CG : ’आस्था, स्वाभिमान और संस्कृति का भव्य संगम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गूंजा ‘हर-हर महादेव”

CG : ’आस्था, स्वाभिमान और संस्कृति का भव्य संगम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गूंजा ‘हर-हर महादेव”

’ज्वालेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भजन संध्या ने बांधा समां, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल’

रायपुर, 12 मई 2026

’आस्था, स्वाभिमान और संस्कृति का भव्य संगम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गूंजा 'हर-हर महादेव''

’आस्था, स्वाभिमान और संस्कृति का भव्य संगम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गूंजा 'हर-हर महादेव''

अटूट आस्था, सनातन संस्कृति और राष्ट्र गौरव के प्रतीक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के 1000 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्रशासन द्वारा विकासखंड गौरेला के तवाडबरा स्थित ज्वालेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सोमवार को भव्य भजन संध्या एवं धार्मिक आयोजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विधायक श्री प्रणव कुमार मरपच्ची, जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

’आस्था, स्वाभिमान और संस्कृति का भव्य संगम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गूंजा 'हर-हर महादेव''

विधायक एवं कलेक्टर ने ज्वालेश्वर महादेव से जिलेवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से सराबोर कर दिया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना को केंद्र में रखकर आयोजित भजन संध्या में भक्ति और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध भजन गायक साजन पाठक, मीनाक्षी केशवानी एवं कीर्ति कुसरो ने शिव भक्ति से ओतप्रोत भजनों की मनमोहक प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। देर रात तक चले भक्ति संगीत में श्रद्धालु झूमते रहे और पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजता रहा।

इस अवसर पर कलेक्टर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास, सनातन संस्कृति की मजबूती तथा भारतीय सभ्यता की अखंडता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में धार्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता के संदेश से ओतप्रोत यह आयोजन क्षेत्रवासियों के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया।

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