March 11, 2026 11:03 pm

Rewa-टीआरएस कॉलेज हत्याकांड में कोर्ट का फैसला: तीन को उम्रकैद, तीन बरी, छह साल बाद मिला न्याय

Rewa News :

रीवा। साल 2018 में टीआरएस कॉलेज परिसर में हुए नितिन सिंह गहरवार हत्याकांड में जिला अदालत ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस बहुचर्चित केस में कुल छह आरोपियों पर मुकदमा चला था, जिनमें से तीन को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास दिया गया, जबकि तीन अन्य को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया


क्या था मामला?: कॉलेज कैंपस में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या

घटना साल 2018 में रीवा के प्रतिष्ठित टीआरएस कॉलेज परिसर में हुई थी, जहां नितिन सिंह गहरवार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
घटना के वक्त शहर में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। टीआई अरुण सोनी के नेतृत्व में तत्कालीन सिविल लाइंस पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।

सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी। इस घटना ने न सिर्फ रीवा, बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया था।


एफआईआर और कानूनी प्रक्रिया

घटना के तुरंत बाद एफआईआर क्रमांक 236/18 दर्ज की गई। पुलिस ने गहन जांच करते हुए छह आरोपियों को नामजद किया और उनके खिलाफ IPC की धारा 302 (हत्या), 120-B (आपराधिक साजिश), 109, 176, 212, और 33 के तहत केस दर्ज किया गया।

लंबी कानूनी प्रक्रिया, साक्ष्य संग्रह, गवाहों की पेशी और गहन बहस के बाद अदालत ने इस संवेदनशील मामले में अपना फैसला सुनाया।


तीन दोषी, तीन बरी – यह रहा कोर्ट का निष्कर्ष

उम्रकैद की सजा पाने वाले आरोपी –

  1. मयंक संग्राम सिंह – मुख्य आरोपी, जिसे हत्या के लिए जिम्मेदार पाया गया
  2. सत्यम सिंह – हत्या में सक्रिय भूमिका, कोर्ट ने दोषी माना
  3. वैभव सिंह – साजिश और अपराध में शामिल, दोषसिद्ध कर उम्रकैद

बरी किए गए आरोपी –

  1. मुन्नू
  2. देवेंद्र
  3. दिवाकर
    उपरोक्त तीनों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव और संदेह का लाभ मिलने पर कोर्ट ने दोषमुक्त किया।

फैसले का महत्व: न्याय की दिशा में मील का पत्थर

अदालत का यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को राहत देता है, बल्कि यह शैक्षणिक परिसरों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर प्रशासन को चेतावनी भी देता है।
इस निर्णय से स्पष्ट हुआ है कि साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों को सजा और निर्दोषों को राहत मिलनी ही चाहिए।


समाज और शिक्षा संस्थानों के लिए एक संदेश

यह मामला केवल एक हत्या नहीं था, बल्कि यह दर्शाता है कि शैक्षणिक परिसरों में बढ़ती गुटबाजी, राजनैतिक हस्तक्षेप और असुरक्षा का माहौल अब चिंताजनक रूप ले चुका है।
इस घटना ने प्रशासन, कॉलेज प्रबंधन और पुलिस को अपने स्तर पर व्यवस्था दुरुस्त करने का अवसर और चेतावनी दोनों दी है।


 

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