September 13, 2026 11:10 pm

अमेरिका ने कमर्शियल जहाजों की हवाई सुरक्षा का दायरा घटाया, अब मिलेंगे सिर्फ 2 तय स्लॉट

पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर संकट और गहरा गया है। ईरान की बढ़ती आक्रामकता और लगातार होते ड्रोन व मिसाइल हमलों के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने कमर्शियल तेल टैंकरों को दी जाने वाली सैन्य सुरक्षा में भारी कटौती कर दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने विशेष रूप से लड़ाकू विमानों और ड्रोनों द्वारा दी जाने वाली रातभर की निरंतर हवाई निगरानी को सीमित करने का फैसला किया है। अब वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई के इस लाइफलाइन रूट से गुजरने वाले जहाजों को चौबीसों घंटे सुरक्षा मिलने के बजाय केवल प्रतिदिन दो तय ट्रांजिट स्लॉट में ही अमेरिकी हवाई छत्रछाया उपलब्ध कराई जाएगी।

फाइनेंशियल टाइम्स की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना मई 2026 से ही जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में ओमान के तटवर्ती रास्तों से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सघन हवाई सुरक्षा प्रदान कर रही थी। इस रणनीतिक कवच का उद्देश्य ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के हमलों के बावजूद दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखना था। पुरानी व्यवस्था के तहत जहाज ऑपरेटर अमेरिकी नौसेना के कोऑर्डिनेशन सेंटर से संपर्क साधकर विशेष कोऑर्डिनेट्स और समय हासिल करते थे, जिसके दौरान अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के विमान आसमान से उनकी निगरानी करते हुए सुरक्षित रास्ता निकालते थे। हालांकि, सितंबर 2026 की शुरुआत से इस पूरे सुरक्षा तंत्र को अचानक संकुचित कर दिया गया है।

नेवल कोऑपरेशन एंड गाइडेंस फॉर शिपिंग (NCAGS) द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री सलाहकारों और शिपिंग कंपनियों को भेजे गए गोपनीय ईमेल से इस बड़े नीतिगत बदलाव की पुष्टि हुई है। इस नए आदेश में साफ कहा गया है कि पहले मिलने वाली रातभर की लंबी सुरक्षा विंडो अब समाप्त कर दी गई है। जहाजों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे हर दिन निर्धारित किए गए दो विशेष टाइम स्लॉट के मुताबिक ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। यदि कोई टैंकर इन तय स्लॉट्स से पहले या बाद में इस संकीर्ण जलमार्ग में प्रवेश करता है, तो उसे अमेरिकी सेना से किसी भी तरह का हवाई बैकअप नहीं मिल सकेगा। मध्य पूर्व में तैनात यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस मुद्दे पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि जारी की गई आधिकारिक नौसैनिक एडवाइजरी अपने आप में अंतिम और स्पष्ट निर्देश है।

सुरक्षा घेरे को सीमित करने का यह अप्रत्याशित कदम ऐसे नाजुक मोड़ पर उठाया गया है जब खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हमले खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं। बीते बुधवार को ईरान ने आधिकारिक रूप से दावा किया कि उसने अपने पांच जहाजों पर हुए कथित अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में दो अमेरिकी नौसैनिक जहाजों और आठ विशाल तेल टैंकरों पर सटीक हमले किए हैं। इसके जवाब में अमेरिकी सैन्य सूत्रों ने पुष्टि की कि ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने हाल ही में अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिसके चलते दोनों महाशक्तियों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है।

ब्रिटेन की नौसैनिक निगरानी एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी इस पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया है। एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी कमांडो और समुद्री ड्रोन अब केवल होर्मुज के मुहाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुबई के अपतटीय क्षेत्रों और इराक के निकटवर्ती समुद्री मार्गों में भी व्यापारिक जहाजों को लगातार निशाना बना रहे हैं। 28 फरवरी 2026 को क्षेत्रीय संघर्ष भड़कने के बाद से अब तक 70 से अधिक कमर्शियल जहाजों पर घातक हमले दर्ज किए जा चुके हैं। इस अभूतपूर्व समुद्री असुरक्षा के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों का बीमा प्रीमियम आसमान छू रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है।

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