September 17, 2026 4:24 am

BREAKING NEWS

सिर्फ ₹3,000 की मंथली SIP से तैयार होगा ₹57 लाख का फंड: 10, 15, 20 और 25 साल में कंपाउंडिंग का पूरा गणित पितरों की आत्मा की तृप्ति का महाउपाय: पितृ पक्ष में क्यों जरूरी है पंचबलि कर्म, 5 जीवों को भोजन देने का रहस्य पीएम आवास योजना में बड़ा बदलाव: कट-ऑफ डेट बढ़कर हुई 31 अगस्त 2024, सिर्फ ₹75 हजार में मिलेगा पक्का मकान मध्यप्रदेश में स्थापित होगी सीमेंस एनर्जी इंडिया की बड़ी पॉवर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बड़ा सुधार: प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर पहुंची शून्य पर। विश्वकर्मा जयंती 2026: घर बैठे इन 5 मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की करें पूजा, साल भर बरसेगा धन और कारोबार में तरक्की

Kanya Sankranti 2026 Date: सूर्य देव का कन्या राशि में महाप्रवेश, 17 सितंबर को मनेगी कन्या संक्रांति; करियर में मनचाही तरक्की

सनातन पंचांग और वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के राजा, आत्मा, यश, कीर्ति और उच्च प्रशासनिक पद के कारक भगवान भुवन भास्कर यानी सूर्य देव का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश ‘संक्रांति’ कहलाता है। 16 सितंबर 2026 की मध्यरात्रि के उपरांत (17 सितंबर तड़के 01:14 AM पर) सूर्य देव अपनी स्वराशि सिंह (Leo) की यात्रा पूर्ण कर अपने परम मित्र बुध की राशि कन्या (Virgo) में संचरण कर रहे हैं। इस खगोलीय परिवर्तन को शास्त्रों में ‘कन्या संक्रांति’ (Kanya Sankranti) कहा गया है। चूंकि सूर्य देव का संक्रांति काल 16-17 सितंबर की रात में लग रहा है, इसलिए उदयातिथि और शास्त्रों के नियमानुसार कन्या संक्रांति का महापर्व, पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य अर्घ्य और महापुण्यकाल का विशेष अनुष्ठान गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को ही विधिवत मनाया जाएगा।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और बुध का यह मिलन कन्या राशि में शुभ ‘बुधादित्य राजयोग’ का निर्माण करता है, जो बुद्धि, विवेक, तार्किक क्षमता और व्यापार में विस्तार का मार्ग प्रशस्त करता है। ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, संक्रांति के पावन दिन सूर्य देव की विशेष आराधना करने से जातक की जन्मकुंडली में स्थित कमजोर सूर्य बलवान होता है, पिता के साथ संबंधों में मधुरता आती है और कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का वरदहस्त प्राप्त होता है।

शास्त्रों के अनुसार, संक्रांति के समय सूर्य स्नान और दान-पुण्य केवल पुण्यकाल या महापुण्यकाल के दौरान ही फलदायी होता है। कन्या संक्रांति पर 17 सितंबर 2026 के लिए शुभ मुहूर्तों का प्रामाणिक विवरण इस प्रकार है:

संक्रांति एवं मुहूर्त विवरण निर्धारित समय (17 सितंबर 2026) धार्मिक महत्व एवं अनुष्ठान
सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश 16-17 सितंबर रात्रि 01:14 AM संक्रांति का संक्रमण क्षण
कन्या संक्रांति पुण्य काल प्रातः 06:07 AM से दोपहर 12:22 PM तक पवित्र नदी स्नान, तर्पण और सामान्य दान
कन्या संक्रांति महापुण्य काल प्रातः 06:07 AM से सुबह 08:12 AM तक सूर्य अर्घ्य, विशेष हवन, स्वर्ण/तांबा दान व स्तोत्र पाठ
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 AM से दोपहर 12:40 PM तक विजय और नए कार्यों के शुभारंभ के लिए श्रेष्ठ
राहुकाल (त्याज्य समय) दोपहर 01:52 PM से 03:24 PM तक इस दौरान शुभ या धार्मिक कार्य न करें

महापुण्यकाल की कुल अवधि 2 घंटे 5 मिनट की है। शास्त्रों में कहा गया है कि महापुण्यकाल के भीतर किया गया एक अंजलि जल तर्पण और एक मुट्ठी अन्न का दान सामान्य दिनों के हजारों गुना दान के बराबर पुण्य फल प्रदान करता है।

यदि आप लंबे समय से मनचाही नौकरी, प्रमोशन, सरकारी नौकरी की परीक्षा में सफलता या व्यापार में विस्तार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो 17 सितंबर को कन्या संक्रांति के महापुण्यकाल (सुबह 06:07 AM से 08:12 AM) के दौरान इन 4 वैदिक उपायों को अवश्य अपनाएं:

