November 3, 2026 8:56 pm

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कलेक्टर सौम्या झा का एआई मॉडल रात 3 बजे भी ऑन ड्यूटी

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की कार्यशैली में तकनीक का ऐसा अनूठा और क्रांतिकारी प्रयोग देखने को मिला है जिसने पारंपरिक नौकरशाही के सुस्त तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। राजस्थान के दौसा और टोंक जिलों में बतौर जिला कलेक्टर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाने वाली तेजतर्रार आईएएस अधिकारी डॉ. सौम्या झा (Dr. Saumya Jha) ने गवर्नेंस और शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉडल तैयार किया है, जो रात के 3 बजे भी पूरी तरह ‘ऑन ड्यूटी’ रहता है। इस आधुनिक तकनीक के कमाल से न केवल सरकारी स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधरा है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए अब किसी के जवाब का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है। आईएएस सौम्या झा के इस इन्नोवेटिव और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मॉडल की गूंज अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुकी है, और नीति आयोग (NITI Aayog) ने भी उनके इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने की मुहर लगा दी है।

#1. क्या है आईएएस सौम्या झा का वह AI मॉडल जो रात के वक्त भी रहता है एक्टिव?

आम तौर पर सरकारी महकमों में किसी भी रिपोर्ट, आंकड़े या डेटा के लिए मातहत अधिकारियों और शिक्षकों को कई-कई दिनों तक पत्राचार करना पड़ता है और जवाब का इंतजार करना होता है। लेकिन आईएएस सौम्या झा ने इस पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए ‘पढ़ाई विथ एआई’ (PadhaiWithAI) और डेटा-संचालित मॉनिटरिंग सिस्टम की परिकल्पना को जमीन पर उतारा। यह आधुनिक एआई मॉडल ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में बच्चों की कमजोरियों को चुटकियों में भांप लेता है। रात के 3 बजे हो या दिन का वक्त, यह सिस्टम रियल-टाइम डेटा अपडेट रखता है कि किस स्कूल में किस छात्र को गणित या अन्य विषयों में दिक्कत आ रही है। अधिकारियों और शिक्षकों को अपनी परफॉर्मेंस और प्रोग्रेस रिपोर्ट के लिए अब बाबूओं या दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, क्योंकि एआई आधारित यह तकनीक हर छात्र और शिक्षक का सटीक डेटा एक क्लिक पर उपलब्ध करा देती है।

#1. गणित के खौफ को ऐसे किया छूमंतर: छह हफ्तों में सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत पहुंचा 96.4%

इस तकनीकी क्रांति की शुरुआत सबसे पहले टोंक जिले से हुई थी, जहां सरकारी स्कूलों के बच्चों के मन में गणित विषय को लेकर एक अलग ही खौफ और डर था। कक्षा 10वीं के छात्र गणित में सबसे ज्यादा फेल होते थे। इस चुनौती से निपटने के लिए कलेक्टर सौम्या झा ने जब इस एआई लर्निंग प्लेटफॉर्म को लागू किया, तो चमत्कारिक परिणाम सामने आए। इस पोर्टल की खूबी यह है कि यह हर बच्चे के सीखने की गति को समझकर उसे व्यक्तिगत रूप से अभ्यास कराता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बच्चों के कमजोर कॉन्सेप्ट्स को तब तक अलग-अलग उदाहरणों से समझाता है जब तक कि वे पूरी तरह पारंगत न हो जाएं। इसका नतीजा यह हुआ कि महज छह हफ्तों के भीतर सरकारी स्कूलों का गणित का परीक्षा परिणाम उछलकर 96.4% तक जा पहुंचा, जिसने सभी शिक्षाविदों को हैरान कर दिया।

#1. नीति आयोग ने माना राष्ट्रीय मॉडल: अब देश के 50 से अधिक ब्लॉकों में लागू हो रहा है यह नवाचार

आईएएस सौम्या झा के इस सफल और दूरदर्शी प्रशासनिक प्रयोग की गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है। राजस्थान के टोंक के बाद जब उनका ट्रांसफर दौसा जिले में बतौर जिला कलेक्टर हुआ, तो उन्होंने वहां भी इस मॉडल को और अधिक व्यापक रूप से लागू किया। वर्तमान में दौसा के सैकड़ों सरकारी स्कूलों के हजारों विद्यार्थी इस हाई-टेक पोर्टल से जुड़कर अपनी पढ़ाई को आसान बना रहे हैं। उनकी इस असाधारण सफलता और प्रशासनिक पारदर्शिता को देखते हुए देश के नीति आयोग ने इस आइडिया को एक ‘राष्ट्रीय मॉडल’ के रूप में स्वीकार कर लिया है। नीति आयोग की देखरेख में अब इस मॉडल को देश के 50 चुनिंदा महत्वाकांक्षी ब्लॉकों में लागू किया जा रहा है, ताकि देश के दूरदराज के बच्चे भी आधुनिक तकनीक की मदद से अपनी शिक्षा को बेहतर बना सकें।

#1. नौकरशाही में तकनीक का बढ़ता दायरा: क्या साबित करता है यह मॉडल?

डॉ. सौम्या झा जैसी युवा और विजनरी महिला आईएएस अधिकारियों की यह पहल इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सीमित संसाधनों और सरकारी ढांचे के भीतर भी क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं। फाइलों के बोझ और लालफीताशाही में उलझने के बजाय जब टेक्नोलॉजी को गवर्नेंस का मुख्य हिस्सा बनाया जाता है, तो जनता तक योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी के पहुंचता है। रात के वक्त भी काम करने वाला यह एआई मॉडल और शिक्षा के स्तर में आया यह बदलाव आज देश भर के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका है।

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