Inflation-
MP/CG। मानसून की पहली बारिश ने भले ही गर्मी से राहत दी हो, लेकिन अब रसोई का तापमान बढ़ा दिया है। लगातार बारिश ने स्थानीय सब्जियों की आपूर्ति ठप कर दी है, जिससे थाली से सब्जियां एक-एक कर गायब हो रही हैं। सब्जी मंडियों में टमाटर से लेकर करेला और भिंडी तक के दाम आसमान छू रहे हैं।

🍅 सब्जियों की ‘लाल’ मार
- टमाटर: 45 रुपये/किलो तक
- करेला: 50 रुपये/किलो
- भिंडी: 35 रुपये/किलो
जहां टमाटर एक हफ्ते पहले 30 रुपये में मिल रहा था, वहीं अब फुटकर में 40 से 45 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। भिंडी, जो दो दिन पहले तक 20 रुपये किलो में भी नहीं बिक रही थी, अब 35 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। करेला भी 50 रुपये किलो के आसपास बिक रहा है।
🌶️ मसाले भी कर रहे आंखों में आंसू
- लहसुन: 110 रुपये/किलो
- अदरक: 45 रुपये/किलो
- धनिया: लगातार बढ़ते भाव
पिछले दो दिनों में लहसुन के दाम 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं, जबकि अदरक और धनिया के दामों में भी तेजी बरकरार है।
🚛 बाहरी राज्यों से आवक, बढ़ी लागत
- टमाटर: कर्नाटक से
- प्याज: मैहर और खंडवा से
- आलू: प्रयागराज और आगरा से
स्थानीय फसलें खराब होने से राज्यों पर निर्भरता बढ़ गई है। परिवहन और बिचौलियों की लागत जुड़ने से थोक और फुटकर के बीच का अंतर बढ़ रहा है।
🧅🥔 प्याज-आलू भी नहीं बचे
- आलू: 25 रुपये/किलो
- प्याज: 20-22 रुपये/किलो
5 से 10 रुपये प्रति किलो की तेजी ने आलू-प्याज को भी महंगा कर दिया है। थोक कारोबारी चेतावनी दे रहे हैं कि अगले कुछ दिनों में इनके दामों में और इजाफा हो सकता है।
📉 हर थाली से सब्जियां कम, चिंता ज्यादा
बारिश से उत्पादन प्रभावित, आवक घट गई और महंगाई ने आम आदमी की जेब ढीली कर दी।
सब्जियों का बजट बेकाबू हो गया है और रसोई में अब हर सब्जी ‘सोच-समझकर’ बन रही है।








