
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के गलियारों में जब भी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम आता है, तो उनके सख्त फैसलों और चौंकाने वाले बयानों की चर्चा पूरी दुनिया में होने लगती है। हाल ही में नेतन्याहू ने एक ऐसा ही बेहद सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला बयान दिया है जिसने विमानन सुरक्षा और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। उन्होंने अपने एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान खुलासा किया है कि इतिहास में एक बार एक भारतीय पायलट पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया गया था, जिसके बाद से विमानों की सुरक्षा को लेकर कई कड़े नियम बनाए गए। इस चौंकाने वाले खुलासे के सामने आने के बाद से ही आम लोगों के मन में यह सवाल सबसे तेजी से उठ रहा है कि आखिर दुनिया के हर कमर्शियल और पैसेंजर प्लेन के अंदर कुल्हाड़ी जैसी खतरनाक चीज को रखने की आखिर क्या जरूरत पड़ती है। आधुनिक दौर में जहां सुरक्षा के लिहाज से एक सुई तक को विमान के अंदर ले जाने पर पाबंदी होती है, वहीं कॉकपिट या केबिन के अंदर कुल्हाड़ी का होना अपने आप में एक बड़ा रहस्य और बहस का मुद्दा बना हुआ है।
क्या है विमान के अंदर कुल्हाड़ी रखने का असली और हैरान करने वाला तकनीकी कारण जिसे हर यात्री को जानना चाहिए
जब भी कोई आम यात्री हवाई जहाज में सफर करता है, तो वह यही सोचता है कि उड़ान के दौरान उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आधुनिक और डिजिटल उपकरण मौजूद हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तकनीकी रूप से इतने उन्नत और कंप्यूटरीकृत माने जाने वाले विमानों के अंदर आज भी एक पारंपरिक हथियार यानी मेटल की कुल्हाड़ी को अनिवार्य रूप से क्यों रखा जाता है। विमानन और एविएशन सेक्टर के तकनीकी नियमों के अनुसार यह कुल्हाड़ी कोई हमला करने का हथियार नहीं है, बल्कि यह पायलट और क्रू मेंबर के लिए एक आपातकालीन यानी इमरजेंसी रेस्क्यू टूल के रूप में काम करती है। उड़ान के दौरान यदि किसी तकनीकी खराबी के चलते विमान का कोई हिस्सा जाम हो जाता है, दरवाजा ब्लॉक हो जाता है, या इलेक्ट्रॉनिक शॉर्ट सर्किट के कारण कोई लकड़ी या प्लास्टिक का पैनल फंस जाता है, तो उसे तुरंत काटने या तोड़ने के लिए इस कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कई बार क्रैश लैंडिंग या आपातकालीन स्थिति में जब दरवाजे या खिड़कियां जाम हो जाती हैं, तब यह कुल्हाड़ी यात्रियों की जान बचाने में सबसे बड़ा हथियार साबित होती है।
इतिहास के वे खौफनाक पन्ने जब विमान अपहरण और हमलों के दौरान कॉकपिट की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती
बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा जिस भारतीय पायलट पर हमले का जिक्र किया गया है, उसने विमानन इतिहास के उन काले और डरावने दिनों की याद ताजा कर दी है जब दुनिया भर में एयरक्राफ्ट हाईजैकिंग की घटनाएं आम हुआ करती थीं। पिछले दशकों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जब आतंकवादियों या असामाजिक तत्वों ने विमान के कॉकपिट में घुसने और पायलटों को बंधक बनाने की कोशिश की ताकि विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लिया जा सके। ऐसे गंभीर और जानलेवा हालातों से निपटने के लिए ही विमान निर्माताओं ने पायलटों को यह अधिकार दिया है कि वे कॉकपिट के अंदर ऐसी किसी भी अप्रिय स्थिति या आपातकाल से खुद का बचाव करने के लिए कुल्हाड़ी का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि, 9/11 की दर्दनाक आतंकवादी घटना के बाद से दुनिया भर की एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियों ने विमान के कॉकपिट के दरवाजों को बुलेटप्रूफ और अत्यधिक सुरक्षित बना दिया है, जिससे अंदर बाहरी व्यक्ति का प्रवेश लगभग असंभव हो गया है। इसके बावजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आज भी दुनिया भर के अधिकांश विमानों में इस इमरजेंसी टूल को एक तय सुरक्षित जगह पर रखने का नियम सख्ती से निभाया जाता है।
आधुनिक विमानन सुरक्षा और जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में कितनी बदल चुकी है फ्लाइट सेफ्टी
आज का दौर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है जहां हर एक उड़ान पर जमीन से बैठे एयर ट्रैफिक कंट्रोल और आधुनिक सेंसर की पैनी नजर रहती है। आधुनिक विमानों में आग बुझाने वाले आधुनिक उपकरण, डिजिटल फायर फाइटिंग सिस्टम और कई प्रकार के स्वचालित सुरक्षा कवच लगे होते हैं जो किसी भी खतरे को होने से पहले ही भांप लेते हैं। यही कारण है कि आज के समय में आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कुल्हाड़ी जैसे पारंपरिक उपकरणों के साथ-साथ कई अन्य हाई-टेक गैजेट्स और रेस्क्यू किट भी विमान के अंदर उपलब्ध कराए जाने लगे हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा में कोई भी चूक न हो सके। इसके बावजूद नेतन्याहू के इस बयान ने एक बार फिर से इस बात की बहस छेड़ दी है कि आपातकाल के समय इंसानी सूझबूझ और बुनियादी उपकरण ही सबसे बड़े संकटमोचन साबित होते हैं। चाहे तकनीक कितनी भी आगे क्यों न बढ़ जाए, लेकिन विमानन इतिहास के वे सबक और सुरक्षा के कड़े नियम हमेशा एयरलाइंस को किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रखते हैं, जिससे हर यात्री का सफर सुरक्षित बनता है।








