March 12, 2026 9:55 am

Mauganj: कवयित्री सड़क हादसे में गंभीर, आईसीयू में जिंदगी की जंग

Mauganj News:

रीवा/मऊगंज।
विंध्य की उभरती हुई युवा कवयित्री और साहित्य जगत का जाना-पहचाना नाम, स्नेहा त्रिपाठी इन दिनों जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। 20 वर्षीय स्नेहा 10 सितंबर को सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं। उन्हें रीवा के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

हादसा मऊगंज के पास, बैल से टकराई बाइक

स्नेहा त्रिपाठी मऊगंज जिले के सूजी उमरी गांव स्थित डाकघर में ब्रांच पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत हैं। हादसा उस समय हुआ जब वह अपने एक साथी कर्मचारी के साथ बाइक से घर लौट रही थीं। मऊगंज के रामपुरवा हटवा गांव के पास अचानक सामने आए बैल से टकराने पर बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। इस दुर्घटना में स्नेहा के सिर पर गहरी चोटें आईं, जबकि उनके साथी कर्मचारी का हाथ फ्रैक्चर हो गया।

भोपाल सम्मेलन में होने वाला था सम्मान

14 सितंबर को भोपाल के कवि कुम्भ सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा स्नेहा को सम्मानित किया जाना था। लेकिन उससे ठीक पहले यह हादसा हो गया। इस कारण वह सम्मेलन में शामिल नहीं हो सकीं। साहित्य जगत का कहना है कि यह न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे विंध्य के लिए दुखद क्षण है।

परिवार की आर्थिक स्थिति नाजुक

स्नेहा के पिता सुखेंद्र कुमार त्रिपाठी शिक्षक हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार का कहना है कि इलाज पर लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं और आर्थिक बोझ संभालना बेहद मुश्किल हो रहा है। उन्होंने शासन-प्रशासन और समाज से मदद की अपील की है।

साहित्य जगत में बनाई पहचान

कम उम्र में ही स्नेहा त्रिपाठी ने साहित्यिक मंचों पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है। दूरदर्शन, आकाशवाणी और कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। खासतौर पर श्रृंगार रस की कविताओं से उन्होंने विंध्य की प्रतिनिधि कवयित्री के रूप में पहचान बनाई।

दुआओं का दौर जारी

साहित्यकारों और शुभचिंतकों का कहना है कि स्नेहा बेहद प्रतिभाशाली कवयित्री हैं। साहित्यकार आशीष तिवारी निर्मल ने बताया कि बचपन से ही कविता में उनकी गहरी रुचि रही है और विद्यालयीन मंचों से शुरुआत कर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर तक ख्याति अर्जित की है। भोपाल में 14-15 सितंबर को आयोजित मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी सम्मेलन में उनकी उपस्थिति तय थी, लेकिन हादसे ने सब बदल दिया।

पूरे विंध्य अंचल और साहित्य जगत में उनके स्वस्थ होने की दुआएं की जा रही हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि स्नेहा जल्द ही ठीक होकर फिर से अपनी कविताओं से प्रदेश और देश का मान बढ़ाएंगी।


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