Mauganj News:मऊगंज में बोरिंग माफिया बेलगाम! प्रतिबंध सिर्फ कागजों में, जमीन पर खुला खेल जारी

Mauganj News:मऊगंज में बोरिंग माफिया बेलगाम! प्रतिबंध सिर्फ कागजों में, जमीन पर खुला खेल जारी

मऊगंज। जिले में भूजल संरक्षण को लेकर प्रशासनिक सख्ती के दावे भले किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। कलेक्टर के प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद मऊगंज में बोरिंग मशीनों का संचालन थमने का नाम नहीं ले रहा। उल्टा स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी रफ्तार से नए बोर किए जा रहे हैं।

आरोप है कि प्रतिबंध का सबसे बड़ा नुकसान आम आदमी झेल रहा है। जरूरतमंद लोग नियमों और अनुमति के चक्कर में फंसे रहते हैं, जबकि दूसरी ओर कथित तौर पर दलालों और बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय होकर “परमिशन” और “सेटिंग” के नाम पर मोटी रकम वसूल रहा है। स्थानीय चर्चाओं में यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस खेल से होने वाली कमाई कुछ प्रभावशाली लोगों, कथित बिचौलियों और जिम्मेदार तंत्र तक पहुंच रही है।

हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि दिन में प्रशासनिक सख्ती का माहौल दिखता है, लेकिन रात होते ही कई इलाकों में चोरी-छुपे बोरिंग मशीनें सक्रिय हो जाती हैं। धरती का सीना चीरने का यह खेल खुलेआम जारी है, जबकि प्रशासनिक आदेश सिर्फ नोटिस बोर्ड और फाइलों तक सीमित नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि गिरते भूजल स्तर और संभावित जल संकट को देखते हुए बिना अनुमति बोरिंग पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद यदि लगातार बड़ी संख्या में बोरिंग हो रही है तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन मशीनों को संरक्षण कौन दे रहा है? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं, या फिर कार्रवाई की इच्छाशक्ति का अभाव है?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इसी तरह अंधाधुंध बोरिंग जारी रही तो आने वाले समय में मऊगंज गंभीर जल संकट की चपेट में आ सकता है। एक ओर आम लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर नियमों को धता बताकर भूजल का लगातार दोहन किया जा रहा है।

लोगों ने मांग की है कि प्रशासन केवल आदेश जारी कर औपचारिकता पूरी न करे, बल्कि रात में औचक निरीक्षण, मशीनों की जब्ती और पूरे नेटवर्क की जांच कर वास्तविक कार्रवाई करे। साथ ही “परमिशन” के नाम पर वसूली करने वाले कथित दलालों और उनके संरक्षकों की भी जांच हो।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या मऊगंज में बोरिंग माफिया पर नकेल कसी जाएगी, या फिर प्रतिबंधात्मक आदेश हर साल की तरह इस बार भी सिर्फ कागजों में ही सीमित रह जाएगा?

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