September 29, 2026 4:33 am

BREAKING NEWS

भूल से भी ना करें रुपये-पैसों से जुड़ी ये 10 गलतियां, जेब खाली होने पर लोग कहते हैं- ‘भारी मिस्टेक हो गई!’ मोबाइल खो जाने पर क्या UPI से खाली हो सकता है बैंक अकाउंट? जानिए कितना है जोखिम और तुरंत करें ये 4 काम मुनाफे की मशीन हैं Post Office की ये सुपरहिट स्कीम्स, मिलेगा 8.2% तक का बंपर ब्याज और 100% गारंटीड रिटर्न; देखें पूरी लिस्ट अमेरिका में कुछ खास दवाएं होंगी टैरिफ फ्री, ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ भारत को मिलेगी बड़ी राहत; जानिए किन दवाओं पर होगा असर UPI पेमेंट चार्ज विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा दखल, केंद्र, RBI और NPCI को भेजा नोटिस; 15 अक्टूबर से लागू नियम पर रोक से इनकार शाही मस्जिद छत्री चौक उज्जैन के प्रभावित हिस्‍से को समाज के लोग हटा रहे हैं स्‍वेच्‍छा से आमजन किसी भी अफवाह पर नहीं दें ध्‍यान

ASP मुकेश सोनी कौन हैं? विवादों के बाद भी कैसे मिलती रहीं मलाईदार पोस्टिंग्स

राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) के अधिकारी और एडिशनल एसपी (ASP) मुकेश सोनी इन दिनों अपने ऊपर लगे गंभीर भ्रष्टाचार और दो करोड़ रुपये की घूसखोरी के आरोपों को लेकर प्रदेश की सुर्खियों में छाए हुए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रडार पर आए मुकेश सोनी का नाम एक बार फिर से किसी बड़े विवाद से जुड़ा है, जिसने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर बार-बार विवादों और शिकायतों के घेरे में आने के बावजूद इस तरह के अधिकारियों को लगातार मलाईदार और महत्वपूर्ण पोस्टिंग कैसे मिलती रहती हैं। एसीबी की शुरुआती जांच और खुलासों के बाद से ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है, और हर कोई यह जानना चाहता है कि इस पूरे रिश्वत कांड के पीछे की असली और गहरी कहानी क्या है।

एडिशनल एसपी मुकेश सोनी का करियर शुरू से ही विवादों की परछाई में घिरा रहा है। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक ऐसे तेज-तर्रार लेकिन विवादित अधिकारी के रूप में जाना जाता है, जिन पर पहले भी कई बार भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद, सिस्टम की अनदेखी कहें या राजनीतिक संरक्षण का असर, उन्हें हर बार बचाने वाले हाथ मिल जाते थे और वे किसी न किसी तरह मलाईदार पदों पर काबिज होने में सफल रहे। जानकारों का कहना है कि पुलिस विभाग में कई ऐसे पद होते हैं जहाँ भ्रष्टाचार की संभावनाएं सबसे ज्यादा होती हैं, और ऐसे पदों पर बार-बार एक ही तरह की छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति होना सिस्टम के भीतर की गंभीर कमियों को उजागर करता है। इस बार दो करोड़ रुपये के बड़े घूसकांड में नाम सामने आने के बाद मुकेश सोनी के प्रशासनिक रसूख और उनकी कार्यशैली पर सबसे बड़ा और निर्णायक सवालिया निशान लग गया है।

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को एक मामले में भारी-भरकम रिश्वत के लेन-देन और सौदेबाजी के पुख्ता सबूत मिले। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे खेल में दो करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम की घूस का मामला सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर एएसपी मुकेश सोनी की संलिप्तता की गहरी आशंका जताई जा रही है। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियानों के बीच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इस तरह के गंभीर रिश्वत कांड में नाम आना राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों का सवाल है कि जिस पुलिस महकमे पर राज्य में अपराध और भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेदारी है, जब वही महकमा ऐसे मामलों में घिर जाए, तो आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा कैसे कायम रह पाएगा।

राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा बहुत आम है कि कुछ चुनिंदा अधिकारियों को तमाम शिकायतों और जांच के बावजूद वीआईपी और मलाईदार पोस्टिंग कैसे मिल जाती है। एएसपी मुकेश सोनी का यह प्रकरण इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है कि कैसे प्रशासनिक तंत्र में बैठे कुछ प्रभावशाली लोग अपने रसूख के दम पर हर नियम और कायदे को ताक पर रख देते हैं। विपक्ष और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा भी इस मामले को लेकर सरकार और गृह विभाग पर निशाना साधा जा रहा है, जिसमें यह मांग उठ रही है कि केवल एक अधिकारी पर कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि उन सभी चेहरों को भी बेनकाब किया जाना चाहिए जिन्होंने परोक्ष या अपरोक्ष रूप से ऐसे अधिकारियों को संरक्षण दिया। यह पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रशासनिक सुधारों और पारदर्शी तबादला नीतियों के दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति कितनी चिंताजनक बनी हुई है।

एएसपी मुकेश सोनी के खिलाफ चल रही इस उच्चस्तरीय एसीबी जांच के निष्कर्ष आने वाले दिनों में राजस्थान पुलिस और प्रशासनिक महकमे के कई अन्य बड़े राज खोल सकते हैं। इस बात की पूरी संभावना है कि जैसे-जैसे जांच का दायरा आगे बढ़ेगा, इस घूसकांड में लिप्त अन्य बिचौलियों, पुलिसकर्मियों और रसूखदार लोगों के नाम भी सामने आएंगे। विभाग के भीतर इस बात को लेकर मंथन शुरू हो चुका है कि इस तरह की घटनाओं से पुलिस की छवि को जो भारी नुकसान पहुंच रहा है, उसकी भरपाई कैसे की जाए। जनता और मीडिया की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि क्या इस बार कानून निष्पक्षता से अपना काम करते हुए दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाएगा, या फिर यह मामला भी फाइल के किसी कोने में दबकर रह जाएगा। यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था की ईमानदारी और जवाबदेही की एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!