के लिए सम्मेलन में अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री ने राज्य की नई उपकर (Cess) कटौती वेबसाइट का विधिवत शुभारंभ किया और श्रमिकों के लिए नए पीवीसी एवं क्यूआर (QR) कोड आधारित स्मार्ट श्रमिक पंजीयन कार्ड जारी किए। अब श्रमिक सिर्फ एक स्कैन के माध्यम से अपनी पात्रता, योजनाओं की स्थिति और विवरण की जांच कर सकेंगे। केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ और पीएफ (PF) पोर्टेबिलिटी के डिजिटल सुधारों ने उन प्रवासी श्रमिकों के जीवन को बहुत सुरक्षित बनाया है जो काम के सिलसिले में एक राज्य से दूसरे राज्य आवाजाही करते हैं।
विश्वकर्मा जयंती के पावन पर्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस तथा उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक गण और हजारों श्रमिकों ने एक साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आगामी दिनों में तीन हजार से अधिक युवाओं के लिए रोजगार मेले के आयोजन की जानकारी दी। इस विराट सम्मेलन ने यह साफ संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा श्रमिक केवल एक लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के नवनिर्माण का सबसे मजबूत भागीदार और शिल्पकार है।