1. तांबे के पात्र से त्रि-अर्घ्य और द्वादश नाम स्मरण

कन्या संक्रांति के दिन प्रातः सूर्योदय के समय शुद्ध तांबे के लोटे में ताजा जल भरें। उसमें चुटकी भर कुमकुम (रोली), अक्षत (अखंडित चावल), थोड़ा सा गुड़ और लाल कनेर या गुड़हल का फूल डालें। दोनों हाथों को अपने सिर से ऊपर उठाकर सूर्य देव की ओर मुख करके जल की पतली धार गिराते हुए अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय जल की धार के बीच से उगते हुए सूर्य के दर्शन करें और भगवान सूर्य के 12 नामों—ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ मरीचये नमः, ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः—का उच्चारण करें। जल भूमि पर पैरों में न लगे, इसके लिए नीचे कोई तांबे या पीतल की थाली रख लें और बाद में उस जल को किसी पौधे या तुलसी के क्यारे में अर्पित कर दें। यह उपाय आत्मबल और नेतृत्व क्षमता को कई गुना बढ़ाता है।

2. वाल्मीकि रामायण रचित ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का तीन बार पाठ

भगवान सूर्य देव को प्रसन्न करने और जीवन से अज्ञात भय, कोर्ट-कचहरी के विवाद व कार्यक्षेत्र की राजनीति से मुक्ति पाने के लिए ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ अचूक माना गया है। लंका विजय से पूर्व जब भगवान श्रीराम युद्धभूमि में खड़े थे, तब महर्षि अगस्त्य ने उन्हें इसी स्तोत्र के पाठ का उपदेश दिया था। कन्या संक्रांति के महापुण्यकाल में पूर्व दिशा की ओर लाल ऊनी आसन पर बैठकर घी का दीपक प्रज्वलित करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का शांत मन से 3 बार पाठ करें। यह उपाय नौकरी में ट्रांसफर, प्रमोशन की रुकावटों को समाप्त करता है और करियर को नई ऊंचाई प्रदान करता है।

3. सूर्य की कारक वस्तुओं का महादान (गुड़, गेहूं, तांबा और लाल वस्त्र)

शास्त्रों में कहा गया है कि संक्रांति का दिन बिना दान के अधूरा रहता है। कन्या संक्रांति के दिन सूर्य ग्रह की शांति के लिए सवा किलो साबुत गेहूं, सवा किलो गुड़, तांबे का एक बर्तन (जैसे लोटा या कटोरी), लाल चंदन और लाल रंग का वस्त्र किसी योग्य ब्राह्मण, पुरोहित या जरूरतमंद व्यक्ति को आदरपूर्वक दान करें। यदि संभव हो तो इस दिन किसी गोशाला में जाकर गाय को अपने हाथों से गुड़ और गेहूं की दलिया या मीठी रोटी खिलाएं। गाय की सेवा से सूर्य के साथ-साथ सभी नवग्रहों की अनुकूलता प्राप्त होती है और कुंडली का ‘पितृ दोष’ व ‘सूर्य दोष’ शांत होता है।

4. पिता के चरण स्पर्श और गायत्री मंत्र का 108 बार जप

वैदिक ज्योतिष में सूर्य देव को पिता, पूर्वज और सत्ता का प्रतीक माना गया है। जो व्यक्ति अपने पिता का अनादर करता है, उसका सूर्य कभी भी शुभ फल नहीं दे सकता। कन्या संक्रांति के दिन प्रातः स्नान के उपरांत सबसे पहले अपने पिता, बाबा या पिता तुल्य किसी भी बुजुर्ग के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें कोई उपहार भेंट करें। इसके उपरांत रुद्राक्ष या तुलसी की माला से महामंत्र ‘ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्’ का कम से कम 108 बार जप करें। यह उपाय बौद्धिक तीक्ष्णता, एकाग्रता और सकारात्मक आभा (Aura) को मजबूत करता है।

संक्रांति के पावन दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है:

  • सात्विकता का पालन: इस दिन घर में पूर्ण सात्विक वातावरण बनाए रखें। तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) का पूरी तरह परित्याग करें।

  • नमक का त्याग (अलोना व्रत): संभव हो तो संक्रांति के दिन दिनभर बिना नमक का भोजन करें अथवा सूर्यास्त के बाद ही केवल एक समय सेंधा नमक युक्त सात्विक फलाहार ग्रहण करें। संक्रांति पर नमक का त्याग करने से त्वचा और नेत्र रोगों से रक्षा होती है।

  • देर तक सोने से बचें: सूर्य संक्रांति के दिन सूर्योदय के बाद तक सोना शास्त्रों में दरिद्रता का कारण माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान पूर्ण कर लें।

  • क्रोध और कटु वचनों पर नियंत्रण: चूंकि सूर्य कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं और बुध वाणी के स्वामी हैं, इसलिए इस दिन किसी भी अधीनस्थ कर्मचारी, मजदूर या परिजन पर क्रोध न करें और कटु वाणी का प्रयोग करने से बचें।

17 सितंबर 2026 को कन्या संक्रांति के इस दुर्लभ खगोलीय संयोग और महापुण्यकाल का लाभ उठाकर सूर्य देव की आराधना करें। श्रद्धा और निष्ठा से किए गए ये 4 उपाय आपके जीवन से अंधकार, आलस्य और बाधाओं को मिटाकर तेज, आरोग्य और सफलता का प्रकाश फैलाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!