
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने डिजिटल इंडिया पहल और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने अपने से संबद्ध (Affiliated) देशभर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को एक विस्तृत एडवाइजरी जारी करते हुए पूरे स्कूल कैंपस में कैशलेस लेनदेन (Digital Transactions) को अनिवार्य रूप से प्रोत्साहित करने की सलाह दी है। नए निर्देशों के अनुसार, अब छात्रों के ट्यूशन फीस, एडमिशन चार्ज, लाइब्रेरी फाइन, स्कूल कैंटीन, स्पोर्ट्स एक्टिविटी से लेकर यूनिफॉर्म और किताबों की खरीदारी तक सभी प्रकार के भुगतानों को डिजिटल माध्यमों पर शिफ्ट करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्कूल परिसरों में नकदी के इस्तेमाल को न्यूनतम करना और छात्रों व अभिभावकों को सुरक्षित व पारदर्शी वित्तीय प्रणाली से जोड़ना है।
सीबीएसई द्वारा जारी परिपत्र में विशेष रूप से स्वदेशी डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसे एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI), भीम ऐप (BHIM) और रूपे (RuPay) डेबिट व क्रेडिट कार्ड को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे अपने प्रशासनिक कार्यालयों, फीस काउंटरों, खेल परिसरों और स्कूल कैंटीनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड (QR Codes) और पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) मशीनें स्थापित करें। इससे अभिभावकों और वरिष्ठ छात्रों को छोटे-बड़े भुगतानों के लिए खुले पैसे या कैश रखने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी और सीधे बैंक-टू-बैंक सुरक्षित लेनदेन सुनिश्चित हो सकेगा।
सीबीएसई का मानना है कि नकद लेन-देन में हिसाब-किताब रखने में समय लगने के साथ-साथ ऑडिट संबंधी विसंगतियां और नकदी खोने या चोरी होने का जोखिम बना रहता है। डिजिटल भुगतान लागू होने से स्कूलों की वित्तीय प्रणाली पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत और पारदर्शी होगी।
तत्काल डिजिटल रसीद: फीस जमा होते ही अभिभावकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पर तुरंत ई-रसीद (Digital Receipt) जारी होगी, जिससे कागजी रसीदों के खोने का झंझट समाप्त होगा।
समय की बचत: फीस जमा करने के लिए बैंकों या स्कूल काउंटरों पर लंबी कतारों में लगने वाले अभिभावकों के समय की बचत होगी।
ऑडिट में सुगमता: स्कूलों की आय-व्यय का सटीक रियल-टाइम रिकॉर्ड रहने से वार्षिक ऑडिट प्रक्रिया बेहद सुगम और पारदर्शी बनेगी।
सीबीएसई की एडवाइजरी में स्कूल कैंटीन और परिसर में चलने वाले स्टेशनरी व बुक काउंटर्स पर विशेष ध्यान दिया गया है। आमतौर पर छात्र कैंटीन में स्नैक्स और स्टेशनरी खरीदने के लिए नकदी का इस्तेमाल करते हैं, जहां अक्सर खुले पैसों (चेंज) को लेकर समस्या होती है। बोर्ड ने सुझाव दिया है कि स्कूल प्रबंधन कैंटीन में डिजिटल पेमेंट गेटवे, स्मार्ट आईडी कार्ड (Prepaid Campus Cards) या यूपीआई क्यूआर कोड की व्यवस्था करें। इसके अतिरिक्त, छात्रों को वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूलों में ‘डिजिटल पेमेंट अवेयरनेस’ अभियान और वर्कशॉप आयोजित करने की भी सलाह दी गई है, ताकि वे साइबर फ्रॉड और सुरक्षित बैंकिंग के बुनियादी नियमों को समझ सकें।
हालांकि सीबीएसई ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने का स्पष्ट आह्वान किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि ग्रामीण या सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले इलाकों में स्थित स्कूलों में अभिभावकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। जब तक डिजिटल ढांचा पूरी तरह सुदृढ़ नहीं होता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पारंपरिक भुगतान विधियां (जैसे नेट बैंकिंग, डिमांड ड्राफ्ट या सीमित नकद विकल्प) भी समानांतर रूप से उपलब्ध रहेंगी। बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि स्कूल प्रबंधन इस बदलाव को सुगम और सहयोगात्मक तरीके से लागू करें ताकि यह अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए एक सकारात्मक अनुभव साबित हो।
















