
बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदल रही है तस्वीर नक्सल अंचलों में अब हर घर तक पहुंच रहा इलाज, 130 संस्थानों को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन
रायपुर, 4 अगस्त 2025
बस्तर की पहचान अब सिर्फ नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में नहीं रह गई है, बल्कि अब वह स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से भी देशभर में उदाहरण बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जिस प्रकार से स्वास्थ्य सेवाओं को निचले पायदान तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई गई है, वह अब जमीन पर दिखने लगा है। बीते डेढ़ वर्षों में बस्तर संभाग के 130 स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रमाणन (NQAS) प्राप्त होना इस परिवर्तन का ठोस प्रमाण है।
राज्य सरकार द्वारा संचालित नियद नेल्लानार योजना के तहत एक वर्ष में 6,816 हितग्राहियों को 8.22 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य सहायता दी जा चुकी है। आयुष्मान भारत योजना के तहत बस्तर में अब तक 36,231 नए कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे क्षेत्र में 52.6 प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया है। सरकार के अनुसार आने वाले महीनों में यह आंकड़ा 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
सरकार ने बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए 33 विशेषज्ञ डॉक्टर, 117 मेडिकल ऑफिसर, 1 डेंटल सर्जन और कुल 450 से अधिक चिकित्सा स्टाफ की नियुक्ति की है। साथ ही 291 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। यह सभी नियुक्तियाँ बस्तर की सेहत व्यवस्था को बुनियादी स्तर से मज़बूत कर रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर के दुर्गम अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना पहले असंभव माना जाता था, लेकिन मितानिनों, स्वास्थ्य कर्मियों और विभाग की टीम के सामूहिक प्रयास से अब यह हकीकत बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव सिर्फ योजनाओं से नहीं, बल्कि नीयत, रणनीति और समर्पित अमले से आया है।
बस्तर संभाग के कांकेर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य संस्थाओं को NQAS प्रमाणन मिलना यह दिखाता है कि अब शासन-प्रशासन की पहुंच उन इलाकों तक है, जहां एक समय सरकारी उपस्थिति भी असंभव मानी जाती थी। 65 अन्य संस्थाएं भी प्रमाणीकरण की प्रक्रिया में हैं, जिससे निकट भविष्य में यह संख्या और भी बढ़ेगी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जानकारी दी कि पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवा को समान स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर क्षेत्र में चलाए जा रहे मलेरिया मुक्त अभियान के ज़रिए घर-घर जाकर टेस्टिंग, इलाज और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे मलेरिया नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता मिली है।
राज्य सरकार की योजनाओं की प्रगति और ज़मीनी प्रभाव को जांचने के लिए स्वास्थ्य मंत्री 5 से 7 अगस्त तक बस्तर दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा सहित अन्य जिलों में स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करेंगे और स्थानीय व्यवस्थाओं का मूल्यांकन कर अगली रणनीति तय करेंगे।
मुख्यमंत्री साय की अगुवाई में जिस दृढ़ इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता के साथ बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, वह अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। बस्तर की वह छवि जो कभी पिछड़ेपन, असुविधा और हिंसा से जुड़ी थी, अब धीरे-धीरे स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास की दिशा में उभर रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह बदलाव न सिर्फ बस्तर के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक मिसाल बनता जा रहा है।








