September 19, 2026 10:19 am

Severe Period Pain Warning: पीरियड्स में होने वाले असहनीय दर्द को सामान्य समझकर न करें नजरअंदाज! शरीर में पनप रही हो सकती हैं ये 4 गंभीर बीमारियां, तुरंत पहचानें लक्षण

माहवारी (Menstruation) के दौरान पेट के निचले हिस्से और कमर में हल्का खिंचाव या ऐंठन महसूस होना एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है। गर्भाशय की आंतरिक परत को बाहर निकालने के लिए जब मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, तो ‘प्रोस्टाग्लैंडिंस’ (Prostaglandins) हार्मोन के कारण हल्का दर्द होता है। किंतु समाज में वर्षों से यह रूढ़िवादी धारणा बनी हुई है कि “पीरियड्स में तो दर्द होता ही है, इसे बर्दाश्त करना सीखो।” इसी सोच के चलते लाखों महिलाएं हर महीने होने वाले असहनीय और जानलेवा दर्द को सामान्य मानकर चुपचाप सहती रहती हैं या बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर्स खाकर काम चलाती हैं।

स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) का स्पष्ट कहना है कि यदि दर्द इतना तीव्र है कि वह आपके सामान्य दैनिक कामकाज, ऑफिस जाने या कॉलेज की दिनचर्या को पूरी तरह ठप कर दे, तो इसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। यह तेज दर्द जिसे मेडिकल भाषा में ‘सेकेंडरी डिस्मेनोरिया’ (Secondary Dysmenorrhea) कहा जाता है, गर्भाशय और प्रजनन अंगों में पनप रही किसी छिपी हुई गंभीर बीमारी का स्पष्ट अलार्म हो सकता है।

असहनीय पीरियड पेन का सबसे प्रमुख कारण एंडोमेट्रियोसिस होता है, जो दुनिया भर में 10 में से 1 महिला को प्रभावित करता है।

  • क्या होता है इसमें: गर्भाशय के अंदर बनने वाली एंडोमेट्रियम जैसी परत जब गर्भाशय से बाहर—फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय (Ovaries), आंतों या पेल्विक टिश्यूज पर उगने लगती है।

  • लक्षण: माहवारी के दौरान पेट, पीठ और पैरों में हड्डियों तक जाने वाला तेज दर्द, पेशाब या मल त्यागते समय चुभन, इंटरकोर्स के दौरान अत्यधिक दर्द और लंबे समय तक बच्चा ठहरने में दिक्कत (बांझपन या Infertility का खतरा)।

  • चुनौती: शुरुआती स्तर पर सोनोग्राफी में यह आसानी से नहीं दिखता, जिसके चलते इसे डायग्नोज होने में औसतन 7 से 8 साल लग जाते हैं।

फाइब्रॉएड गर्भाशय की दीवार में विकसित होने वाले गैर-कैंसरयुक्त (Non-cancerous) ट्यूमर या मांस की गांठें होती हैं।

  • दबाव और ऐंठन: जैसे-जैसे इन फाइब्रॉएड्स का आकार बढ़ता है, ये गर्भाशय की मांसपेशियों पर लगातार दबाव डालते हैं, जिससे पीरियड्स के दौरान गर्भाशय में भयानक ऐंठन और संकुचन पैदा होता है।

  • भारी रक्तस्राव (Heavy Bleeding): फाइब्रॉएड के कारण पीरियड्स 7 से 10 दिनों से अधिक खिंच सकते हैं, खून के बड़े-बड़े थक्के (Blood Clots) गिरते हैं और महिलाओं में गंभीर एनीमिया (खून की कमी) हो जाती है। इसके अलावा पेल्विक एरिया में हर समय भारीपन बना रहता है।

यह समस्या अक्सर 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है।

  • दीवारों में आंतरिक फैलाव: इस बीमारी में गर्भाशय की आंतरिक परत (Endometrium) गर्भाशय की बाहरी मांसपेशियों की दीवार (Myometrium) के भीतर घुसकर बढ़ने लगती है।

  • पहचान: इसके कारण गर्भाशय सामान्य आकार से दोगुना या तिगुना सूजकर बड़ा हो जाता है। पीरियड्स के दौरान न केवल पेट में तेज दबाव और ऐंठन होती है, बल्कि पूरे महीने पेल्विक हिस्से में एक धीमा-धीमा खिंचाव और दर्द बना रहता है।

पीआईडी महिला प्रजनन अंगों (गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय) में फैलने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है।

  • संक्रमण का असर: अक्सर यौन संचारित संक्रमण (STIs) या योनि के सामान्य बैक्टीरिया के ऊपर फैलने से यह सूजन होती है।

  • लक्षण: पीरियड्स के दौरान सामान्य से कई गुना अधिक दर्द, असामान्य बदबूदार वेजाइनल डिस्चार्ज, पीरियड्स के बीच में स्पॉटिंग, कमर में लगातार दर्द और कभी-कभी हल्का बुखार आना इसके मुख्य संकेत हैं। समय पर इलाज न मिलने से यह फैलोपियन ट्यूब को ब्लॉक कर सकता है।

लक्षण सामान्य पीरियड पेन (Primary) बीमारी का संकेत (Secondary)
शुरुआत ब्लीडिंग शुरू होने से कुछ घंटे पहले पीरियड्स आने के कई दिन पहले से शुरू
अवधि शुरुआती 24 से 48 घंटों में शांत पूरे पीरियड या खत्म होने के बाद भी जारी
प्रभाव हीटिंग पैड या सामान्य आराम से राहत पेनकिलर लेने के बाद भी दर्द बेअसर
दर्द का फैलाव केवल पेट के निचले मध्य हिस्से में पीठ के निचले हिस्से, जांघों और पैरों तक
दैनिक जीवन हल्का असहज, पर काम जारी रहता है बिस्तर से उठना नामुमकिन, चक्कर और उल्टियां

यदि आपको अपने मासिक धर्म चक्र में नीचे दिए गए ‘रेड फ्लैग’ लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत एक योग्य गायनेकोलॉजिस्ट से पेल्विक अल्ट्रासाउंड और जांच करानी चाहिए:

  • दर्द के कारण बार-बार चक्कर आना, उल्टी होना या बेहोश हो जाना।

  • हर 1-2 घंटे में पूरी तरह पैड भीग जाना और बड़े थक्के (सिक्के के आकार से बड़े) निकलना।

  • पीरियड्स खत्म होने के बाद भी पेल्विक एरिया, पेट के निचले हिस्से या कमर में लगातार दर्द बना रहना।

  • नियमित रूप से ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक गोलियां (Mefenamic Acid आदि) खाने पर भी कोई राहत न मिलना।

  • 25 साल की उम्र के बाद अचानक पीरियड्स का दर्द कई गुना बढ़ जाना, जबकि पहले चक्र सामान्य रहता था।

याद रखें कि दर्द को सिर्फ किस्मत का हिस्सा मानकर चुपचाप सहना आपकी प्रजनन क्षमता (Fertility) और दीर्घकालिक स्वास्थ्य के साथ बड़ा समझौता हो सकता है। सही समय पर सोनोग्राफी और एमआरआई जैसे टेस्ट कराकर इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है।

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