Rewa,MP News :
रीवा। शहर में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित पुराने आवास में रहने वाले 65 वर्षीय सरोज दुबे ने साइबर ठगों की ब्लैकमेलिंग और मानसिक शोषण से तंग आकर आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने अपने पिता की लाइसेंसी 12 बोर बंदूक से खुद को गोली मारकर जान दे दी।
परिजनों के अनुसार, सरोज दुबे बीते कुछ दिनों से अत्यधिक तनाव में थे। उन्होंने कई बार इस बात का जिक्र किया था कि उन्हें अनजान कॉल और मैसेज आ रहे हैं, जिनमें उन्हें धमकाया जा रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों ने खुद को सरकारी अफसर और पुलिस अधिकारी बताकर दुबे से करीब ₹37,770 की ठगी की। रकम देने के बावजूद ब्लैकमेलिंग बंद नहीं हुई, बल्कि लगातार डराने-धमकाने का सिलसिला जारी रहा।
मानसिक दबाव में घिरते गए सरोज दुबे
दामाद उमेश गुप्ता उर्फ गुड्डू ने बताया कि ससुर जी पर ठगों ने मानसिक दबाव बना दिया था। कॉल्स में कहा जाता था कि उनके खिलाफ केस दर्ज हो गया है, पुलिस कभी भी घर पहुंच सकती है। परिवार के लोगों ने थाने में शिकायत की सलाह भी दी, लेकिन सरोज दुबे इतने टूट चुके थे कि उन्होंने खुद की जान ले ली।
दुबे के पिता मुन्नीलाल दुबे तहसीलदार के पद से रिटायर हुए थे। उन्हीं की लाइसेंसी बंदूक से सरोज दुबे ने आत्महत्या की। गोली की आवाज सुनते ही परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए।
थाना प्रभारी श्रंगेश राजपूत ने कहा कि घटना की बारीकी से जांच की जा रही है। साइबर ठगी से जुड़ी कॉल डिटेल्स, मोबाइल और लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रशासन पर सवाल, सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना ने रीवा में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर प्रशासन की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई नागरिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने इस आत्महत्या को गंभीर चेतावनी बताया है। उनका कहना है कि अगर समय रहते साइबर ठगों पर नकेल नहीं कसी गई, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
साइबर ठगों की मानसिक ब्लैकमेलिंग अब लोगों की जान ले रही है। यह सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक अपराध बन चुका है, जिस पर तत्काल रोक जरूरी है।
लोगों से अपील: डरें नहीं, शिकायत दर्ज कराएं
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि इस तरह की धमकी भरे कॉल या मैसेज आने पर डरें नहीं, बल्कि सीधे साइबर क्राइम सेल या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं। समय पर की गई कार्रवाई न सिर्फ रकम बचा सकती है, बल्कि जान भी।
यह घटना एक चेतावनी है कि साइबर अपराध सिर्फ डिजिटल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि मानसिक त्रासदी बन चुका है — और अब इसकी कीमत जान देकर चुकाई जा रही है।









