
पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा ‘सिंधु जल संधि’ (Indus Waters Treaty) को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद से पाकिस्तान की नींद उड़ गई है। भारत के इस कड़े और ऐतिहासिक फैसले के बाद से पाकिस्तान में जल संकट गहराने लगा है और दुनिया के अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों से किसी भी प्रकार का समर्थन न मिलने पर अब पाकिस्तान के तेवर पूरी तरह ढीले पड़ गए हैं। आलम यह है कि अब पाकिस्तान भारत के सामने हाथ जोड़ने पर मजबूर हो गया है और वैश्विक समुदाय से मदद की गुहार लगा रहा है।
पाकिस्तान सरकार के सूचना मंत्री अताहुल्लाह तरार ने बुधवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि भारत के इस एकतरफा फैसले का सीधा और घातक असर उनके देश की आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील करते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो पानी की कमी से उनके देश के लोग मारे जाएंगे।
पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री अताहुल्लाह तरार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि भारत की तरफ से पानी को रोका जाना उनके बुनियादी अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा, “हम भारत को पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति बिल्कुल नहीं दे सकते, क्योंकि यह पाकिस्तान के 24 करोड़ नागरिकों का बुनियादी और संवैधानिक अधिकार है।”
तरार ने यह भी तर्क दिया कि यदि कोई देश किसी अंतरराष्ट्रीय जल संधि को एकतरफा रूप से स्थगित करता है, तो इससे दुनिया के उन अन्य देशों पर भी बुरा असर पड़ सकता है जो आपसी फ्रेमवर्क के तहत साझा पानी का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने जल हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बातचीत जारी रखेगा।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए अब अंतरराष्ट्रीय संधियों का हवाला दे रही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए तरार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल स्रोत क्षेत्र उनके लोगों की जीवन रेखा हैं। उन्होंने गीदड़भभकी देते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान के इस अधिकार को छीना गया, तो उनके लोग मर जाएंगे और इस गंभीर स्थिति को ‘एक्ट ऑफ वॉर’ (युद्ध की कार्रवाई) माना जाएगा।
हालांकि, भारत सरकार ने अपने इस कदम के पीछे स्पष्ट कारण देते हुए साफ कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकतीं। भारत ने सीमा पार से लगातार हो रहे प्रायोजित आतंकवाद के मद्देनजर ही सिंधु जल संधि पर रोक लगाने का सख्त निर्णय लिया है, ताकि देश की सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके। दूसरी तरफ, आतंकवाद के दलदल में खुद फंसे होने के बावजूद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने खुद को पीड़ित साबित करने की नाकाम कोशिश कर रहा है, लेकिन दुनिया अब उसकी चालों को अच्छी तरह समझ चुकी है।















