MP के छोटे जिलों में डॉक्टरों की भारी कमी, सरकार देगी मेडिकल टीचर्स को हर महीने 50 हजार रुपये प्रोत्साहन भत्ता
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के छोटे जिलों में मेडिकल कॉलेजों के लिए योग्य शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए बड़ा निर्णय लेने की तैयारी कर ली है। अब इन जिलों में पढ़ाने वाले मेडिकल शिक्षकों को हर महीने अधिकतम ₹50,000 तक का प्रोत्साहन भत्ता दिया जाएगा। इस प्रस्ताव के साथ सरकार दो और बड़े फैसले पर काम कर रही है, जिससे डॉक्टरों की उपलब्धता और मेडिकल एजुकेशन सिस्टम को मजबूती दी जा सके।
पहले निर्णय में – 50 हजार तक प्रोत्साहन राशि
छोटे जिलों जैसे सिवनी, नीमच और मंदसौर में पिछले साल मेडिकल कॉलेज शुरू हुए थे, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति में कठिनाई सामने आई। सरकार अब न्यूनतम जनसंख्या और अन्य मापदंड तय कर उन जिलों को चिह्नित करेगी जहां शिक्षकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इस कदम से उन जिलों में स्थायी रूप से योग्य शिक्षक नियुक्त किए जा सकेंगे, जो अब तक बड़े शहरों को प्राथमिकता देते आए हैं।
दूसरे निर्णय में – 70 साल तक संविदा पर सेवा का मौका
सरकारी मेडिकल कॉलेजों से 65 की उम्र में रिटायर होने वाले डॉक्टरों को अब 70 वर्ष की आयु तक संविदा पर सेवा देने का अवसर दिया जाएगा।
इस वक्त संविदा सेवा का कोई औपचारिक प्रावधान नहीं है, लेकिन नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की गाइडलाइन में 70 वर्ष की उम्र तक सेवा की अनुमति है, जिस आधार पर निजी मेडिकल कॉलेजों में पहले से यह व्यवस्था लागू है।
उत्तर प्रदेश में यह नियम पहले से लागू है और अब मध्य प्रदेश सरकार भी इसी राह पर आगे बढ़ रही है।
तीसरा निर्णय – NHM डॉक्टरों को मिलेगा बांड सेवा का लाभ
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत सेवा दे रहे डॉक्टरों की अवधि को अब अनिवार्य सेवा बंधपत्र (बांड) के हिस्से के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
अभी तक NHM में सेवा को बांड की अवधि में नहीं गिना जाता था, जिससे डॉक्टरों को अतिरिक्त समय देना पड़ता था। अब यह बोझ घटेगा और युवा डॉक्टरों को सरकारी सेवा से जोड़ने में आसानी होगी।
8 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी
राज्य सरकार इस शैक्षणिक सत्र 2025-26 और अगले सत्र 2026-27 में मिलाकर 8 नए मेडिकल कॉलेज शुरू करने की योजना बना चुकी है।
इस साल श्योपुर और सिंगरौली में MBBS कोर्स शुरू करने के लिए NMC को आवेदन भेजा जा चुका है।
इसके बाद अगले सत्र में बुधनी, उज्जैन, मंडला, राजगढ़ सहित छह जिलों में कॉलेज शुरू करने की तैयारी है।
क्यों जरूरी है यह कदम?
राज्य सरकार का मानना है कि अगर योग्य शिक्षक ही नहीं मिलेंगे, तो कॉलेज खोलने का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अब आर्थिक प्रोत्साहन, संविदा सेवा और बांड नियम में बदलाव जैसे ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
यह तीनों प्रस्ताव जल्द ही राज्य की कैबिनेट बैठक में लाए जाएंगे, जहां से मंजूरी मिलते ही इन्हें लागू कर दिया जाएगा।









