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आईआईएम इंदौर अपशिष्ट और जल प्रबंधन के लिए तकनीकी अनुसंधान चलाता है

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की सफाई व्यवस्था को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से और भी स्मार्ट बनाया जाएगा।

इसके लिए इंदौर नगर निगम और आईआईएम इंदौर के बीच जल, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर 2 साल का संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी सहयोग शुरू किया जाएगा।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में आयोजित मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

योजना के तहत आईआईएम इंदौर का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और नगर निगम संयुक्त रूप से चरणबद्ध तरीके से शहर की सफाई व्यवस्था का वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। इसका उद्देश्य इंदौर के स्वच्छता मॉडल को प्रौद्योगिकी आधारित, अधिक प्रभावी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है।

प्रथम चरण में अपशिष्ट प्रबंधन और जल के पुन: उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा

पहले चरण में अगस्त से दिसंबर 2026 तक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली का मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता, परिवहन प्रणाली और उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन शामिल होगा।

आईओटी के माध्यम से सीवरेज की निगरानी की जाएगी

दूसरे चरण में सार्वजनिक शौचालयों के संचालन के लिए नये वित्तीय मॉडल तैयार किये जायेंगे. इसके साथ ही IoT आधारित सीवरेज मॉनिटरिंग सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा. कचरा प्रबंधन से जुड़ी नई तकनीकों और नवाचारों का डिजिटल डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा।

एआई भविष्य की जरूरतों का आकलन करेगा

तीसरे चरण में अप्रैल से सितंबर 2027 तक संस्थागत क्षमता निर्माण और भविष्य की योजना पर काम किया जाएगा.

इस दौरान एआई-आधारित पूर्वानुमान और निर्णय समर्थन प्रणाली विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा, ताकि जल, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित निर्णय अधिक सटीक, वैज्ञानिक और प्रभावी हो सकें।

दूसरे शहरों के लिए मॉडल बनेगा

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में इंदौर लगातार देश में अग्रणी रहा है। अब इस मॉडल को टेक्नोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन के जरिए नई ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि आईआईएम इंदौर के साथ यह साझेदारी डेटा-आधारित और स्मार्ट समाधान विकसित करेगी, जो शहर की स्वच्छता प्रणाली को अधिक पारदर्शी, टिकाऊ और वैज्ञानिक बनाएगी।

इसके साथ ही इंदौर का मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए भी मार्गदर्शक साबित होगा।

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