रामघाट पर झिली सांस्कृतिक उजास, कथक की लय में डूबा चित्रकूट

चित्रकूट। संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से आयोजित साप्ताहिक सांस्कृतिक श्रृंखला “सुर साधना” के तहत  रामघाट स्थित मंदाकिनी तट पर कला एवं संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिली। अनुपमा त्रिपाठी के निर्देशन में गुरुकुल कथक साधना केंद्र, बाँदा के प्रतिभावान कलाकारों ने ऐसी अनुपम प्रस्तुतियाँ दीं कि पूरा घाट तालियों की गड़गड़ाहट से देर तक गूंजता रहा।

केंद्र की बाल कलाकार अधिरा गुप्ता, आन्या सिंह, अग्रिमा साहू, अनवी साहू, कोमल यादव, चंचल वर्मा और आरती यादव ने कथक एवं लोक नृत्य की श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। “जय जय जय शिव शंकर” की ऊँची, ऊर्जावान ध्वनि के साथ जब नृत्यांगनाओं ने मंच पर लय-ताल बिखेरी, तो समूचा मंदाकिनी तट शिव भक्ति और सौंदर्य की दिव्यता में डूब गया।

सांस्कृतिक संध्या के दौरान घाट पर कला-प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी रही। विशिष्ट अतिथियों में साधना त्रिपाठी, डॉ. गोपाल मिश्रा, नीतू सिंह, पार्थ उपाध्याय और जितेंद्र पटेल सहित सैकड़ों दर्शक उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम की मंच एवं ध्वनि व्यवस्था देवानंद शास्त्री द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संपन्न की गई। संचालन की जिम्मेदारी आशीष पांडे ने अपने प्रभावी अंदाज़ में निभाई।

सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल प्रतिभाओं का मंच बना, बल्कि चित्रकूट की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा देने का सफल प्रयास भी साबित हुआ।

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