November 2, 2026 8:47 pm

BREAKING NEWS

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहे रोजगार के नए अवसर, रेडी-टू-ईट निर्माण से सरस्वती समूह को हर महीने 50 हजार रुपये का मुनाफा

रायपुर, 02 नवम्बर 2026

 रेडी-टू-ईट निर्माण से सरस्वती समूह को हर महीने 50 हजार रुपये का मुनाफा

 रेडी-टू-ईट निर्माण से सरस्वती समूह को हर महीने 50 हजार रुपये का मुनाफा

 रेडी-टू-ईट निर्माण से सरस्वती समूह को हर महीने 50 हजार रुपये का मुनाफा

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी दिशा में राज्य शासन द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण का कार्य सौंपने की पहल ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मजबूत बनाने का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले में महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उदाहरण रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा स्थित सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं हैं, जो रेडी-टू-ईट पोषण आहार का निर्माण कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। समूह को इस कार्य से प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है।

महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन की प्राथमिकताओं में महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण और बच्चों एवं माताओं के पोषण स्तर में सुधार शामिल है। महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट निर्माण से जोड़ने की पहल इन दोनों उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ा रही है। इससे एक ओर ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव और आसपास ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने में सहायता मिल रही है।

वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में जिले में महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने और स्व-सहायता समूहों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रेडी-टू-ईट निर्माण जैसी गतिविधियां महिलाओं को नियमित आय अर्जित करने के साथ उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और वितरण जैसे कार्यों का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान कर रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और वे परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

अप्रैल 2026 से रेडी-टू-ईट निर्माण कर रही हैं सरस्वती समूह की महिलाएं

रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा स्थित सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती चम्पा चौहान बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को आजीविका के नए अवसर प्राप्त हुए। अप्रैल 2026 से समूह को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का कार्य मिला। इसके बाद समूह की सभी 10 महिलाएं इस गतिविधि से जुड़कर नियमित रूप से कार्य कर रही हैं। पहले महिलाओं के पास आय अर्जित करने के सीमित अवसर थे, लेकिन अब वे समूह के माध्यम से सामूहिक रूप से कार्य करते हुए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।

श्रीमती चौहान बताती हैं कि रेडी-टू-ईट निर्माण से समूह की महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। इससे परिवार के दैनिक खर्चों को पूरा करने में मदद मिल रही है। साथ ही समूह की महिलाओं को सामूहिक निर्णय लेने, कार्यों का प्रबंधन करने और आर्थिक गतिविधियों के संचालन का अनुभव भी प्राप्त हो रहा है।

आधुनिक मशीनों से तैयार किया जा रहा पूरक पोषण आहार

सरस्वती स्व-सहायता समूह की महिलाएं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रेडी-टू-ईट पोषण आहार तैयार करती हैं। निर्माण प्रक्रिया में सबसे पहले गेहूं, चना, सोयाबीन एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की मशीनों के माध्यम से सफाई की जाती है। इसके बाद सामग्री की भुनाई, पिसाई और छनाई की प्रक्रिया पूरी की जाती है। तैयार सामग्री को निर्धारित अनुपात में मिक्सिंग मशीन के माध्यम से मिलाया जाता है। मिश्रण तैयार होने के बाद उसकी पैकिंग की जाती है।

समूह द्वारा तैयार पोषण आहार का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त मांगपत्र के अनुसार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समूह की महिलाएं उत्पादन से लेकर पैकिंग और वितरण तक की जिम्मेदारी निभा रही हैं। इससे उन्हें खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अनुभव प्राप्त हो रहा है और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
हर महीने 50 हजार रुपये तक का मुनाफा, परिवारों को मिल रहा आर्थिक संबल

समूह की सदस्य श्रीमती चम्पा चौहान के अनुसार रेडी-टू-ईट पोषण आहार के निर्माण एवं वितरण से सरस्वती स्व-सहायता समूह को प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है। यह आय समूह की महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक बन रही है। नियमित आजीविका गतिविधि मिलने से महिलाओं में आर्थिक सुरक्षा की भावना बढ़ी है और वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्रिय योगदान दे रही हैं।

समूह की सफलता यह दर्शाती है कि महिलाओं को उचित अवसर, संस्थागत सहयोग और आजीविका के साधन उपलब्ध होने पर वे सामूहिक उद्यम के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर सकती हैं। बिहान योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को संगठित कर उन्हें उत्पादन आधारित गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को विस्तार दे रही है।

जिले के 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 10 महिला समूहों का चयन

रायगढ़ जिले में वर्तमान में कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण हेतु 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में पूरक पोषण आहार की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

चयनित महिला स्व-सहायता समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के अंतर्गत पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। इससे समूहों को खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों के संचालन और आवश्यक संसाधन विकसित करने में आर्थिक सहायता मिल रही है। शासन की यह पहल महिलाओं को केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उद्यमशीलता और आर्थिक प्रबंधन से जोड़ने का भी माध्यम बन रही है।

महिला सशक्तिकरण के साथ पोषण सुरक्षा की दिशा में दोहरा लाभ

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महिला सशक्तिकरण की पहल और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले में आजीविका संवर्धन के प्रयास ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण से जुड़ी महिलाएं अपनी मेहनत और सामूहिक प्रयासों से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं तक पूरक पोषण आहार पहुंचाने में भी योगदान दे रही हैं।

डूमरमुड़ा का सरस्वती स्व-सहायता समूह इस बात का उदाहरण है कि शासकीय योजनाओं और आजीविका के अवसरों का लाभ मिलने से ग्रामीण महिलाएं अपने कौशल एवं परिश्रम के बल पर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना सकती हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण की यह पहल महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण स्वरोजगार और पोषण सुरक्षा के उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!