
शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे मकानों में गुजर-बसर करने वाले गरीब परिवारों के अपने पक्के घर के सपने को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के पात्रता नियमों में ढील देते हुए निवास की वैधता साबित करने वाली कट-ऑफ तारीख को 31 अगस्त 2015 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2024 कर दिया है। इस नीतिगत संशोधन से शहरों में पिछले कई वर्षों से रह रहे हजारों उन निम्न आय वर्ग (EWS) परिवारों को लाभ मिलेगा, जो पहले कट-ऑफ सीमा के कारण पक्के मकान की पात्रता से बाहर हो गए थे।
बढ़ती शहरी आबादी, लगातार हो रहे प्रवासन और किफायती आवास की बढ़ती मांग को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार के ‘अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप’ (AHP) मॉडल के तहत यह राहत दी जा रही है, जिससे राज्य के विभिन्न नगर निगमों और नगर पालिकाओं में लंबे समय से रह रहे जरूरतमंदों को सीधे कानूनी और स्थायी मालिकाना हक मिल सकेगा।
इस योजना के तहत वित्तीय ढांचे को इस तरह तैयार किया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर कोई भारी वित्तीय बोझ न पड़े। एक पक्के मकान की कुल निर्माण लागत में केंद्र और राज्य दोनों सरकारें मिलकर बड़ी सब्सिडी दे रही हैं:
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केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक मदद: ₹1.50 लाख प्रति आवास
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छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का अनुदान: ₹2.50 लाख प्रति आवास
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लाभार्थी का अपना अंशदान: मात्र ₹75,000
गरीब परिवारों की सहूलियत के लिए इस ₹75,000 की मामूली राशि को भी एकमुश्त जमा करने की बाध्यता नहीं रखी गई है, बल्कि इसे आसान किस्तों में चुकाने की छूट दी गई है। इसके अलावा जो परिवार यह रकम नकद देने में असमर्थ हैं, उन्हें स्थानीय बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के जरिए बहुत ही मामूली ब्याज दरों पर माइक्रो-फाइनेंस व लोन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
पूर्व में लागू नियमों के तहत केवल वही नागरिक पीएम आवास (शहरी) के तहत आवास आवंटन के लिए पात्र माने जाते थे, जो 31 अगस्त 2015 या उससे पहले से शहर में अपने निवास का प्रमाण प्रस्तुत कर सकते थे। इस सख्त समय-सीमा की वजह से 2015 के बाद काम-धंधे, मजदूरी या रोजगार की तलाश में शहरों में आकर बसे लाखों गरीब परिवार योजना के लाभ से वंचित रह जाते थे।
अब कट-ऑफ तिथि को 31 अगस्त 2024 किए जाने के बाद, 31 अगस्त 2024 तक संबंधित शहरी निकाय क्षेत्र में रहने वाले सभी पात्र EWS परिवार अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इसके लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी, बिजली का बिल या स्थानीय निकाय द्वारा जारी कोई भी मान्य निवास प्रमाण पत्र स्वीकार किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल चारदीवारी खड़ी करने का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि एक सुव्यवस्थित और आधुनिक कॉलोनी के रूप में पूरे आवासीय परिसर का विकास किया जा रहा है। प्रत्येक आवास के साथ 24 घंटे नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, निर्बाध बिजली कनेक्शन, पक्की सड़कें, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था की जा रही है।
इसके अलावा बच्चों के खेलने के लिए पार्क, सामुदायिक भवन (कम्युनिटी हॉल) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी नागरिक सुविधाएं भी इन कॉलोनियों में विकसित की जा रही हैं, ताकि झुग्गी बस्तियों से निकलकर पक्के मकानों में आने वाले परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।
आवास निर्माण की गति को लेकर जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में अब तक 36,969 मकानों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से 29,267 मकान पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 7,702 मकानों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
प्रशासन द्वारा अब तक 30,438 मकानों का आवंटन पात्र परिवारों को किया जा चुका है और 21,923 परिवार अपने नए पक्के घरों में गृह प्रवेश कर सुकून से रहने भी लगे हैं। राज्य के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे संशोधित कट-ऑफ नियमों का पालन करते हुए अगले 15 दिनों के भीतर नए पात्र लाभार्थियों के सत्यापन और सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी करें।









